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1857 की क्रांति: 90 साल पहले ही आजाद हो गया था प्रयागराज, फिर कैसे बना गुलाम, जानिए यहां

UP City News | Jun 10, 2021 09:12 PM IST

ब्रितानिया हुकूमत में जब-जब यह नाम लिया जाता था तो अंग्रेज कांप उठते थे. कौशाम्बी के महगांव निवासी क्रांतिकारी मौलाना लियाकत अली खान की नाम की अंग्रेजों में दहशत थी. वर्ष 1857 में क्रांतिकारियों की अगुवाई करते हुए मौलाना ने इलाहाबाद की सदर तहसील पर कब्जा किया. कई अंग्रेज मारे गए थे और आधे से ज्यादा भाग गए थे. पूरी रियासत पर कब्जा करने के बाद 7 जून 1857 से 17 जून 1857 तक करीब 11 दिनों तक मौलाना ने अपनी सरकार चलाई थी.

इविवि के मध्यकालीन व आधुनिक विभाग के इतिहास के प्रो.योगेश तिवारी ने बताया कि 1857 में जब हिंदुस्तानियों ने अंग्रेजो के खिलाफ बगावत का बिगुल बजाया और अवध में इसे जोर शोर से आगे बढ़ाया जा रहा था उस वक़्त बगावत की लपटे प्रयागराज और उसके आस पास के इलाकों में भी पहुंच चुकी थी. हालांकि प्रयागराज में बगावत की आवाज वहां के पंडों ने उठाई थी पर इलाहबाद के अवाम ने इस जंग में कवायद के लिए मौलवी लियाकत अली को चुना. ये जंग बहुत लम्बी तो नहीं चली और बागियों को हार का मुंह भी देखना पड़ा था पर उन्होंने जिस बहादुरी और शेर दिली के साथ जंग लड़ी उसे इतिहास कभी भूल नहीं पायेगा.