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क्या कुंडा के 'राजा' भी आ रहे हैं सपा के साथ, समझें मुलायम सिंह राजा भइया की मुलाकात के सियासी मायने

क्या कुंडा के 'राजा' भी आ रहे हैं सपा के साथ, समझें मुलायम सिंह राजा भइया की मुलाकात के सियासी मायने
UP City News | Nov 25, 2021 03:31 PM IST

दीपक गंभीर
प्रयागराज. वैसे तो यूपी की सियासत में वर्चस्व वाले नेताओं की फेहरिस्त बहुत लम्बी है लेकिन एक नाम हमेशा चर्चा का विषय बना रहा है ये नाम है जनसत्ता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष व कुंडा विधायक रघुराज प्रताप सिंह राजाभैया का है. हमेशा निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ने वाले राजा भैया ने कैबिनेट मंत्री तक का सफर तय किया हुआ है. राजा भैया, प्रतापगढ़ के कुंडा से सात बार निर्दलीय चुनाव जीतकर रिकॉर्ड बना चुके हैं.

राजा भैया के पिता राजा उदय प्रताप सिंह राजनीति से हमेशा दूर ही रहे, लेकिन वह राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के कार्यकर्ता के रूप में काम करते रहे. कुंडा में राजा भैया के परिवार का लगभग एकतरफा वर्चस्व रहा है. 2012 के चुनाव में राजा भैया ने 88 हजार से भी ज्यादा मतों के अंतर से जीत हासिल की थी, जो अपने आप में बड़ी जीत थी. बीएसपी की सरकार में राजा भैया को जेल जाना पड़ा था, लेकिन मुलायम सिंह के सीएम बनते ही वह जेल से बाहर आ गए थे और उन्हें कैबिनेट में भी जगह दी गई थी.

हाल ही में राजा भैया ने अयोध्या पहुंकर चुनावी बिगुल फूंका था. यहां उनसे गठबंधन को लेकर पूछा गया था तो उन्होंने कहा था कि समान विचारधारा वाली कोई भी पार्टी साथ आ सकती है. हालांकि उत्तर प्रदेश की सियासत में राजा भैया की निर्णायक भूमिका हमेशा से ही रहती आई है. ऐसे में सियासी गलियारों में ये भी खबर तेजी से उड़ती आई कि कुंडा का बाहुबली किसी भी वक़्त भाजपा के खेमे का रुख कर सकता है लेकिन आज सपा संस्थापक नेता जी मुलायम सिंह से उनके आवास पर राजा भैया की हुई मुलाकात ने सियासी गलियारों में नई हवा उड़ा दी है कि क्या अब राजा भैया का भी सपा प्रेम जाग चुका है.

वहीं राजा भैया ने मीडिया से साफ कहा कि की वो नेता जी को सिर्फ उनके जन्मदिन की बधाई देने पहुंचे थे. सूत्रों का ये भी कहना है कि कल रात ही अखिलेश यादव और राजा भैया की फ़ोन पर कुछ मुद्दों पर बात तक हुई है. जिसके बाद राजा भैया लखनऊ पहुंचे. हालांकि राजा भैया नेता जी से हुई मुलाकात को सिर्फ़ एक शिष्टाचार के तौर पर बता रहे है. कुंडा के विधायक रघुराज प्रताप सिंह से बसपा सुप्रीमो से हमेशा तल्ख रिश्ते रहे, किंतु राजा ने यूपी में हर दल के साथ अच्छा सामंजस बनाकर रखा है. प्रत्येक दल के साथ उनका हर राजनीतिक सौदा फायदेमंद साबित हुआ है. यूपी में कांग्रेस के सफाए के बाद कभी वो भाजपा सरकारों में तो कभी सपा सरकारों में कैबिनेट मिनिस्टर रहे.

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फिलहाल जहां राजा भैया ने 100 सीटों पर चुनाव लड़ने का एलान किया है तो वहीं छोटे दलों के सहारे सूबे की सत्ता पर एक बार फिर शिखर तक पहुंचने की चाह रखने वाले सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की जोड़-तोड़ की राजनीति ने हो सकता है कि राजा भैया को भी सोचने पर मजबूर कर दिया हो. क्योंकि पिछले तीन विधानसभा चुनावों से सपा ने कुंडा में राजा के खिलाफ कोई प्रत्याशी कभी भी मैदान में नहीं उतारा है. वहीं खुद राजा इस बात को भी कह चुके हैं जहां से भी योगी आदित्यनाथ चुनाव लड़ेंगे वहां उनके खिलाफ उनकी पार्टी कोई भी उम्मीदवार नहीं खड़ा करेगी, लेकिन कयासों की राजनीति में कितना बल होगा ये तो 2022 में होने वाले चुनावों में ही पता चलेगा.