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Satta Matka: कौन था अलवर का सट्टा किंग घनश्याम सैनी जिसका 10 करोड़ के लिए हुआ अपहरण और कत्ल

Satta Matka: कौन था अलवर का सट्टा किंग घनश्याम सैनी जिसका 10 करोड़ के लिए हुआ अपहरण और कत्ल
UP City News | Oct 04, 2022 01:51 PM IST

29 जुलाई 2022 की सुबह अलवर जिले (Alwar) में एक शख्स का फिल्मी अंदाज में अपहरण हो गया. दरअसल एक शख्स हैयर सलून से बाल बनवाकर निकला था. धीरे-धीरे वह अपनी स्कूटी की ओर बढ़ रहा था तभी किसी ने उसे आवाज दी कि कोई आपसे स्कॉर्पियों में बात करना चाहता है. वो शख्स कोतुहलवश उस ओर बढ़ा, स्कॉर्पियों के करीब आते ही कुछ लोगों ने उसे जबरन खींचकर स्कॉर्पियों में डाल लिया और बुरी तरह तरह मारते-पीटते हुए अपनी स्कॉर्पियों अनजान जगह की ओर भगा दी. दो आरोपी बाइक और स्कूटी पर थे और तीन स्कॉर्पियो में. बाद में अपनी गाड़ियां छोड़कर दोनों स्कॉर्पियों में बैठ गए. यह गाड़ी अगवा शख्स को लेकर जरौली के जंगल पहुंच गई. फिर शुरू हुआ रकम वसूली का खूनी खेल.

कौन था वो शख्स
ऊपर से देखने में यह जरूर एक शहर का आम अपहरण का मामला लग रहा हो पर ऐसा था नहीं. जिस शख्स को उठाया गया था वो अलवर का मशहूर सट्टा किंग घनश्याम सैनी (Satta King Ghanshyam Saini) था और जिस गैंग ने उसका अपहरण किया था वो कुख्यात पपला गैंग (Papla Gang) को लोग थे और जो रकम की मांगी गई थी वो भी साधारण नहीं थी. अपहरणकर्ताओं ने सट्टा किंग घनश्याम से 10 करोड़ रुपये (10 crore rupees ransom) की मांग की थी. पैसे हासिल करने की कोशिश में पपला गैंग के लोग घनश्याम को यातनाएं देते रहे लेकिन जब उन्हें लगा कि कुछ भी रकम नहीं मिलेगी तो उन्होंने घनश्याम को बेहिसाब मारा पीटा जिससे उसकी मौत हो गए. यह हत्या दुर्घटना लगे इसलिए उसकी लाश को नौरंगाबाद रोड तिजारा (Naurangabad Road Tijara) के पास पटक दिया गया और घनश्याम के फोन से ही 108 नंबर पर कॉल कर एंबुलेंस मांगी गई. वारदात को अंजाम देकर अपहरणकर्ता फरार हो गए.

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क्यों अपहरण हुआ घनश्याम सैनी का
घनश्याम सैनी शहर का कोई छोटा मोटा नाम नहीं था. घनश्याम सैनी राखियों का व्यापारी था और अलवर में उसे सट्टा किंग के नाम से भी जाना जाता था. कहा जाता है उसके पास सट्टे का एक बड़ा नेटवर्क था. हालांकि घनश्याम के परिवारवालों ने साफ मना किया कि घनश्याम किसी भी तरह के सट्टेबाजी से नहीं जुड़ा था लेकिन जानकारों की मानें ने पपला गैंग की उस पर सट्टेबाजी की रकम को लेकर ही नजर थी. अगस्त के शुरुआती हफ्ते में जब पुलिस ने घनश्याम की हत्या के आरोपियों को पकड़ा तो उन्होंने खुलासा किया कि घनश्याम उनके दुश्मन चीकू गैंग (Chiku Gang) की पैसों से मदद कर रहा था. ये बात उन्हें रास नहीं आई. पपला गैंग ने भी उससे रकम की मांग की लेकिन घनश्याम उनको टालता रहा. इसी वजह से घनश्याम सैनी का अपहरण किया गया.

