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क्या है सनातन धर्म में कल्पवास का महत्व, क्यों होते हैं इसके इतने सख्त नियम

UP City News | Jan 30, 2021 04:03 PM IST

प्रयागराज. 14 जनवरी को मकर संक्रांति स्नान पर्व के साथ ही संगम की रेती पर हर साल लगने वाले देश और दुनिया के सबसे बड़े अध्यात्मिक मेले की शुरुआत हो चुकी है. वहीं संगम की रेती पर बने हजारों तम्बुओं में लाखों कल्पवासी भी पौष पूर्णिमा स्नान पर्व के साथ गुरूवार से कल्पवास शुरु कर दिया है. संगम की रेती पर हर साल माघ मेला, छह वर्षों में कुम्भ और 12 वर्षों में महाकुम्भ का आयोजन होता है. कुम्भ और माघ मेले में छह प्रमुख स्नान पर्व पड़ते हैं. मकर संक्रान्ति, पौष पूर्णिमा, मौनी अमावस्या, बसंत पंचमी, माघी पूर्णिमा और महाशिवरात्रि, कुम्भ और माघ मेले में संगम की रेती पर लाखों श्रद्धालु यहां आकर कल्पवास करते हैं. कल्पवासी एक माह तक संगम की रेती पर बने तम्बुओं में रहते हैं.