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Satta Matka: कौन था मटका किंग कल्याणजी भगत, क्या है कल्याण मटका सट्टा की कहानी?

Satta Matka: कौन था मटका किंग कल्याणजी भगत, क्या है कल्याण मटका सट्टा की कहानी?
UP City News | Sep 20, 2022 05:05 PM IST

मटके सट्टे (Matka Satta) की कहानी सन् 50 के दशक के दो किरदारों के इर्दगिर्द घूमती है. कल्याणजी भगत (Kalyanji Bhagat) और रतन खत्री (Ratan Khatri) ने भारत में मटके जुए (Matka Jua) के अवैध व्यापार को एक बड़े नेटवर्क में बदला था. आज दोनों ही इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन कल्याण भगत वो पहला शख्स था जिसने वास्तव में सबसे पहले मटके जुए के अवैध धंधे की मुंबई से शुरुआत की. कभी उसे कल्याण गाला कहा जाता था बाद में उसने अपना नाम बदलकर कल्याण भगत रख लिया. कल्याण भगत का जन्म गुजरात के कच्छ इलाके के एक रताड़िया नाम के गांव में हुआ था. कल्याण एक अप्रवासी की तरह 1941 में बॉम्बे (Bombay) आया था. उसने करीब 15 साल तक फेरी लगाकर मसाले बेचने का काम किया. 1960 में वर्ली इलाके में छोटी-मोटी मसाले की दुकान चलाने के दौरान जुए की शुरुआत की. वह न्यूयॉर्क के होलसेल मार्केट में कॉटन के दिन में खुलने बंद होने के दाम के आधार पर लोगों से दांव लगावाता था. धीरे-धीरे न्यूयॉर्क बाजार के दाम जल्द अनुमान लग जाने के कारण महत्वहीन होने लगे. फिर कल्याण ने वर्ली में विनोद महल को अपने काम के लिए अड्डा बनाया. 2 अप्रैल 1962 को जब उसने वर्ली में औपचारिक तौर पर मटका जुए की शुरुआत की थी. तब कल्याण भगत का पहला बयान था - मैं ज्योतिषी हूं जुआरी नहीं.

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अलग तरह का मटका
कल्याणजी भगत ने अपने अलग तरह के मटके जुए की शुरुआत की. यह बाद में शुरू हुए रतन खत्री (Matka King Ratan Khatri) के मटके जुए से अलग था. दरअसल रतन खत्री के मटके जुए में ताश के नौ नंबरों का समावेश किया गया था जबकि बाकी तीन पत्तों को इसमें शामिल नहीं किया गया जबकि कल्याण भगत ने कुल 12 नंबरों को आधार बनाया और रतन ने 9 नंबर वाले मटके जुए से अलग 12 नंबरों वाले मटके जुए की शुरुआत की. इसमें राजा (King), रानी (Queen) और गुलाम (Knave) को नंबरों के रूप में माना गया. कल्याण के मटके जुए (Kalyan Matka) में रानी 11 नंबर और राजा 12 नंबर कहलाता था. कल्याण ने इन 12 नंबरों को 12 राशियों से जोड़ा था.

कल्याण भगत और रतन खत्री का अलग होना
कल्याणजी भगत ने जब मटका का धंधा (Matka Satta) शुरू किया था तब वह रतन खत्री उनके साथ ही काम करता था. इस मटके को वर्ली मटका (Worli Matka) कहा जाता था. बाद में न्यू यॉर्क कॉटन एक्चेंज (new york cotton exchange) में बोली लगाने की प्रक्रिया बंद हो गई और मटके के धंधे को झटका लगा. इसके बाद अलग-अलग चीजों में पर दांव लगाए जाने लगे. इसकी लोकप्रियता इतनी बढ़ गई कि जल्द ही जावेरी बाजार (Jhaveri Bazaar) में लगभग 50 सट्टेबाज (Sattebaj) थे ने उनसे संपर्क किया. उन्होंने उसे जावेरी बाजार से परिचालन शुरू करने के लिए कहा क्योंकि लोग वहां दांव लगाने आए थे लेकिन तब तक भगत एक व्यस्त व्यक्ति बन चुका था और उसने सट्टेबाजी बाजार के एक और खिलाड़ी रतन खत्री को अपने आविष्कार की फ्रेंचाइजी दी. इस तरह कल्याण भगत और रतन खत्री की राहें अलग हो गईं. रतन खत्री ने अपना मटका जुआ शुरु कर दिया जिसमें सिर्फ 9 ही नंबर हुआ करते थे.

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खामोश खिलाड़ी
कल्याणजी और रतन में एक बात बिल्कुल जुदा थी. कल्याणजी भगत भारत में मटका का धंधा गैरकानूनी (Matka illegal business) होने के कारण इसे छुपाकर ही रखना चहाता था जबकि रतन खत्री ने इसका प्रचार करने में कोई गुरेज नहीं किया. शुरुआती दौर में कल्याण के इस खामौश अंदाज के कारण उसने तेजे से अपने धंधे का विस्तार कर लिया. मटके में बेईमानी न हो इसके लिए हर स्तर पर उसके विश्वस्त एजेंट थे जो नंबर चुनने की प्रक्रिया पर निगाह रखते थे. धीरे-धीरे मटके का नेटवर्क देश के कोने-कोने में फैल गया और एक दिन का मुनाफा करोड़ों में होने लगा. कल्याण वर्ली मटका (Kalyan Worli Matka) धीरे-धीरे लोगों की जुबान पर चढ़ गया. जानकार मानते हैं कि कल्याण मटके की सफलता की एक वजह यह भी थी बल्कि कोई एक रुपये में भी इस पर दांव लगा सकता था. साथ में उसने प्रशासन पर रिश्वत का जाल बनाकर उसके धंधे को हल्के में लेने की व्यवस्था कर ली थी.

कल्याण भगत का परिवार
कल्याण भगत की तीन संतान थीं. जयंतिलाल भगत, विनोद भगत और सुरेश भगत. 1990 में उसकी मौत के बाद उसके बेटे सुरेश भगत ने उसकी जगह ले ली. हालांकि मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में विनोद भगत ने दावा किया कि उसका परिवार मटके का व्यापार छोड़ चुका है. विनोद ने कहा कि उसका बड़ा भाई चीनी के थोक व्यापार का काम करता है जबकि वो खुद फिल्म शूटिंग में इस्तेमाल होने वाला सामान के बिजनस में है जबकि उसका छोटा भाई सुरेश समाजसेवा में जुड़ा हुआ था. हालांकि उसने माना कि सुरेश का मटके से संबंध था. बाद में सुरेश भगत के भाई विनोद पर ही अपनी भाई की पत्नी की सुपारी देने का आरोप लगा था.

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डिस्क्लेमर : हम किसी भी तरह से सट्टा, जुआ या इस तरह की गैर-कानूनी गतिविधियों को प्रोत्साहित नहीं करते हैं. इस लेख को यहां पब्लिश करने का उद्देश्य आपको सिर्फ जानकारियों से अपडेट रखना है.