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UP City News | May 12, 2021 05:29 PM IST

शहर से लेकर गांव तक मातम, पीपल के पेड़ पर दिख रही हैं बस मौत की मटकियां, देखें तस्वीरें

वैश्विक महामारी कोरोना ने कितनों को असमय ही मौत की नींद सुला दिया है. किसी को आक्‍सीजन नहीं मिला. तो किसी को बेड और वेंटिलेटर. किसी को आईसीयू बेड नहीं मिलने से सड़क पर ही दम तोड़ना पड़ा. शहर से लेकर गांव तक मौत का मातम पसरा हुआ है.

वैश्विक महामारी कोरोना ने कितनों को असमय ही मौत की नींद सुला दिया है. किसी को आक्‍सीजन नहीं मिला. तो किसी को बेड और वेंटिलेटर. किसी को आईसीयू बेड नहीं मिलने से सड़क पर ही दम तोड़ना पड़ा. शहर से लेकर गांव तक मौत का मातम पसरा हुआ है. इस बेबसी के बीच एक बात हर पीडि़त परिवार को एक-दूसरे से जोड़ती है कि उन्‍होंने परिवार के किसी अपने को खोया है. यही वजह है कि जिन पीपल की छाव और चबूतरे के नीचे बैठकर कुछ माह पहले तक हम लंबी सांसे लेकर गप्‍पे लड़ाते रहे हैं. वहां मौत की मटकियां ही नजर आ रही है.

ये नजारा गोरखपुर के हड़हवा फाटक रोड से कृष्‍णानगर के बीच का है. यहां पर पीपल के पेड़ पर ढेर सारी मटकियां लटकी हुई नजर आ रही हैं. ये मटकियां इस बात की गवाह भी हैं कि परिवार ने किसी अपने को खोया है. आमतौर पर इन पेड़ों पर एकाध मटकी ही लटकी नजर आती रही है. वैसे तो इसके चबूतरे पर बैठकर लोग अक्‍सर सु‍बह-शाम गप्‍पे भी लड़ाया करते रहे हैं. लेकिन, आज वैश्विक महामारी कोरोना 2.0 के बीच आक्‍सीजन की कमी और सांस फूलने के बाद अस्‍पतालों से लेकर सड़क तक पर लोगों ने दम तोड़ दिया.

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इन परिवारों ने जैसे-तैसे अपनों की लाशों का अंतिम संस्‍कार कर दिया. हिन्‍दू रीति-रिवाज के अनुसार किसी ने तेरहीं, किसी ने सोलहा तो किसी ने आर्य समाज रीति से क्रियाकर्म कर दिया. लेकिन, असमय हुई परिवार के सदस्‍य की मौत के बाद अधिकतर लोगों ने आत्‍मा की श‍ांति के लिए हिन्‍दू धर्म के रीति-रिवाज के अनुसार तेरह और 16 दिन का ही संस्‍कार पूर्ण किया. इस दौरान जब त‍क क्रियाकर्म चलता है, हर दिन पीपल के पेड़ पर मटकी टांगने और उसमें नीचे की ओर एक सुराख कर पानी भर दिया जाता है. हिन्‍दू धर्म में मान्‍यता है कि पीपल के पेड़ पर देवता का वास होता है. यही वजह है कि आत्‍मा की शांत‍ि के लिए मटकी टांगी जाती है.

गोरखपुर के कृष्‍णानगर प्राइवेट कालोनी के रहने वाले श्रीप्रकाश शरण क्रियाकर्म की रस्‍म को पूरा करने के लिए पीपल के पेड़ में मटकी टांगने आए हैं. उनकी जिंदगी में मातम पसरा हुआ है. उन्‍होंने चार माह में दो बड़ी बहन, एक बड़े भाई और एक छोटे भाई को खो चुके हैं. वे बताते हैं कि उनके परिवार में चार महीने में चार लोगों की मौत हुई है. कोविड-19 की वजह से उन्‍होंने अपने भाई और बहन को खो दिया. अब वो भाई-बहनों में अकेले बचे हुए हैं. वे यहां पर अं‍तिम संस्‍कार की रस्‍म को पूरा करने के लिए आए हैं.

गोरखपुर के एल्‍यूमिनियम फैक्‍ट्री हड़हवा फाटक के रहने वाले रौनक श्रीवास्‍तव ने कोविड-19 की चपेट में आने की वजह से पिता को खो दिया. वे उनके क्रियाकर्म की रस्‍म को पूरा कर रहे हैं. उन्‍होंने बताया कि कोविड-19 से हो रही मौतों की वजह से शहर में अधिकतर पीपल के पेड़ों पर मटकियां टंगी हुई नजर आ रही हैं. पहले 10 से 15 दिन में एकाध म‍टकियां ही दिखाई देती रही हैं. लेकिन, कोरोना की वजह से अधिक मौतें होने से पीपल के पेड़ों 5 से 6 मटक‍ियां दिखाई दे रही है. आक्‍सीजन की कमी की वजह से लोग मर रहे है. शरीर के अंग खराब हो रहे हैं. इस वजह से लोगों की मौत हो रही है.

पंडित आशुतोष चतुर्वेदी बताते हैं‍ कि आक्‍सीजन की कमी की वजह से कोरोना पीडि़त लोगों की मौत हो रही है. अस्‍पतालों में बेड नहीं मिल पा रहा है. आक्‍सीजन और सुविधा नहीं‍ मिलने से मौतें काफी हो रही है. सनातन धर्म में क्रियाकर्म में आत्‍मा की शांति के लिए मटकियां पीपल के पेड़ में टांगी जाती थी. आज शहर में किसी भी पीपल के पेड़ पर 15 से 20 मटकियां टंगी मिल जाएंगी. लेकिन, पहले 15 से 20 दिन में एक मटकी टंगी दिखाई देती थी.