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Allahabad High Court Bar Association Elections : प्रत्याशी उष्मा मिश्र बोलीं- महिला अधिवक्ताओं के लिए करूंगी बड़ा काम

Allahabad High Court Bar Association Elections :  प्रत्याशी उष्मा मिश्र बोलीं- महिला अधिवक्ताओं के लिए करूंगी बड़ा काम
UP City News | Nov 30, 2021 01:34 PM IST

दीपक गभीर
प्रयागराज. आगामी कल 1 दिसंबर को एशिया की सबसे बड़ी अदालत इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad high court) के बार एसोसिएशन की कार्यकारिणी के लिए होने वाले चुनाव में जहां कार्यकारिणी में पुरुष उम्मीदवार मैदान में हैं तो वहीं इस चुनाव में महिला उम्मीदवार भी मैदान में अपनी किस्मत आज़माने उतरी हैं. इलाहाबाद हाईकोर्ट में महिला अधिवक्ताओं की भागीदारी भी पुरुष अधिवक्ताओं के मुकाबले कम नहीं है. कुल 28 पदों के लिए 199 प्रत्याशी मैदान में आए है. इन 28 पदों में से एक पद ऐसा भी है जिसके लिए तीन महिला दावेदार मैदान में हैं. ये पद है संयुक्त सचिव महिला का हर साल होने वाले बार एसोसिएशन (Allahabad high court bar association) के चुनाव में वैसे तो महिला प्रत्याशी भी मैदान में अपना दमखम दिखाती हैं. इस बार भी महिलाओं ने अपनी किस्मत आज़माने का फ़ैसला लेते हुए चुनावी मैदान में ताल ठोंकी है.

बार एसोसिएशन के चुनाव में संयुक्त सचिव महिला पद के लिए चुनाव लड़ रही तीन महिला उम्मीदवारों में से एक प्रत्याशी है उष्मा मिश्र हैं, जो हाईकोर्ट में करीब पिछले 13 सालों से प्रैक्टिस कर रही हैं. उष्मा मिश्र खास तौर से महिलाओं से जुड़े हुए मुकदमों की पैरवी करती रही हैं. सबसे खास बात ये है कि इस पद के लिए तीनों ही महिला उम्मीदवारों में से उष्मा मिश्रा बाकी दोनों उम्मीदवार आँचल ओझा और रितिका मौर्य से काफ़ी सीनियर हैं. संयुक्त सचिव महिला पद के लिए उष्मा मिश्र को काफी मजबूत दावेदार माना जा रहा है. उष्मा मिश्र की क्रम संख्या 3 है.

UPCITYNEWS से बातचीत करते हुए उष्मा मिश्र ने अपनी प्राथमिकता के बारे में बताया. उष्मा मिश्र ने बताया कि मुकदमों की फाइलिंग में कई बार अधिवक्ताओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. इसके लिए मेरी कोशिश रहेगी कि किसी भी अधिवक्ता को परेशानी ना हो और उनके मुकदमे की फाइलिंग आराम से हो जाए. खास तौर से महिला अधिवक्ताओं को बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ता है. जिन महिला अधिवक्ता के बच्चे छोटे है और वो कोर्ट में अपने साथ उनको नहीं ला सकती उनके लिए मैं कुछ करना चाहती हूं. उनके लिए मैं हमेशा खड़ी हूं. उनके हितों के लिए मेरा संघर्ष हमेशा जारी रहेगा. इसलिए अधिवक्ताओं को ऐसे प्रत्याशी को चुनना चाहिए जो उनके हितों के बारे में सोचे. मेरा कोई निजी स्वार्थ नहीं है.

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मेरी प्राथमिकता अधिवक्ताओं की सुरक्षा और रक्षा करना है. मैं हमेशा किसी की भी मदद के लिए 24 घंटे खड़ी हूं. काम बताने के लिए नहीं बल्कि काम दिखाने के लिए होता है और इसके लिए मुझे बार मे अगर जगह मिलती है तो मैं पूरा योगदान दूंगी. महिला अधिवक्ता जो अपने छोटे बच्चों को घरों में छोड़ने पर मजबूर है. उनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है. इसके लिए मैं चाहती हूं कि बार में आने के बाद ऐसी महिला अधिवक्ताओं के लिए कुछ करूँ और कोर्ट में ही एक कमरे में कहीं क्रच बनाने की पहल करूंगी क्योंकि क्रच एक ऐसी जगह है जहां पर बच्चों को घर जैसा प्यार और माहौल मिलता है. क्रच मे छोटे बच्चों की देखभाल हो जाती है. महिला अधिवक्ता अपने बच्चों को क्रच में छोड़ पाएंगी जहां उनके बच्चों की घर जैसी ही केयर हो जाएगी.

उष्मा मिश्र कहती हैं कि महिलाओं को हमेशा समस्याओं का सामना करना पड़ता है इसके लिए उनकी समस्याओं का निस्तारण हो पाए मैं इसके लिए उनके साथ हूं. महिला अधिवक्ता को अगर किसी मुकदमें में भी कोई दिक्कत आएगी तो मैं कोर्ट में माननीय जजों से भी मिलकर उनसे उनकी समस्याओं के निस्तारण के लिए बात करूंगी. महिला अधिवक्ता खुद पर विश्वास रखें और जो कुछ भी आप चाहती हैं उसे हासिल करें. महिला अधिवक्ता घरेलू जिम्मेदारियों से भी बंधी होती है लेकिन इसके बावजूद भी इस पेशे में उनकी भागीदारी समाज में एक अग्रिम भूमिका के तौर पर भी होती है. जो महिलाएं अपने हक के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाती है कई बार उनको अधिकारों की जानकारी नहीं होती और ऐसी महिलाएं अनेक लाभों से वंचित रह जाती है. इसके लिए महिला अधिवक्ता सामाजिक दायित्वों का निर्वह्न करते हुए ऐसी व्यवस्था बनाती है जिससे उन्हें कानूनी, सामाजिक, आर्थिक अधिकारों की जानकारी हो सके.