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आगरा कभी भी पहुंच सकती है ऑक्सीजन, झारखंड से दो टैंकर विमान से किए एयरलिफ्ट

UP City News | Apr 28, 2021 10:18 PM IST

आगरा. कोरोना की दूसरी लहर में मरीजों को सबसे ज्यादा आक्सीजन की जरूरत पड़ रही है. अचानक मांग ज्यादा बढ़ जाने के कारण पूरे प्रदेश में ऑक्सीजन की कमी हो गई है. आगरा में भी हर दिन मरीज ऑक्सीजन की कमी से जूझ रहे हैं. आगरा प्रशासन हर दिन बाहर से ऑक्सीजन मंगा रहा है. बुधवार को झारखंड से आगरा के लिए एयरफोर्स के विमानों से दो टैंकर एयरलिफ्ट होकर आ रहे हैं जो कभी भी आगरा पहुंच जाएंगे. इन टैंकरों के आने के बाद आगरा में ऑक्सीजन की थोड़ी बहुत कमी पूरी हो सकती है.

प्रदेश भर में ऑक्सीजन की भारी कमी के चलते मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. लगातार बढ़ रही मांग और कम हो रहे उत्पादन कोरोना मरीजों के लिए घातक होता जा रहा है. आगरा में ऑक्सीजन की भारी किल्लत हो गई हैण् कई अस्पतालों ने बेहद खतरनाक स्थिति से जिला प्रशासन को भी अवगत करा दिया था. कई अस्पतालों ने तो ऑक्सीजन समाप्ति का बोर्ड तक लगा दिए थे. ऑक्सीजन की कमी न हो इसलिए जिला प्रशासन से बाहर से भी ऑक्सीजन मंगाई जा रही है. बुधवार को यानी 28 अप्रैल 2021 को झारखंड से आगरा के लिए एयरफोर्स के विमानों ने दो टैंकर एयरलिफ्ट होकर आ रहे हैं.

जिलाधिकारी पीएन सिंह ने बताया कि वायुसेना के यान से सुबह 7 बजे लिक्विड ऑक्सीजन टैंकर की लोडिंग हो चुकी है जो किसी भी समय ऑक्सीजन आगरा पहुंच सकती है. इससे पहले 25 अप्रैल को ऑक्सीजन किल्लत के बीच 16 टन लिक्विड ऑक्सीजन से गाजियाबाद के मोदी नगर प्लांट से तरल ऑक्सीजन की रिफिलिंग कैप्सूल में कराई गई थी. जबकि 22 अप्रैल 2021 को जमेशदपुर प्लांट से ऑक्सीजन नहीं मिली तो आनन-फानन में गाजियाबाद के मोदी नगर प्लांट से तरल ऑक्सीजन की रिफिलिंग कैप्सूल में कराई गई थी.

क्यों पड़ रही है ऑक्सीजन की जरूरत
दरअसल कोरोना वायरस की दूसरी लहर में मरीजों को सांस लेने में तकलीफ सबसे अधिक हो रही है. आईसीएमआर के अनुसार नई लहर में मरीजों के लक्षणों में बदलाव हुआ है. पहले बुखार, गले में दर्दए मांस पेशियों में दर्द इत्यादि सबसे अधिक था लेकिन अभी 54 फीसदी से भी ज्यादा मरीजों को संक्रमण होने के बाद सांस लेने में तकलीफ हो रही है. ऐसे में ऑक्सीजन की जरूरत भी बढ़ रही है. मरीजों का बाइपेप, केनुल नेजल व वेंटिलेटर पर हाई फ्लो ऑक्सीजन उपकरणों से उपचार हो रहा है जिसमें ऑक्सीजन खपत बढ़ गई है. इसके कारण अस्पतालों में ऑक्सीजन किल्लत गहरा गई है.