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लखनऊ: पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर की दलीलों को कोर्ट ने नहीं माना, 25 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेजा

लखनऊ: पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर की दलीलों को कोर्ट ने नहीं माना,  25 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेजा
UP City News | Oct 12, 2021 10:23 PM IST

लखनऊ. गिरफ्तारी के दौरान खुद को पूर्व वरिष्ठ आइपीएस बताकर धमकी देने और सरकारी कार्य में बाधा डालने के मामले में मंगलवार को कोर्ट ने अमिताभ ठाकुर को 25 अक्टूबर तक के लिए न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया. सीजेएम रवि कुमार गुप्ता ने विवेचक और दरोगा अरुण कुमार मिश्रा की अर्जी को मंजूर और पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर की अर्जी को खारिज करते हुए यह आदेश दिया. अदालत में पेशी के बाद कड़ी सुरक्षा के बीच पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर को जेल भेज दिया गया.

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने विवेचक ने कहा कि विगत 27 अगस्त को एक आपराधिक मामले में पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर को गिरफ्तारी देने को कहा गया लेकिन वह खुद को पूर्व आईपीएस बताकर धमकी देने लगे और गिरफ्तारी देने से इनकार कर दिया. इस पर पुलिस ने उनकी गिरफ्तारी करने की कोशिश की तो वह, उनकी पत्नी और उनकी बेटी पुलिसकर्मियों पर हमलावर हो गए. इस हमले में कुछ पुलिस कर्मचारियों को आंशिक चोट भी आई. विवेचक ने कहा कि पूर्व आईपीएस द्वारा सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने से असहज स्थिति पैदा हो गई. इस कारण दरोगा दरोगा धनंजय सिंह ने थाना गोमतीनगर में इन लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 186, 189, 224, 323, 353 व 427 में यह मुकदमा दर्ज कराया. मुकदमे की विवेचना के लिए अभियुक्त को न्यायिक रिमांड में लिया जाना आवश्यक है.

वहीं पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने खुद बहस करते हुए न्यायिक रिमांड का विरोध किया और कहा कि रिमांड मांगने का एक मात्र उद्देश्य उनका शोषण व उत्पीड़न करना है. हालांकि मामले में कोई साक्ष्य और न कोई तथ्य ही मौजूद है और रिपोर्ट झूठी है. उन्होंने कई निर्णयों का हवाला देते हुए यह भी कहा कि सिर्फ रूटीन ढंग से नहीं अपितु न्यायिक मस्तिष्क का प्रयोग करते हुए ही रिमांड दिया जा सकता है. यदि विवेचक को ऐसा लगता है, कि इस मामले में पर्याप्त साक्ष्य है, तो उन्हें आरोपपत्र प्रेषित करना चाहिए था. हालांकि कोर्ट ने पूर्व आईपीएस की बात को अनसुना करते हुए उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया. इस दौरान अमिताभ की पत्नी डा. नूतन ठाकुर व कई वकील भी अदालत में मौजूद रहे.