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लखनऊ: रिटायरमेंट से 7 दिन पहले हटाए गए एलडीए के चीफ इंजीनियर इंदु शेखर सिंह, पत्नी बेटी पर सरकारी जमीन कब्जाने का आरोप

लखनऊ: रिटायरमेंट से 7 दिन पहले हटाए  गए एलडीए के चीफ इंजीनियर इंदु शेखर सिंह, पत्नी बेटी पर सरकारी जमीन कब्जाने का आरोप
UP City News | Jun 23, 2022 08:07 PM IST

लखनऊ. राजधानी लखनऊ में एलडीए के चीफ इंजीनियर इंदु शेखर सिंह रिटायरमेंट से ठीक 7 दिन पहले हटा दिए गए हैं. उनकी बेटी और पत्नी पर सरकारी जमीन कब जाने का आरोप है. इस मामले में मुख्यमंत्री से एलडीए चीफ इंजीनियर की शिकायत की गई थी. जिसके बाद उन्हें रिटायरमेंट से 7 दिन पहले ही हटा दिया गया है. इस मामले में आगे की कार्रवाई चल रही है.

इंदु शेखर सिंह साल 2017 से लविप्रा में मुख्य अभियंता के पद पर तैनात थे. उनके खिलाफ एक शिकायत पर विजिलेंस की जांच हुई थी. जांच रिपोर्ट के बाद मंडलायुक्त रंजन कुमार ने बीती 29 मार्च को इंदु शेखर सिंह के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए अपर मुख्य सचिव गृह को पत्र लिख दिया था. इंदु शेखर सिंह के खिलाफ शारदा नगर योजना के अंतर्गत रक्षा खंड एल्डेको 2 प्राकृतिक झील के सुंदरीकरण और गोमती नगर विस्तार योजना के सेक्टर 7 में अवस्थापना सुविधाओं के निर्माण में आमंत्रित ई टेंडर को नियमित रूप से स्वीकृत करने की शिकायत हुई थी. मुख्य अभियंता के खिलाफ नरेश राजपूत में पहले पिछले 28 अक्टूबर को टेंडर में अनियमितता करने और अवैध तरीके से संपत्ति अर्जित किए जाने की शिकायत की थी.

इस पर लविप्रा उपाध्यक्ष अक्षय त्रिपाठी ने 18 नवंबर को सचिव व अपर सचिव की 2 सदस्य कमेटी से जांच कराई. जांच पूरी कर 28 जनवरी को आंखें शासन को भेजी गई थी. शिकायत में आरोप लगा था कि मुख्य अभियंता इंदु शेखर सिंह ने प्राकृतिक झील का बायोइंजीनियरिंग तकनीकी से सुंदरीकरण का 483 करोड रुपए का कार्य मेंसर्च शिवांग वेंचर्स को दे दिया. यह कार्य फर्जी अनुभव के आधार पर दिया गया मैं सर्च शिवांग वेंचर्स की सहयोगी फार्म शिवम लाइटहाउस को गोमती नगर विस्तार सेक्टर 7 में डीएमएआर ओमेक्स के आसपास 45 मीटर चौड़ी सड़कों पर 6 करोड रुपए का अवस्था पुनर्निर्माण का कार्य किया गया था.

आरोप था कि इस फर्म ने ई टेंडर में हिस्सा ही नहीं लिया था प्राकृतिक झील के सुंदरीकरण के लिए 20 जुलाई 2020 से 18 मार्च 2021 तक 5 बार निविदा आमंत्रित की गई. इसके बाद 13 दिसंबर 2021 को जब निविदा आमंत्रित की गई तो उसमें पांच कंपनियों ने हिस्सा लिया था. तीन फर्म तकनीकी में अयोग्य ठहरा दी गई. अंतिम में शिवांग वेंचर प्राइवेट लिमिटेड और पाल बिल्डर्स टेंडर की दौड़ में रह गई. दोनों ही फार्म नई सड़क व नाली निर्माण का अनुभव का प्रमाण पत्र लगाया जांच में पता चला कि दोनों ही फार्म के पास बायोइंजीनियरिंग से सुंदरीकरण का कोई अनुभव नहीं है. मेंसर्च शिवांग वेंचर प्राइवेट लिमिटेड ने में सत्संग कंस्ट्रक्शन के नाम से लगाया था. जांच में फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र लगाने का आरोप सही साबित हुआ है.