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गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद चर्चा में आईं अनुप्रिया पटेल, जानिए उनका राजनीतिक सफर

गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद चर्चा में आईं अनुप्रिया पटेल, जानिए उनका राजनीतिक सफर
UP City News | Jun 11, 2021 07:05 PM IST

लखनऊ. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से नई दिल्ली में मुलाकात के बाद अपना दल (एस) की अध्यक्ष और मिर्जापुर से सांसद अनुप्रिया पटेल एकदम में चर्चा में आई गई हैं. अब तक वह और उनका अपना दल एनडीए में हाशिये पर चल रहा था. अमित शाह से मुलाकात के बाद माना जा रहा है कि अनुप्रिया को केंद्रीय मंत्रिमंडल में जिम्मेदारी मिल सकती हैं. अनुप्रिया पर यूपी विधान सभा चुनाव में एनडीए के लिए पूर्वांचल में कुर्मी वोट गोलबंद करने की भी दबाव रहेगा।

पिता से मिली राजनीतिक विरासत
अनुप्रिया पटेल सोने लाल पटेल की बेटी हैं, जिन्होंने उत्तर प्रदेश में अपना दल राजनीतिक पार्टी की स्थापना की थी. सोनेलाल पटेल यूपी में कुर्मी समाज के प्रभावशाली नेता माने जाते थे. सोनेलाल पटेल कांसीराम के समय से ही बसपा में सक्रिय रहे और बाद में उन्होंने अपना दल का गठन किया. लेकिन वे कभी कोई चुनाव जीत नहीं पाए. उनकी छवि पिछड़ों-दलितों के लिए संघर्ष करने वाले नेता की रही. 2009 में एक दुर्घटना में उनका निधन हो गया. उनकी राजनीतिक विरासत अनुप्रिया को मिली है.

मां-बहन से टकराव
अनुप्रिया पटेल का पिता की राजनीतिक विरासत को लेकर मां कृष्णा पटेल से विवाद चला. मां और बहन पल्लवी पटेल ने उन्हें अवसरवादी कहा. अनुप्रिया के कुर्मी समाज की सर्वमान्य नेता बनने में बड़ी बाधा उनका अपना परिवार ही है. उनकी मां कृष्णा पटेल और बहन पल्लवी पटेल आजकल सपा के संपर्क में हैं.

जानती है गठबंधन की राजनीति
सन् 2014 के लोकसभा चुनाव से पूर्व अनुप्रिया ने राजग से नाता जोड़ा था. लेकिन गठबंधन की राजनीति उनके लिए अलग नहीं थी. उन्होंने 2012 के उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में पीस पार्टी ऑफ इंडिया और बुंदेलखंड कांग्रेस के साथ गठबंधन किया था.

पूर्वांचल में कई सीटों पर प्रभाव
मिजार्पुर कुर्मी बाहुल्य संसदीय क्षेत्र है. आसपास के संसदीय क्षेत्रों (फूलपुर, इलाहाबाद, प्रतापगढ़, वाराणसी, जौनपुर, भदोही) में भी अनुप्रिया के स्वजातीय मतों की संख्या अच्छी है. डुमरियागंज, गोंडा, बस्ती, कन्नौज में भी कुर्मी भारी संख्या में मौजूद हैं। इन मतों को एनडीए के लिए सहेजने की बड़ी जिम्मेदारी अनुप्रिया के कंधे पर है।

2012 में रोहनियां सीट से बनीं विधायक
उन्होंने 2012 में उत्तर प्रदेश का विधानसभा चुनाव रोहनियां सीट से जीता था. 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले अनुप्रिया पटेल ने अपना राजनीतिक ट्रैक बदला और एनडीए में शामिल हो गईं. इसके लिए उनकी काफी आलोचना हुई. 2014 में वे मिर्ज़ापुर से लोकसभा चुनाव जीतकर दिल्ली पहुंची. 2016 में सबसे कम उम्र की केंद्रीय मंत्री बनीं. राज्यमंत्री के तौर पर उन्हें स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय मिला था.

दिल्ली और कानपुर में हुई पढ़ाई
अनुप्रिया 28 अप्रैल 1981 को कानपुर में अपना दल संस्थापक सोनेलाल पटेल के घर जन्मीं. 2001 में दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज से स्नातक की डिग्री ली, 2010 में कानपुर यूनिवर्सिटी से एमबीए के बाद राजनीति में आईं. उन्होंने नोएडा की एमिटी यूनिवर्सिटी से साइकोलॉजी से एमए भी किया है.

सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में पहचान
अनुप्रिया पटेल की पहचान सामाजिक न्याय के लिए संघर्ष करने वाली नेता की रही है. 2013 में यूपी लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं में त्रिस्तरीय आरक्षण लागू करने की मांग को लेकर उन्होंने काफी संघर्ष किया और इस दौरान उन्हें तीन बार गिरफ्तार भी किया गया. उन पर दर्ज किए गए कई मुकदमे अब भी चल रहे हैं. अनुप्रिया पटेल की शिकायत रही है कि सरकार किसी भी पार्टी की हो, पिछड़ों को उनकी आबादी के अनुपात में राजकाज में हिस्सा नहीं मिलता है. जातिवार जनगणना हो या न्यायिक नियुक्तियों में आरक्षण या ओबीसी कमीशन को संवैधानिक दर्जा देने की मांग, वे अपनी आवाज संसद और बाहर भी उठाती रही हैं.