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1857 की क्रांति: 90 साल पहले ही आजाद हो गया था प्रयागराज, फिर कैसे बना गुलाम, जानिए यहां

1857 की क्रांति: 90 साल पहले ही आजाद हो गया था प्रयागराज, फिर कैसे बना गुलाम, जानिए यहां
UP City News | Jun 07, 2021 11:29 AM IST

प्रयागराज: ब्रितानिया हुकूमत में जब-जब यह नाम लिया जाता था तो अंग्रेज कांप उठते थे. कौशाम्बी के महगांव निवासी क्रांतिकारी मौलाना लियाकत अली खान की नाम की अंग्रेजों में दहशत थी. वर्ष 1857 में क्रांतिकारियों की अगुवाई करते हुए मौलाना ने इलाहाबाद की सदर तहसील पर कब्जा किया. कई अंग्रेज मारे गए थे और आधे से ज्यादा भाग गए थे. पूरी रियासत पर कब्जा करने के बाद 7 जून 1857 से 17 जून 1857 तक करीब 11 दिनों तक मौलाना ने अपनी सरकार चलाई थी.

इविवि के मध्यकालीन व आधुनिक विभाग के इतिहास के प्रो.योगेश तिवारी ने बताया कि 1857 में जब हिंदुस्तानियों ने अंग्रेजो के खिलाफ बगावत का बिगुल बजाया और अवध में इसे जोर शोर से आगे बढ़ाया जा रहा था उस वक़्त बगावत की लपटे प्रयागराज और उसके आस पास के इलाकों में भी पहुंच चुकी थी. हालांकि प्रयागराज में बगावत की आवाज वहां के पंडों ने उठाई थी पर इलाहबाद के अवाम ने इस जंग में कवायद के लिए मौलवी लियाकत अली को चुना. ये जंग बहुत लम्बी तो नहीं चली और बागियों को हार का मुंह भी देखना पड़ा था पर उन्होंने जिस बहादुरी और शेर दिली के साथ जंग लड़ी उसे इतिहास कभी भूल नहीं पायेगा.

दोनों ओर से बनी रणनीति
मौलवी लियाकत अली, सरदार रामचंद्र समेत बनारस से पहुंच चुके अन्य क्रांतिकारियों के साथ पंचायत बुलाई गई और पंचायत में निर्णय लिया गया कि जनता और सैनिक 6 जून को एक साथ हमला बोलेंगे. अंग्रेजों को पता चल चुका था कि बनारस से भी आ रहे क्रांतिकारी भी किले पर हमला बोल सकते हैं, ऐसे में किले की सुरक्षा और कड़ी कर दी गई. बनारस से आनेवाले क्रांतिकारियों को रोकने के लिए देशी पलटन की दो टुकडिय़ां और दो तोपें दारागंज के करीब नाव के पुल पर तैनात कर दी गयी. यानी पानी में ही उन्हें दफन करने का प्लान तैयार था. जबकि किले की तोपों को बनारस से आनेवाली सड़क की ओर मोड़ दिया गया. इसके अलावा शहर की ओर अलोपीबाग में देशी सवारो की दो टुकडिय़ां तैनात हुई और किले में 65 तोपची, 400 सिख घुडसवार और पैदल सैनिक तैनात कर दिए गये.

बलिदानियों की याद में बने डिजीटल गैलरी
उन्होंने बताया कि क्रांतिकारियों को इतिहास में कोई स्थान नहीं मिल पाया है. इसलिए मैं संग्रहालय समिति का सदस्य होने के नाते ये मांग करता हूं कि पार्क में 1857 के क्रांतिकारियों की स्मृति में डिजिटल गैलरी स्थापित कराई जाए.

एक साथ लड़े थे हिंदू मुस्लिम
भारत भाग्य विधाता संयोजक व पत्रकार वीरेंद्र पाठक ने बताया कि अंग्रेजों ​के खिलाफ हिंदू मुस्लिम एक साथ लड़े थे. इससे शहर को पहली आजादी मिली थी.

आज होंगे कार्यक्रम
भारत भाग्य विधाता की ओर से 7 जून से 16 तक प्रयागराज में पहली आजादी का उत्सव आनलाइन मनाया जाएगा. एतिहासिक नीम के पेड़ के नीचे शहीदों को नमन किया जाएगा.