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up election 2022: परिवार पर आई मुसीबत तो वतन लौट आईं रूपाली, जानिए रूपाली की इनसाइड रीयल स्टोरी

UP City News | Jan 30, 2022 01:29 AM IST

ख्वाहिशों के बादलों पे चढ़ के, वक्त का गिरेबां पकड़के, पूछना है जीत का पता, रूठी तकदीरें तो क्या, टूटी शमशीरें तो क्या, इन टूटी शमशीरों से ही कर हर मैदान फतेह... चुनावी मैदान में कुछ ऐसा ही करने की कोशिश रहीं हैं फतेहाबाद विधानसभा से सपा प्रत्याशी रूपाली दीक्षित, जो सियासत में तो नई दिखती हैं लेकिन अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाने और कुछ नया कर गुजरने की ख्वाहिश लेकर मैदान में उतरी हैं. हौसला देने वाले पिता जेल में बंद हैं फिर भी सियासी सूरमाओं से लोहा ले रही हैं. वे कहती हैं कि 15 दिन का चुनाव पांच साल की जिम्मेदारी तय करता है और इस जिम्मेदारी को लेने के लिए पूरी तरह से तैयार हूं, क्योंकि मैं चाहती हूं कि लोग मुझे सिर्फ उस रूपाली के नाम से जानें जो लोगों के दुखों को कम करने के लिए हमेशा उनके बीच रहती है...

Climbing on the clouds of desire, holding on to the time, have to ask, the address of victory, what if the bad luck, what if the broken shamsheers, Fateh every ground by doing only with these broken shamsheers... Tried to do something similar in the election field Rupali Dixit, SP candidate from Fatehabad assembly, who looks new in politics but has entered the fray with the desire to carry forward her father's legacy and do something new. The encouraging father is imprisoned in jail, yet he is taking on the political stalwarts. She says that the 15-day election decides the responsibility of five years and I am fully prepared to take this responsibility, because I want people to know me only by the name of Rupali, who works to ease the sufferings of the people. For it is always among them...