सिटी न्यूज़

क्यों कहते हैं 'बागी बलिया' || History of Ballia || बलिया जिले की सम्पूर्ण जानकारी||up city news

UP City News | Aug 31, 2021 09:40 PM IST

पुण्यतोया भगवती गंगा , तम-अघ हारिणी तमसा, वाशिष्ठी सरयू, काम को दग्ध करने वाले कामेश्वर के कवलेश्वरताल, कुशहृदविंदु के सुरथ- सुरहताल आदि जल स्त्रोतों की अगाध जलराशि में ओतप्रोत जन्मभूमि के भू-भाग पर जब लिखने के लिये बैठता हूँ, तो लेखनी से अधिक द्रुत गति से बुद्धि और भावनाएँ दौड़ने लगती हैं।

खोंग यही नाम लिखा है, वैश्विक मानव जाति के इतिहासकार रागेय राघव ने अपनी पुस्तक अंधेरा रास्ता में आज हिमालय की उपत्यकाओं से निकल कर बंगाल की खाड़ी में महासागर से मिलने वाली जीवनदायिनी गंगा का। कालान्तर में यह कभी फारस की खाड़ी ( श्रीनार- क्षीरसागर) से आती थी। आचार्य चतुरसेन की माने तो इसीलिये हरिप्रिया- विष्णु प्रिया कही जाती है।

विमुक्त- भृगु क्षेत्र की बलियाग भूमि में भवानी सरयू-घार्घरा को वाशिष्ठी उस कृतज्ञता में कहना इस कारण से सर्वथा उपयुक्त है कि महर्षि भृगु शिष्य दर्दर अवध के कुलगुरु वशिष्ठ जी की आज्ञा से ही इस देवहा को गंगा से मिलाने लाये थे।