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कांधा देने के लिए थी चार लोगों की जरूरत, इंसानियत तोड़ रही थी दम, तब सिपाही दिया सहारा

UP City News | Apr 30, 2021 12:11 AM IST

मुरादाबाद. कोरोना महामारी में जहां ऐसे दृश्य दिखाई दे रहे जिन्हें देखकर इंसान थर्रा रहा है, अपने अपनों का साथ देने के बच रहे है. वहीं पुलिस के एक सिपाही ने मानवता की एक मिसाल कायम की. सड़क किनारे पड़े एक व्यक्ति के शव को कंधा देने के लिए परिजन चौथे व्यक्ति का इंतजार कर रहे थे. तमाशा देख रही भीड़ में से किसी व्यक्ति ने आगे आने की जहमत नही उठायी. वही मौके पर पहुंचे एक पुलिसकर्मी ने आगे आकर शव को कंधा देकर शमशान घाट तक पहुंचाया. मृतक व्यक्ति की मौत इलाज के दौरान सरकारी अस्पताल में हुई थी. अभी उसकी कोरोना की रिपोर्ट आनी बाकी है.

मुरादाबाद के मुगलपुरा क्षेत्र के लालबाग स्थित दसवां घाट श्मशान घाट तक पहुचने के लिए एक व्यक्ति का शव सड़क के किनारे नाले के पास उसकी अर्थी को कंधा देने एक चौथे व्यक्ति का इंतजार कर रहा था. शव के चारों तरफ तमाशबीन बनी भीड़ शव से दूर खड़े होकर केवल तमाशा देख रही थी. कोरोना के भय के डर की वजह से कोई भी व्यक्ति आगे आकर शव को कंधा देने की हिम्मत नही जुटा पा रहा था. इसी बीच इस बात की सूचना पुलिस को दे दी. सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस के एक सिपाही ने मानवता का परिचय देते हुए आगे आकर उस मृत व्यक्ति की अर्थी को कंधा देकर उसकी अंतिम यात्रा को शमशाम घाट तक पहुचाया.

सड़क किनारे नाले के पास शव पड़े होने की सूचना पर लालबाग चौकी इंचार्ज और सिपाही अरुण सिंह जब मौके पर पहुंचे तो उन्होंने देखा कि चारो तरफ भीड़ लगी हुई है. एक व्यक्ति शव के पास फोन पर बात कर रहा है. जब उसने जानकारी करी तो पता चला कि शव के साथ उनके दो बेटे और एक भाई है. शमशान तक अर्थी ले जाने के लिए कोई चौथा व्यक्ति नही मिल रहा जो कंधा दे सके. सिपाही अरुण सिंह तेज आवाज में चींख कर भीड़ से पूछा कि है कोई इंसानियत का बंदा जो इस अर्थी को कंधा दे सके. लेकिन भीड़ में से कोई भी व्यक्ति आगे नही आया.

मुरादाबाद के डिप्टीगंज के रहने वाले राकेश ट्रेलर का काम करता था. कुछ दिन पहले तबियत खराब होने की वजह से एक निजी अस्पताल में अपना इलाज करवा रहा था. लेकिन राकेश की अचानक हालात बिगड़ गयी, और डॉक्टर ने इलाज के लिए सरकारी अस्पताल ले जाने के लिए कहा. राकेश को जिला अस्पताल में भर्ती कर लिया गया लेकिन इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गयी. राकेश के दो बेटे और एक भाई है.

जिला अस्पताल में इलाज के दौरान राकेश की मौत हो गयी. मृतक राकेश की कोरोना जांच का सेंपल भी लिया गया था. लेकिन कोरोना की रिपोर्ट आने से पहले ही उसकी मौत हो गयी. अस्पताल वालो ने उसके शव को घर की ही एक चादर में लपेट कर एम्बुलेंस में रखवा दिया. उसके हाथ मे कैनुला तक नही निकाला गया था. कोरोना रिपोर्ट आने से पहले ही राकेश के शव को परिजनों को सौंप दिया. अगर उसकी रिपोर्ट पोजेटिव आयी तो उसकी अर्थी को कंधा देने वाले तीनो परिजन व सिपाही तब तक ना जाने कितने लोगों के संपर्क में आ चुके होंगे.