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क्रिप्टोकरेंसी में को लेकर क्यों बढ़ रही है लोगों की दिलचस्पी, क्या है इसपर भरोसे की वजह

क्रिप्टोकरेंसी में को लेकर क्यों बढ़ रही है लोगों की दिलचस्पी, क्या है इसपर भरोसे की वजह
UP City News | Jan 04, 2022 01:41 PM IST

नई दिल्ली. रिजर्व बैंक (RBI) और भारत सरकार भले ही क्रिप्टोकरेंसी (cryptocurrencies) को लेकर अधिक सतर्क है लेकिन दूसरी ओर इसके प्रति लोगों की दीवानगी दिन ब दिन बढ़ती ही जा रही है. हालत ये है कि रेग्युलेशन न होने पर भी निवेशकों (investors) की इसमें दिलचस्पी और भरोसा लगातार बढ़ रहा है. क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करने वाले ज्यादातर युवा हैं जिनकी उम्र 35 साल से भी कम है. ये युवा ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी पर दांव लगा रहे हैं.

यदि किसी निवेशक ने बिटक्वॉइन (bitcoin) में एक साल पहले 1 लाख निवेश किया होता तो मौजूदा वक्त में उसकी वैल्यू करीब 1.7 लाख रुपए होती है. वहीं शेयर बाजार में निवेश की वैल्यु महज 1.2 लाख रुपए होती. बता दें कि क्रिप्टोकरेंसी इसी टेक्नोलॉजी पर आधारित है. इसके अलावा मल्टीपल ऐप जो क्रिप्टो में निवेश का मौका देते हैं, वे इतने टेक्नो फ्रेंडली और आसान बनाए गए हैं कि निवेशकों को बस सोचने की जरूरत है और कुछ ही देर में इसमें निवेश किया जा सकता है.

बता दें कि भारत में क्रिप्टो निवेशकों की संख्या में उछाल केवल इससे मिलने वाले रिटर्न को लेकर नहीं है. बल्कि क्रिप्टो निवेशकों की बड़ी संख्या इस टेक्नोलॉजी को भी काफी पसंद करती है. मीडिया रिपोर्ट की मानें तो युवा निवेशकों से यह समझने की कोशिश की है कि उनका लक्ष्य क्या है. वे क्या सोचकर क्रिप्टोकरेंसीज में निवेश कर रहे हैं और उन्हें 2022 में क्रिप्टोकरेंसी रेग्युलेशन को लेकर क्या-क्या उम्मीदें हैं. ब्लॉकचेन एक सिक्यॉर डी-सेंट्रलाइज लेजर सिस्टम है. क्रिप्टोकरेंसीज इसी टेक्नोलॉजी पर आधारित है. बेंगलुरू के एक ऐप डेवलपर ने कहा कि मेरा परिवार एक जमीन विवाद से जूझ रहा है. अगर इस समस्या को ब्लॉकचेन लेजर पर डाल दिया जाए तो सारा खेल पारदर्शी हो जाएगा.

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ये जानकारी में रहे कि भारत में देश में अभी तक क्रिप्टोकरेंसी रेग्युलेटेड नहीं है. इसका इस्तेमाल लेन-देन के रूप में नहीं किया जा सकता है. बावजूद इसके यूथ इसमें निवेश करते चले जा रहे हैं. हालांकि, सरकार से बैन का डर सभी को है. ऐसे में वे अपने क्रिप्टो इन्वेस्टमेंट को काफी लिमिटेड रखते हैं. ज्यादातर निवेशकों ने कहा कि हम जितना गंवा सकते हैं, उतना ही निवेश करते हैं. ऐसे में अगर बैन भी लगता है तो नुकसान के लिए हम तैयार हैं.