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यूपी पुलिस में क्या है बार्डर स्कीम, इसे लेकर आखिर क्यों सिपाहियों का ट्विटर पर छलका दर्द

यूपी पुलिस में क्या है बार्डर स्कीम, इसे लेकर आखिर क्यों सिपाहियों का ट्विटर पर छलका दर्द
UP City News | Jul 23, 2021 10:40 AM IST

लखनऊ . उत्तर प्रदेश पुलिस के सिपाहियों ने गुरुवार को अपनी मांगों को लेकर ट्विटर पर मोर्चा खोला. सिपाहियों के लिए 2800 ग्रेड पे, ड्यूटी के फिक्स घंटे और वीकली ऑफ जैसी मांगों को लेकर पुलिसकर्मियों ने ट्वीट किए. सिपाहियों की एक और मांग बॉर्डर स्कीम हटाने की है. इसके तहत किसी कॉन्स्टेबल, हेड कॉन्स्टेबल, दरोगा या इंस्पेक्टर को अपने गृह जनपद और उसकी सीमा से सटे किसी जिले में तैनाती नहीं मिल सकती है.

मायावती ने लागू की थी बार्डर स्कीम
बार्डर स्कीम के तहत लखनऊ के रहने वाले किसी नॉन गजेटेड पुलिसकर्मी को लखनऊ के अलावा उसकी सीमा से सटे जिलों जैसे- उन्नाव, बाराबंकी, सीतापुर, हरदोई में भी तैनाती नहीं मिल सकते. इन जिलों के बाद आने वाले दूसरे जिलों जैसे गोंडा, लखीमपुर-खीरी या कानपुर आदि में ही उसे तैनाती दी जा सकती है. तैनाती वाले जिले और गृह जनपद के बीच एक जिला होना चाहिए.

शुरुआती ग्रेड पे 2800 हो
सिपाहियों की मांग है कि उनका शुरुआती ग्रेड पे 2000 से बढ़ाकर 2800 किया जाए. मौजूदा व्यवस्था के अनुसार करीब 16 साल की सर्विस पूरी करने के बाद सिपाहियों को 2800 ग्रेड पे मिल पाता है.

सिपाही व प्राइमरी टीचर के वेतन में भारी अंतर
एक सिपाही ने बताया कि वे अपनी मूलभूत समस्याओं को लेकर धरना/विरोध प्रदर्शन नहीं कर सकते. मगर अभिभावक जैसी सरकार और सीनियर अफसरों से मांग ही सकते हैं, जो आमतौर पर सभी सरकारी कर्मचारियों को मिलता है. किसी समय प्राइमरी स्कूल के टीचर और एक सिपाही के वेतन में महज एक रुपये का फर्क था जो आज हजारों में है.

अफसरों को मिली है छूट
सिपाहियों के अनुसार घर से दो सौ किमी दूर पोस्टिंग होती है. तर्क यह दिया जाता है कि हम घर के नजदीक रहकर कानून-व्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं.राजस्थान में सिपाहियों को गृह जनपद में भी तैनात किया जाता है, लेकिन इसका कोई बुरा असर नहीं दिखा. कानून-व्यवस्था का तर्क उन ताकतवर अधिकारियों पर क्यों नहीं लागू होता, जिन्हें अपने गृह जनपद और पड़ोसी जिलों में बतौर एसपी तैनात होने की छूट है.