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लखनऊ: हाइकोर्ट ने कहा अपनी पसंद का जीवन साथी चुनना व्यक्ति का मौलिक अधिकार

लखनऊ: हाइकोर्ट ने कहा अपनी पसंद का जीवन साथी चुनना व्यक्ति का मौलिक अधिकार
UP City News | Jan 13, 2021 09:16 PM IST

प्रयागराज. लव जेहाद के मामलों के बीच शादियों के रजिस्ट्रेशन को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने बड़ा फैसला दिया है. हाईकोर्ट ने शादियों से पहले नोटिस प्रकाशित होने और उस पर आपत्तियां मंगाने को गलत मानते हुए कहा है कि यह स्वतंत्रता और निजता के मौलिक अधिकारों का हनन है. हाई कोर्ट ने इसे विशेष विवाह अधिनियम की धारा 6 और 7 को भी गलत बताया है.

अदालत ने कहा किसी के दखल के बिना पसंद का जीवन साथी चुनना प्रत्येक व्यक्ति का मौलिक अधिकार है. इस संबंध में कोर्ट ने फैसला दिया है कि अगर शादी कर रहे लोग नहीं चाहते तो उनका ब्यौरा सार्वजनिक न किया जाए. साथ ही ऐसे लोगों के लिए सूचना प्रकाशित कर उस पर लोगों की आपत्तियां न ली जाए. हालांकि कोर्ट के इस फैसले में विवाह अधिकारी के सामने यह विकल्प रहेगा कि वह दोनों पक्षों की पहचान -उम्र व अन्य तथ्यों को पहले सत्यापित कर ले.

हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के जस्टिस विवेक चौधरी की अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा, विशेष विवाह अधिनियम की धारा 6 और 7 सदियों पुराना है, जो युवा पीढ़ी पर क्रूरता और अन्याय करने जैसा है. साफ़िया सुल्तान की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर कोर्ट ने यह आदेश दिया है.बता दें कि साफिया सुल्तान ने हिंदू धर्म अपनाकर अभिषेक कुमार पांडेय से शादी की है. सफिया सुल्तान ने अपना नाम बदलकर सिमरन कर लिया है.

आपको बता दें कि हाईकोर्ट ने सुनवाई पूरी होने के बाद 14 दिसंबर को फैसला सुरक्षित कर लिया था. हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच अपना फैसला सुनाते हुए याचिका को निस्तारित कर दिया है.