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UP City News | Feb 01, 2021 02:20 PM IST

तस्वीरों में देखे गोरखपुर में 10 दिवसीय हस्तशिल्प बाजार का हुआ आगाज

भारत में निर्मित वस्तुओं को बढ़ावा देने के साथ-साथ इसे हर घर तक पहुंचाने के उद्देश्य से हस्त निर्मित वस्तुओं के एक विशाल शिल्प मेले का आयोजन किया जा रहा है गोरखपुर कचहरी मैदान में हस्तशिल्प के 10 दिनों तक चलने वाले इस मेले में देश के कोने कोने से कई हस्तशिल्पकार अपनी अपनी वस्तुओं को लेकर पहुचे है

गोरखपुर भारत में बनी वस्तुओं को बढ़ावा देने के साथ-साथ इसे हर घर तक पहुंचाने के उद्देश्य समय-समय पर हस्तशिल्प मेले का आयोजन किया जाता है. अन्य हस्तशिल्पों की तुलना में कपड़ा या वस्त्र उद्योग श्रमिकों की सबसे बड़ी संख्या को रोजगार भी प्रदान करता हैं.

आपको बता देंं कि, इस हस्तशिल्प बाजार में मुरादाबाद के पीतल, बरेली के जरि जरदोजी, भदोही की कालीन, मधुबनी की पेंटिंग ड्राई फ्लावर, आगरा का लेदर, लखनऊ का चिकन, बस्ती का जरी, कोल्हापुरी चप्पल, जयपुर के आर्टिफिशियल ज्वेलरी, सहारनपुर के वुड कार्विंग, अल्मोड़ा पिथौरागढ़ के हैंड इम्ब्राडरी, पश्चिम बंगाल के ड्राई फ्लावर और बनारस के जरी से बने साड़ी के साथ ही गोरखपुर का टेराकोटा शामिल हुए है किया गया.

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यह व्यापार मुख्य रूप से गोरखपुर, पिपरौली , बरहलगंज और रिगोली बाजार में स्थित है पावर-लूम उद्योग में लगभग आधी इकाइयों को सहकारी समितियों के रूप में संगठित किया गया है.

जो लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ था वही हस्तशिल्प के क्षेत्रीय निदेशक ने बताया कि भारत में निर्मित वस्तुओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य इस मेले का आयोजन किया गया है.

जिले की भेड़ों से खरीदे जाने वाले ऊन को कच्चे माल के रूप में उपयोग किया जाता है, कभी-कभी राज्य के पहाड़ी जिलों से बेहतर गुणवत्ता का ऊन आयात किया जाता है। कंबल जो मोटे होते हैं, उन्हें जिले के ग्रामीणों को बेच दिया जाता है.