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आदेश का पालन न कराने पर राज्य विधि परामर्शी को नोटिस, सुनवाई दो अगस्त को

आदेश का पालन न कराने पर राज्य विधि परामर्शी को नोटिस, सुनवाई दो अगस्त को
UP City News | Jul 29, 2021 06:12 PM IST

प्रयागराज. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रमुख सचिव न्याय एवं राज्य विधि परामर्शी की कार्रवाई पर असंतोष व्यक्त किया है और उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया है. कोर्ट ने पूछा है कि आदेश का पालन करने में क्यों विफल रहे. कोर्ट ने विधि परामर्शी को दो अगस्त को तलब भी किया है. कोर्ट ने कहा कि सरकारी वकील सुनवाई के दौरान कोर्ट में मौजूद थे, फिर भी आदेश की सूचना अधिकारियों को नहीं दी. उन्हें तलब करना पड़ा। कोर्ट ने विधि परामर्शी को इस लापरवाही की जांच कर कार्रवाई करने का निर्देश दिया था.

जिम्मेदारी से कार्य करे शासकीय अधिवक्ता कार्यालय

हाईकोर्ट ने शासकीय अधिवक्ता कार्यालय की कार्यप्रणाली पर भी तल्ख टिप्पणी की. कहा कि कार्यालय को जवाबदेही से काम करना चाहिए न कि खुशामदी पर. ऐसे रवैये की अनुमति नहीं दी जा सकती. कोर्ट ने कहा कि वह अधिकारियों को तलब नहीं करना चाहते लेकिन पत्रावली से साफ है अधिकारी आदेश का सम्मान नहीं कर रहे तो उन्हें बुलाना पड़ा. यह साफ नहीं हो रहा कि अधिकारी अपनी टांग क्यों बीच में ला रहे हैं.

हंसना व 11 अन्य की याचिका पर सुनवाई
यह आदेश न्यायमूर्ति अजय भनोट ने शाहजहांपुर तबलीगी जमात से जुड़े विदेशी नागरिकों हसे उर्फ हंसना व 11 अन्य की याचिका पर दिया है। याचिका पर अधिवक्ता अदील अहमद खान ने बहस की. कोर्ट ने विधि परामर्शी से कहा था कि पता करें कि ऐसा जानबूझकर किया गया या लापरवाही में हो गया. कोर्ट ने कहा था कि सरकारी वकील की ओर से इस घोर लापरवाही के कारण उच्च पदस्थ पुलिस अधिकारियों को उनकी बिना किसी गलती के तलब करना पड़ा. पुलिस अधिकारियों की ओर से दाखिल हलफनामे में यह उल्लेख किया गया कि समय पर हलफनामा दाखिल करने में विफलता का कारण सरकारी वकील से सूचना न मिलना है.

मामले की सुनवाई में आती है बाधा
कोर्ट ने कहा कि इस तरह के आचरण से व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हनन होता है और मामले की सुनवाई में भी बाधा उत्पन्न होती है. अपर शासकीय अधिवक्ता विभव आनंद ने कोर्ट को भ्रमित किया. सही जानकारी नहीं दी जिसके कारण बिना अधिकारियों की गलती के तलब करना पड़ा. उनका कहना था कि वे अपर महाधिवक्ता विनोद कांत को सहयोग कर रहे थे जिसे अपर महाधिवक्ता ने भी स्वीकार किया. आदेश को गंभीरता से न लेने पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. अब सुनवाई दो अगस्त को होगी।