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क्या आप स्वेज नहर के बारे में जानते हैं, नहीं तो इस खबर में मिलेगी नहर को बनाने की वजह

UP City News | Apr 01, 2021 11:38 PM IST

नई दिल्ली. स्वेज नहर दुनिया के सबसे व्यस्तम समुद्री मार्गाें में से एक मानी जाती है. दुनिया भर में होने वाले समुद्री कारोबार का 12 फीसदी आवागमन इस नहर के द्वारा होता है. इस नहर के बन जाने के बाद एशिया और यूरोप के बीच दूरी 6000 किलो मीटर कम हो गई है. इसके सफर को तय करने में सात दिन की भी कमी हुई है. इस नहर से हर रोज करीब 50 हजार जहाज यहां से गुजरते हैं. जिन पर 10 बिलियन डाॅलर यानी 73 हजार करोड़ रूपये का सामान लदा होता है. 1854 में फ्रांस के राजनयिक डि लेसेप्स ने स्वेज नहर बनाने की योजना पर काम शुरू किया था. 1858 में नहर निर्माण के लिए यूनिवर्सल स्वेज शिप कैनाल कंपनी की स्थापना की गई. इस कंपनी को 99 वर्ष के लिए नहर निर्माण का संचालन सौंपा गया. यह नहर 1869 में बनकर तैयार हो गई थी. इसके बाद इसे अंतर्राष्ट्रीय यातायत के लिए खोल दिया गया. 1956 में मिस्त्र के राष्ट्रपति अब्दुल नासिर ने स्वेज नहर का राष्ट्रीयकरण कर दिया. स्वेज नहर कंपनी में ज्यादातर शेयर ब्रिटिश और फ्रांस सरकार के थे. राष्ट्रपति नासिर के इस कदम से दोनों देशों में हड़कंप मच गया. इसके बाद ब्रिंटेन फ्रांस ने इजराइल के साथ मिलकर मिस्त्र पर हमला कर दिया. हालांकि अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र के हस्तक्षेप की बजह से ब्रिटेन और फ्रांस को अपनी सेना वापस बुलानी पड़ी. इसके बाद से इस नहर पर मिस्त्र का अधिकार है. स्वेज नहर को 26 जुलाई 1956 को पहली बार बंद किया गया. नहर के राष्ट्रीयकरण की घोषणा के बाद हुए विवाद के कारण फैसला लिया गया था. जून 1967 में इजराइल का मिस्त्र, सीरिया और जाॅर्डन में युद्ध छिड़ गया था. यह युद्ध करीब छह दिन चला. इस युद्ध के कारण 15 जहाज स्वेज नहर के रास्ते में फंस गए. इनमें से एक जहाज डूब भी गया था और बाकी के 14 जहाज आठ साल तक कैद होकर रह गए. इसके कारण नहर से व्यापार 8 साल तक के लिए बंद हो गया. इसके बाद साल 2004, 2006 और 2017 में जहाजों के फंसने के कारण यातायात कुछ दिन के लिए बाधित रहा