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यादव लैंड में सपा का चक्रव्यूह नहीं भेद पाई भाजपा, चारों खाने हुई चि​त्त

यादव लैंड में सपा का चक्रव्यूह नहीं भेद पाई भाजपा, चारों खाने हुई चि​त्त
UP City News | May 04, 2021 12:21 PM IST

लखनऊ. त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में सपा की रणनीति के आगे भाजपा की एक नहीं चली और सत्ताधारी पार्टी चारों खाने चित्त हो गई. यादव बहुल जिलों में सपा का चक्रव्यूह भेदने के चक्कर में भाजपा के कई कद्दावर नेता भी साख तक नहीं बचा सके. मैनपुरी, फिरोजाबाद, इटावा, कन्नौज, औरेया, फर्रुखाबाद आदि जिलों की 70 फीसदी सीटों पर सपा ने कब्जा किया है. यादव बहुल जिलों के साथ ही अन्य जिलों में भी सपा की रणनीति काम आई और बड़ी संख्या में सपा और समर्थित प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की.

पंचायत चुनाव में भाजपा ने अच्छा प्रदर्शन करने और सपा के गढ़ में सेंधमारी करने की रणनीति बनाई थी. इसके लिए गुजरात में अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रणनीति पर काम किया गया. सपा के गढ़ में सपा से नाराज चल रहे प्रत्याशियों पर भाजपा ने दांव लगाया लेकिन सपा के रणबांकुरों ने भी ऐसी चाल चली कि सत्ताधारी पार्टी के कई दिग्गजों का हार का सामना करना पड़ा.

सपा सुप्रीमो के गढ़ कहे जाने वाले मैनपुरी में भाजपा ने अखिलेश यादव की चचेरी बहन संध्या यादव पर दांव खेला. हालांकि उन्हें सपा प्रत्याशी के सामने हार का सामना करना पड़ा. बदायूं से सांसद धर्मेंद्र यादव की बहन संध्या की हार तो सोमवार सुबह ही हो गई थी लेकिन प्रशासन ने विजयी सपा प्रत्याशी को देररात जीत का प्रमाणपत्र दिया. यहां 30 सीटों में से 15 सीटों पर सपा प्रत्याशियों ने जीत हासिल की. यहां शिवपाल सिंह के खास सुजान सिंह यादव निर्दलीय और उनके बेटे व बहू सपा प्रत्याशी के तौर पर जीते हैं.

वहीं इटावा की बात करें तो सपा और प्रसपा ने साझा कर 10 प्रत्याशियों को उतारा. इसके बाद कई सीटों को रिक्त छोड़ दिया गया और इन सीटों पर भी पार्टी के खास उम्मीदवार निर्दलीय मैदान में उतरे. यहां सपा के प्रत्याशियों ने 24 में से 20 जिला पंचायत सदस्य पद पर जीत ​हासिल की. यहां पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के चचेरे भाई और निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष अभिषेक यादव विजयी रहे.

औरेया में भी सपा ने भाजपा की रणनीति को फेल कर दिया. यहां 30 में से 15 सीटों पर सपा ने कब्जा जमाया है. वहीं पांच निर्दलीय भी जीते हैं, जो सपा के समर्थित माने जाते हैं. फर्रुखाबाद में भी पूर्व मंत्री नरेंद्र सिंह अपने बेटे और परिवार के दो अन्य सदस्यों को चुनाव की वैतरणी पार करा ले गए. यहां कभी पूर्व मंत्री के खास रहे दृगपाल सिंह बॉबी की भाभी पर भाजपा ने दांव खेला था लेकिन वह भी चुनाव हार गई.

सपा का ही गढ़ माने जाने वाले कन्नौज में सपा को सूची जारी करते समय काफी परेशानी हुई थी. यहां तीन बार सूची जारी करने के बाद भी असंतोष था. यहां चौथी बार में सपा प्रत्याशियों की सूची जारी की जा सकी. यहां भी सपा ने कई सीटों केा रिक्त छोड़ दिया था. हालांकि सोमवार को आए परिणाम सपा के पक्ष में आए. यहां सपा 28 सीटों में 25 पर जीती.