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अलीगढ़: टाइम कैप्सूल के जरिए जमीन में दफन होगा एएमयू का इतिहास

UP City News | Jan 27, 2021 05:55 PM IST

अलीगढ़. यूपी में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के इतिहास को आज एक टाइम कैप्सूल के जरिए कैंपस के अंदर जमीन में दफन किया है. 26 जनवरी की सुबह आज एएमयू का इतिहास टाइम कैप्सूल के जरिए ऐतिहासिक विक्टोरिया गेट के सामने जमीन में दफन कर दिया गया. इस कार्यक्रम में वाइस चांसलर तारिक मनसूर ने शिरकत की. इस कार्यक्रम को ऑनलाइन रखा गया. एएमयू से जुड़ी बिरादरी व अन्य लोगों ने इस कार्यक्रम मैं ऑनलाइन शिरकत की.

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के ऐतिहासिक विक्टोरिया गेट के सामने पार्क में कैप्सूल सहेजने के लिए 30 फीट गहरा गड्ढा खोदा गया था. डेढ़ टन से अधिक वजन का स्टील का कैप्सूल तैयार किया गया है. इसमें यूनिवर्सिटी के सौ साल के सफर के हर गतिविधि को प्रिंट फारमेट में रखा गया है. सर सैयद ने मदरसा खोलने से लेकर एमएओ कालेज की स्थापना तक किस तरह संघर्ष किया. किस से क्या मदद ली? अंग्रेजों से कालेज स्थापना के लिए 74 एकड फौजी छावनी की जमीन कैसे मिली सभी को शामिल किया गया है. कालेज स्थापना सौ साल बाद 1920 में यूनिवर्सिटी कैसे बनी? तब से अब तक कितने कुलपति, कुलाधिपति रहे. दीक्षा समारोह व सर सैयद डे में कौन-कौन अधिकारी शामिल हुए उन्होंने क्या बाेला ये सारा इतिहास कैप्सूल में रखा गया है. एएमयू जनसंपर्क कार्यलय के अनुसार कैप्सूल में डिजिटल फार्म में कुछ नहीं रखा गया. क्योंकि तकनीक बदलती रहती है. अगले दस साल बाद कौनसी तकनीक विकसित हो ये किसी को नहीं पता. अगर डाटा को हम पेन ड्राइव, हार्ड डिस्क आदि के रूप में रखें तो उसका इस्तेमाल कभी भविष्य में हो पाएगा इसकी कोई गारंटी नहीं है. इस लिए पूरा इतिहास का डाटा क्लाउड स्टारेज भी कर रहे हैं. इसके लिए कई कंपनियों से बात चल रही है.

एएमयू के वाइस चांसलर तारिक मनसूर ने टाइम कैप्सूल को लेकर कहा कि इसके जो इतिहास की बात है बहुत अहमियत है. इसका कारण यह है कि हमने एक कमेटी बनाई थी कि उसमें क्या-क्या चीज रखनी चाहिए जो 100 साल का इतिहास टाइम कैप्सूल में रखा जा रहा है. इसमें दो तरीके से हमने डिवाइड किया है. एक तो एएमयू कॉलेज और अलीगढ़ मूवमेंट का इतिहास हैं और दूसरा एएमयू का इतिहास है. एएमयू की क्या उपलब्धियां रही. इसमें एएमयू से संबंधित दस्तावेज प्रधानमंत्री का स्पीच और अन्य चीज है. 100 साल के लिए रखी जाएंगी जा रही है. इसका डिजिटल फॉर्मेट भी प्रिजर्व कर रहे हैं. यह 100 साल बाद निकलेगा. इसमें नाइट्रोजन गैस भी डाली है ताकि जो डॉक्यूमेंट हम रख रहे हैं वह खराब ना हो.