सिटी न्यूज़

क्या आप भूतों में यकीन रखते हैं? आपका जवाब हां है या नहीं, आप दोनों ही स्थिति में मेरी मदद करने के लिए ये वीडियो जरूर देखें

UP City News | Jan 24, 2021 12:43 AM IST

दरअसल, मैं इस आर्टिकल में कॉलेज के समय के अपने एक अनुभव को आपसे शेयर करने जा रहा हूं. कॉलेज में हम सभी पढ़ने के लिए ही जाते हैं और मैं भी पढ़ने के लिए ही गया था. 12वीं के बाद, मैंने अपना दाख़िला एक सांध्य कॉलेज (ईवनिंग कॉलेज) में लिया था. कॉलेज में, पढ़ाई के साथ साथ मैंने नाट्य संस्था को भी जॉइन कर लिया था. नाट्य संस्था और पढ़ाई एक साथ होने की वजह से अक्सर ही मुझे कॉलेज में देर हो जाया करती थी. कई बार तो 7 भी बज जाया करते थे. हालांकि, मुझे अभिनय का जुनून था इसलिए वो देरी खलती नहीं थी. इसी तरह से समय बीतता रहा और मैं कॉलेज के माहौल में रमता चला गया. फर्स्ट ईयर खत्म होने को आ गया यानी परीक्षा की घड़ी करीब आ चुकी थी. इधर, नाट्य संस्था के एक सीनियर फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (FTII) की तैयारी में जुटे थे और हम सभी उन्हें तैयार कराने में. हमारी कोशिश और तब बढ़ गई थी जब उनका रिटन टेस्ट क्लियर हो गया था और अब उन्हें ऑडिशन के लिए तैयारी करनी थी. सीनियर के ऑडिशन की तैयारी और डायलॉग लिखने के लिए मुझे ही चुना गया था. यह आपसी अंडरस्टैंडिंग के हिसाब से था. मैं भी खुश था. ऑडिशन की तैयारी के पहले रोज़, वह सीनियर और मैं (कुछ और साथियों के साथ), शाम 6 बजे से ऑडिशन की तैयारी में जुट गए थे. ऑडिशन के ऐक्ट के डायलॉग लिखते और अभिनय की बारीकियों को समझते समझते ही 7 बज गए.  अमूमन, शाम 6:30 पर कॉलेज का आखिरी पीरियड खत्म हो जाया करता था और 7 बजे तक पूरा कॉलेज खाली हो जाता था. उस शाम भी ऐसा ही हुआ. कॉलेज के कॉरिडोर में सिर्फ, ब्राउन ड्रेस में चौकीदार ही दिखता था या कल्चरल टीम के सदस्य. मुझे उस पहले दिन का समय तो याद नहीं है. ऐसा इसलिए, क्योंकि मेरे पास पहला मोबाइल ही सेकेंड ईयर में आया था और घड़ी भी मैं पहनता नहीं था.  हालांकि, अनुमान यही है कि उस वक्त साढ़े 7 बजे होंगे. मैंने सभी साथियों से कहा कि मैं वॉशरूम जा रहा हूं. वॉशरूम जाते वक्त, मैंने देखा कि कॉरिडोर में, मेरे अलावा दूसरा कोई भी शख्स नहीं था. मैं वॉशरूम के रास्ते में, कॉरिडोर से गुजर रहा था. अभी मेरे और वॉशरूम के रास्ते में, करीब 25-30 कदमों का फासला रहा होगा. चलते-चलते, अचानक मेरी नज़र ज़मीन पर गई. मैंने देखा कि फर्श पर, खून की बूंदे थी. खून की ये बूंदें, रास्ते भर में थी. मैं चले जा रहा था और वह बूंदें नज़र आए जा रही थी. अचानक वह बूंदें गायब हो गईं. मैं वॉशरूम गया और दो मिनट बाद ही जब मैं लौटकर आया, तो जो मैंने देखा वह देखकर मैं सचमुच चकरा गया. खून की वे सभी बूंदें वहां से गायब थीं. मैं हक्का-बक्का रह गया. मैं लौटकर आया और तुरंत दोस्तों को पूरा वाकया बताया. सभी दोस्तों ने, खासतौर से, उन सीनियर ने और हम में से नशे में चूर 2 साथियों ने कहा कि कोई कुत्ता गया होगा. उसका खून होगा. मैं शराब-सिगरेट का सेवन नहीं करता हूं इसलिए खुद के अनुभव को मैं कैसे झुठला सकता था? और मेरे दिमाग में जो खटकपन पैदा हुआ था, साथियों की बात उसे मिटा नहीं सकी. इसके बाद, जब तक उस ऑडिशन की तैयारी मैं कराता रहा, हर रात मुझे वो खून की बूंदें नज़र आती रहीं और गायब होती रहीं.  मैं आज तक उस दृश्य को भुला नहीं सका हूं. मैंने जब ये देखा था तब मेरी उम्र 17 साल की थी और आज 32 साल की है. 15 साल बाद भी, मुझे आज तक उस एक सवाल का जवाब नहीं मिल सका है कि वो मेरे दिमाग का वहम था या कोई अकल्पनीय घटना!