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इलाहाबाद हाईकोर्ट: शासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षक व कर्मचारी पेंशन पाने के हकदार

इलाहाबाद हाईकोर्ट: शासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षक व कर्मचारी पेंशन पाने के हकदार
UP City News | Sep 13, 2021 11:38 PM IST

प्रयागराज. प्रदेश के सभी शासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों और कर्मचारियों को पेंशन मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. कोर्ट ने कहा है कि शासकीय सहायता प्राप्त निजी शिक्षण संस्थाओं में कार्यरत वह सभी शिक्षक व कर्मचारी पेंशन पाने के हकदार हैं, जो 1964 की पेंशन नियमावली के दायरे में आते हैं. कोर्ट ने कहा कि पेंशन का लाभ सिर्फ उच्चतर प्राथमिक विद्यालयों के अध्यापकों तक सीमित रखना सही नहीं है. कोर्ट ने इंटरमीडिएट बोर्ड द्वारा मान्यता प्राप्त शासकीय सहायता प्राप्त निजी विद्यालय के अध्यापकों को उनका प्रबंधकीय अंशदान ब्याज सहित जमा करने के लिए दो माह का समय दिया है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकार को याचिका दायर करने वालों को पेंशन का लाभ देने का आदेश दिया है. हाईकोर्ट सोमवार को लाल साहब सिंह व अन्य की याचिका पर सुनवाई कर रही थी. यह आदेश जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्र ने दिया. याचीगण की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता रामकृष्ण यादव ने कहा कि याचीगण धर्मराजजी देवी गंगा प्रसाद सिंह उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जौनपुर में सहायक अध्यापक है. शुरू में यह उच्चतर प्राथमिक विद्यालय था. 1986 में इसे हाई स्कूल की मान्यता मिल गई। अब याचीगण रिटायर हो चुके हैं. रिटायरमेंट के बाद उन्होंने पांच फरवरी 2017 को जारी शासनादेश के तहत पेंशन के लिए प्रबंधकीय अंशदान ब्याज सहित जमा करने की पेशकश की. उसे यह कहकर खारिज कर दिया गया कि उक्त शासनादेश का लाभ सिर्फ उच्चतर प्राथमिक विद्यालय के अध्यापकों को ही मिलेगा.

अधिवक्ता ने हाईकोर्ट द्वारा बुद्धिराम के मामले में दिए गए निर्णय का हवाला दिया और कहा कि इस केस में हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पेंशन योजना का लाभ पाने के हकदार वह सभी लोग हैं, जो 1964 की पेंशन नियमावली के दायरे में आते हैं।सरकारी अधिवक्ता का कहना था कि 22 मई 2006 के शासनादेश के जरिए अंशदान जमा करने के लिए कट ऑफ डेट जारी की गई थी. मगर याची ने नियत तिथि के भीतर अपना अंशदान जमा नहीं किया. याचीगण का कहना था कि 2006 का शासनादेश उनको कभी उपलब्ध ही नहीं कराया गया. हमें योजना की जानकारी 2017 में जारी शासनादेश के आधार पर हुई. इसके बाद कट ऑफ डेट के भीतर ही अपना अंशदान जमा करने की पेशकश की गई थी, जिसे अस्वीकार कर दिया गया.
सिर्फ उच्च प्राथमिक विद्यालयों तक सीमित नहीं है शासनादेश

हाईकोर्ट ने 2006 के शासनादेश द्वारा जारी कटऑफ डेट को बुद्धि राम केस में रद कर दिया था. 2017 का शासनादेश हाईकोर्ट द्वारा बुद्धि राम केस में दिए निर्णय के अनुपालन में जारी किया गया है. कोर्ट ने कहा कि इस शासनादेश को सिर्फ उच्च प्राथमिक विद्यालयों तक सीमित नहीं रखा जा सकता है. यह उन सभी शिक्षण संस्थाओं के ऊ पर लागू होता है जो 1964 की पेंशन नियमावली के दायरे में आते हैं. सरकार से अपेक्षा की जाती है कि वह शासनादेश का लाभ ऐसे सभी शैक्षणिक संस्थानों के कर्मचारियों को समान रूप से देगीय कोर्ट ने याचीगण को पेंशन भुगतान न करने का 2 अगस्त 2017 का आदेश रद्द कर दिया है. इसके साथ ही कोर्ट ने 2 माह के भीतर याचीगण का ब्याज सहित अंशदान जमा करवा कर पेंशन भुगतान का आदेश दिया है.