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हाईकोर्ट चुनाव में 28 पदों के लिए 199 उम्मीदवार हैं मैदान में, अध्यक्ष पद के प्रत्याशी आईके चतुर्वेदी की UP CITY NEWS से खास बातचीत

हाईकोर्ट चुनाव में 28 पदों के लिए 199 उम्मीदवार हैं मैदान में, अध्यक्ष पद के प्रत्याशी आईके चतुर्वेदी की UP CITY NEWS से खास बातचीत
UP City News | Nov 29, 2021 04:16 PM IST

दीपक गंभीर
प्रयागराज. इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन चुनाव को लेकर गहमा गहमी बढ़ गई है. एक दिसंबर को होने वाले एशिया की सबसे बड़ी अदालत यानि इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन कार्यकारिणी चुनाव की तैयारी पूरी कर ली गई है. 17 मार्च 1866 में ब्रिटिश राज में इलाहाबाद हाईकोर्ट की स्थापना हुई थी. एल्डर कमेटी की निगरानी में बार एसोसिएशन का चुनाव 1 दिसंबर को होना है. गाईडलाइंस के मुताबिक ही चुनाव कराया जाएगा. सुरक्षा व्यवस्था के बीच शांति पूर्ण चुनाव संपन्न कराने की योजना का खाका तैयार है. एक-एक वोट के लिए चुनाव में खड़े उम्मीदवारों को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है. चुनाव में प्रत्याशियों ने अपनी पूरी ताकत झोंकी हुई है. जहां उम्मीदवारों का चुनाव प्रचार तेजी से चल रहा है तो वहीं जनसंपर्क के साथ ही सोशल मीडिया भी प्रचार का मुख्य साधन बना हुआ है. इस बार चुनाव में प्रचार सामग्री, हैंडबिल, पम्फलेट, पोस्टर, बैनर आदि से प्रचार पर रोक लगी हुई है. बार एसोसिएशन के कुल 28 पदों के लिए इस बार 199 प्रत्याशी मैदान में है.

मतदाताओं से संपर्क करने के अलावा उनको आकर्षित करने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है. इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की कार्यकारिणी को मजबूत अध्यक्ष मिले इसके लिए मैदान में अध्यक्ष पद के लिए सात प्रत्याशी मैदान में खड़े हुए है. अध्यक्ष पद पर अशोक कुमार सिंह, अतुल कुमार पांडेय, अविनाश चंद्र तिवारी, बीडी पांडेय, इंद्र कुमार चतुर्वेदी, राधाकांत ओझा व राम अवतार वर्मा है.

UPCITYNEWS से खास बातचीत करते हुए अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ रहे इलाहाबाद हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता इंद्र कुमार चतुर्वेदी (आईके चतुर्वेदी) ने अपनी प्राथमिकता के बारे में बताया. आपको बता दें कि आईके चतुर्वेदी पहले भी एक बार 2018 में इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष पद पर काबिज रह चुके है. इसके साथ-साथ इन्होंने बार एसोसिएशन की कार्यकारिणी में कई बार महत्त्वपूर्ण पदों पर अपनी सहभागिता निभाई है. इसके अलावा इन्होंने यूपी बार कौंसिल में भी उपाध्यक्ष के पद पर रहकर वकीलों के कल्याण के लिए अपना योगदान दिया है. एक बार अब फिर अध्यक्ष पद के लिए चुनाव में खड़े हुए है. आईके चतुर्वेदी ने हर चुनाव में पहली बार में ही जीत हासिल की और उनको दृढ़ विश्वास है कि वो एक बार फिर अपने भरोसे से अध्यक्ष पद पर जीतेंगे.

