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यूपी: गाय की देशी नस्ल शाहीवाल की तरफ बढ़ा गौपालकों का रुझान, जानें इस नस्ल की गाय की खूबियां

यूपी: गाय की देशी नस्ल शाहीवाल की तरफ बढ़ा गौपालकों का रुझान, जानें इस नस्ल की गाय की खूबियां
UP City News | Sep 14, 2021 07:26 PM IST

लखनऊ . यूपी में देशी गायों की नस्लों के रखरखाव और उनके पालन-पोषण के प्रति पशुपालकों का रुझान लगातार बढ़ रहा है. गौ पालक फिर से विदेशी नस्लों को छोड़कर गाय की देशी नस्ल शाहीवाल को पसंद कर रहे हैं. अधिक पौष्टिक दूध मिलने के कारण दूध के उत्पादन में भी लगातार वृद्धि हो रही है. शाहीवाल नस्ल दो से तीन हजार लीटर तक सालाना दूध देती है. जिसकी वजह से दुग्ध व्यवसायी इन्हें काफी पसंद करते हैं. इतना ही नहीं यह गाय एक बार मां बनने पर करीब 10 महीने तक दूध देती है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की देशी गायों के प्रति रुचि और उनके संरक्षण व संवर्धन की पहल से लोगों में गायों के प्रति लगाव बढ़ा है.

दुग्ध संघ निभा रहा अह्म भूमिका

बात मंडल स्तर की करें तो दुग्ध संघ लखनऊ इसमें बड़ी भूमिका निभा रहा है. उसने किसानों को दुग्ध समितियों से जोड़कर दूध विक्र य बाजार में उपलब्ध कराए हैं. करीब तीन हजार से अधिक देशी गायों से प्रतिदिन 4500 लीटर औसत दूध का उत्पादन किया जा रहा है. इनमें शाहीवाल नस्ल की गायों की संख्या 70 प्रतिशत से अधिक है. इतना ही नहीं सरकार की ओर से किसानों को प्रोत्साहन स्वरूप पुरस्कार भी दिये जा रहे हैं. अकेले लखनऊ म्ंडल में दो साल में 31 किसानों को नन्दबाबा पुरस्कार से पुरस्कृत किया गया है. दुग्ध संघ लखनऊ के मंडल स्तर पर हरदोई, सीतापुर, लखीमपुर, उन्नाव, रायबरेली और लखनऊ में देशी गाय का पालन-पोषण करने वाले किसानों में इजाफा हुआ है।

नन्द बाबा पुरस्कार से नवाज रही सरकार
दो सालों में देशी गाय के सर्वाधिक दूध देने वाले उत्पादक सदस्यों को नन्दबाबा पुरस्कार योजना का लाभ दिलाया है. वर्ष 2018-19 में छह जनपद में छह किसानों को जनपद स्तरीय पुरस्कार और सात किसानों को विकास खंड स्तरीय पुरस्कार दिये हैं। जबकि वर्ष 2019-20 के 06 जनपदों में छह किसानों को और विकास खंड स्तर पर 12 लाभाथियों को पुरस्कृत करने का कार्य चल रहा है। नन्दबाबा पुरस्कार योजना से देशी गाय के सर्वाधिक दूध देने वाले उत्पादक सदस्य को जिला स्तर पर 21 000 रुपये, विकास खंड स्तर पर प्रथम आने पर 5100 रुपये व पीतल धातु की नन्द बाबा एवं गाय की प्रतिमा प्रदान करती है।

समिति कल्याण कोष बना संजीवनी

राज्य सरकार की मंशा के अनुसार दुग्ध संघ लखनऊ स्तर पर समिति कल्याण कोष का गठन किया गया है. दुग्ध उत्पादक सदस्यों को वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है. वर्ष 2019 से आज तक इस कोष से 15 लाभार्थियों को लाभ दिया गया है. इस योजना से गाय पालकों की आकस्मिक दुर्घटना मृत्यु होने की दशा में 35000 रुपये वित्तीय सहायता दी जा रही है. स्थायी अपंगता की दशा में 17500 रुपये, आंशिक अपंगता की दशा में 15000 रुपये, सामान्य मृत्यु पर 7500 रुपये, हाथ-पैर टूटने पर उपचार के लिए 7000 रुपये, कैंसर आदि गंभीर बीमारी पर 30000 रुपये, रीढ़ की हड्डी टूटने पर 15000 रुपये, दुर्घटना में उपचार के लिए 5000 रुपये और किसी प्रकार का आपरेशन कराये जाने पर 5000 रुपये की वित्तीय सहायता दी जा रही है. इतना ही नहीं आकस्मिक दुर्घटना की दशा में यदि सदस्य कोमा की स्थिति में है तो 20000 रुपये और यदि मृत्यु हो जाती है तो अतिरिक्त 15000 रुपये दिये जा रहे हैं. इस प्रकार कुल 35000 रुपये की सहायता धनराशि दुग्ध संघ द्वारा दुग्ध समिति के दुग्ध उत्पादक सदस्य को भुगतान किया जाता है.