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मायावती ने निजी क्षेत्र में आरक्षण लागू करने की मांग की, बोलीं- देश में नहीं हो रहा संविधान का पालन

मायावती ने निजी क्षेत्र में आरक्षण लागू करने की मांग की, बोलीं- देश में नहीं हो रहा संविधान का पालन
UP City News | Nov 26, 2021 02:17 PM IST

लखनऊ. संविधान मौके पर लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस में बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने शुक्रवार को केंद्र और राज्य सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि देश में संविधान का पालन नहीं हो रहा है. मायावती ने कहा कि ऐसी सरकारों को संविधान दिवस मनाने का कोई अधिकार नहीं है, जो संविधान का पालन न कर रहा हो. बीएसपी सुप्रीमो ने कहा कि दलित और आदिवासी समाज आज भी वंचित है.

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बीएसपी चीफ ने आगे कहा कि संविधान दिवस के मौके पर आज किसान आंदोलन का भी एक वर्ष पूरा हो गया है. केन्द्र सरकार ने तीन कृषि कानूनों को तो वापस लिया है, जो उचित है लेकिन केन्द्र सरकार को अन्य मांगों को भी मान लेनी चाहिए. उन्होंने कहा कि आज मेरा यही कहना है कि केन्द्र और सभी राज्य सरकारें इस बात की समीक्षा करें कि वे संविधान का सही से पालन कर रही है. मायावती ने कहा कि उनकी पार्टी का यह मानना है कि ठीक से पालन नहीं किया जा रहा है. इसी वजह से उनका पार्टी इस कार्यक्रम में नहीं शामिल होने का फैसला किया गया है.

उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कहा कि एससी, एसटी तथा ओबीसी वर्ग का ज्यादातर विभागों में आरक्षण का कोटा अधूरा पड़ा है. एससी एसटी और ओबीसी वर्गों का सरकारी विभागों में अभी भी कोटा अधूरा पड़ा है. शोषित,वंचित एवं गरीब वर्गों के लोगों का आज भी अपने हक के लिए सड़कों पर धरना प्रदर्शन जारी है. प्राइवेट सेक्टर में भी इन वर्गों के लिए आरक्षण देने की कोई व्यवस्था नहीं की गई है. केंद्र और राज्य सरकारें प्राइवेट सेक्टरों में आरक्षण के मामले को लेकर तैयार नहीं है. क्या केंद्र और राज्य सरकारें संविधान का पालन कर रही है? ऐसी सरकारों को संविधान दिवस मनाने का कतई भी नैतिक अधिकार नहीं है. ऐसी सरकारों को आज इस मौके पर इन वर्गों के लोगों से माफी मांगना चाहिए. अपने देश में हर वर्ग के लोग रहते हैं विभिन्न धर्मों को मानने वाले लोग रहते हैं. इन वर्गों के तथा सभी धर्मों के लोगों के लिए जो कानून बने हैं उसका केंद्र और राज्य सरकार सही से पालन नहीं कर रही है. इनके लिए निजी क्षेत्र में आरक्षण की व्यवस्था नहीं की गई है. केन्द्र और राज्य सरकारे इस मामले में कानून बनाने के लिए तैयार नहीं है। ऐसी सरकारों को संविधान दिवस मनाने का अधिकार नहीं है.