उन्होंने ने कहा कि बार की गरिमा को बढ़ाने के लिए हर संभव कोशिश होगी. बेंच से बेहतर समन्वय और मुकदमों की लिस्टिंग आदि में आ रही समस्याओं का हल निकाला जाएगा. वकीलों को मुसीबत के समय किसी भी आर्थिक सहायता बिना किसी भेदभाव के उपलब्ध कराई जाएगी. आईके चतुर्वेदी ने कहा कि कोर्ट की वर्किंग में जो दिक्कतें आ रही है और बेल एप्लीकेशन और मुकदमों की लिस्टिंग में जो देरी हो रही है उसके लिए मेरा प्रयास रहेगा कि अगर मैं फिर से जीतता हूँ तो इन सब दिक्कतों में सुधार लाने की कोशिश करूंगा. कोर्ट के कामकाज में किसी तरह की रुकावटें न हो इसका भी हल निकाला जाएगा. अधिवक्ताओं को कई बार कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है इसके लिए मेरी कोशिश रहेगी कि इन सब का निस्तारण हो. कई बार बिना प्रॉपर सुनवाई के कई मामलों में डिस्पोजल हो जाता है जिससे मुवक्किल भी परेशान हो जाता है. इसके लिए भी कोई रास्ता निकाला जाएगा क्योंकि इससे मुवक्किल कई बार ये भी सोचता है कि हमारा वकील सही नहीं है और उसको दूसरा वकील करना पड़ता है. कोर्ट की वर्किंग किस तरह प्रभावित हो रही है इसके लिए भी चीफ जस्टिस से मिलकर उनसे अनुरोध किया जाएगा कि कोर्ट के कामकाज में सुधार होना ज़रूरी है चाहे इसके लिए मुझे संघर्ष क्यों ना करना पड़े.

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इंद्र कुमार चतुर्वेदी के मुताबिक कई बार ये भी देखा गया है कि अगर किसी वकील का मुकदमा कल लगा है और उसी दिन उसको मैसेज मिलता है तो किसी भी वकील के लिए ये दिक्कत है कि वो कैसे इतनी जल्दी अपनी फ़ाइल को लेकर कोर्ट में पहुंचेगा। इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम में भी सुधार होना जरूरी है ताकि सही समय पर अधिवक्ताओं को मैसेज मिले। कोरोना के बाद से अधिवक्ताओं को ज्यादा दिक्कतें आ रही है। इसमें सुधार होना बहुत ज़रूरी है. बार का काम है कि कैसे अधिवक्ताओं के हितों की रक्षा हो. बार को अग्रिम भूमिका निभानी पड़ेगी. बार एसोसिएशन कार्यकारिणी में कई बार रहकर अपने अनुभवों के आधार पर आईके चतुर्वेदी कहते है कि कोरोना के कारण कोर्ट के सुचारू कामकाज पर भी काफी प्रभाव पड़ा है. कोर्ट पर भी मुकमदों का काफ़ी ज्यादा बोझ है. मुकदमों के निस्तारण में तेजी आए ये भी सबसे अहम मुद्दा है. हाईकोर्ट में लंबित मुकदमों की संख्या भी इन दिनों ज्यादा है. मुकदमों को उन कोर्ट में ट्रांसफर करने में भी दिक्कतें हो रही है जहां की कोर्ट खाली पड़ी है.

आगरा में बेंच बनाने के मुद्दे को लेकर आईके चतुर्वेदी ने साफ तौर से कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट का विभाजन नहीं होने दिया जाएगा क्योंकि जैसे सुप्रीम कोर्ट एक जगह है वैसे ही इलाहाबाद हाईकोर्ट को एक जगह होना चाहिए. हाईकोर्ट का विभाजन यहाँ के अधिवक्ताओं को बिल्कुल मंजूर नहीं और इसके लिए हम आंदोलन करते रहे है. नई बेंच बनने देने का कोई सवाल ही नहीं पैदा होता. बार एसोसिएशन हमेशा इसका विरोध करता रहा है और नई कार्यकारिणी बनने पर भी इसका विरोध किया जाएगा. नई कार्यकारिणी बनने पर कोर्ट के अंदर का कामकाज सुचारू रूप से चले ये भी मेरी प्राथमिकता में शामिल है. अधिवक्ताओं के लिए लाभकारी योजनाओं के बारे में लाई जाएंगी. जूनियर अधिवक्ताओं के लिए वेलफेयर स्कीम को लागू करने पर भी विचार किया जाएगा. अधिवक्ता कल्याण निधि पर भी उन्होंने कहा कि 2012 में अखिलेश यादव की सरकार जब थी तब करीब 40 करोड़ की राशि अधिवक्ताओं के लिए आवंटित की गई थी. अखिलेश सरकार ने ये भी घोषणा की थी कि किसी भी दुर्घटना होने पर अधिवक्ता को तत्काल 5 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी जाएगी जो कि हमारे लिए सबसे बड़ा अचीवमेंट था. इस सरकार में भी उसी को जारी रखा गया है.