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अलवर का सट्टा नेटवर्क Alwar Satta Network-
अलवर में सट्टा कारोबार अपनी जड़ें फैला चुका है. मालूम हो कि करीब दशक भर में शहर में सट्टे की जड़ें और मजबूत हुई हैं. यहां आईपीएल (IPL) और नंबर (Number Satta) पर सट्टा जबर्दस्त तरीके से लगता है. बताया जाता है कि शहर में 5 दर्जन से ज्यादा बड़े सट्टेबाज (Sattebaaz) मौजूद हैं जो अलवर ही नहीं बल्कि करीब के जिलों और दूसरे राज्यों जैसे हरियाणा (Haryana), यूपी (UP) और दिल्ली (Delhi) तक अपने सट्टे के कारोबार को फैलाए हुए हैं. इनकी निगरानी में सैकड़ों सटारिये काम कर रहे हैं. ये हर दिन करोड़ों का सट्टा लगाते हैं. ये सट्टेबाजी आलीशान कोठियों में रहते हैं और लग्जरी गाड़ियों में घूमते हैं. इनकी करोड़ों की संपत्तियां अलवर के बाहर भी मौजूद हैं. हालात विपरीत होने पर ये सटोरिये दिल्ली-जयपुर बैठकर भी अपने कारोबार को चलाते हैं. उनके पंटर अलवर में ही मौजूद रहकर सट्टा लगाने वालों से कलेक्शन कर लेते हैं. अलवर के कुछ इलाके उनके ठिकानों के रूप में जाने जाते हैं.

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अलवर पुलिस का एक्शन
अलवर में सट्टेबाजी के नेटवर्क को नेस्तनाबूद करने के लिए समय-समय पर पुलिस ने कई बड़े अभियान चलाए. कई सट्टेबाजों को गिरफ्तार भी किया लेकिन इस काले धंधे पर पूरी तरह से लगाम नहीं लग सकी. ऑनलाइन सट्टे और आईपीएल की शुरुआत ने यहां भी सट्टेबाजों के लिए राहें काफी आसान कर दी हैं. हालात खराब होते देख पुलिस ने बीते दो सालों में काफी सख्ती बढ़ाई है और कई दिग्गज सट्टेबाजों को पकड़ा भी है. इसी साल 23 मई को एक बड़ी कार्रवाई करते हुए अलवर पुलिस ने आईपीएल सीजन में सट्टा लगाने के आरोप में 5 बड़े सटोरियों को पकड़ लिया. इसमें एक अलवर से और 4 दिल्ली से उठाए गए थे. इनमें से 4 अलवर के रहने वाले थे. इनसे भारी मात्रा में सट्टा लगाने का सामान भी बरामद हुआ था. कहा जाता है कि ये सट्टेबाजी एक आईपीएल सीजन में करोड़ों रुपया कमा डालते थे. इनके पास कुछ रजिस्टर भी मिले जिससे पुलिस को करोड़ 10 करोड़ रुपये की सट्टेबाजी रकम का पता चला है. इससे पहले पुलिस ने शहर के ऐसे ही 7 बड़े सट्टेबाजों को पकड़ा था. 2019 और 2021 में पुलिस ने अलवर में सट्टा नेटवर्क रीढ़ तोड़ने के लिए ऐसी ही कुछ बड़ी कार्रवाइयां की हैं.

पुलिस की सख्त कार्रवाईयों के बीच सट्टा किंग घनश्याम सैनी की हत्या ने यह तो साफ कर ही दिया है कि सट्टे के इस काले धंधे में सिर्फ सट्टेबाज ही नहीं हैं बल्कि कई कुख्यात गैंग भी इसमें शामिल होकर कमाई करना चाहते हैं. समय रहते इस नेटवर्क को खत्म करने की जरूरत है क्योंकि इस काली कमाई के लालच ने कई आम लोगों को भी अपनी जकड़ में लेना शुरू कर दिया है.

डिस्क्लेमर : हम किसी भी तरह से सट्टा, जुआ या इस तरह की गैर-कानूनी गतिविधियों को प्रोत्साहित नहीं करते हैं. इस लेख को यहां पब्लिश करने का उद्देश्य आपको सिर्फ जानकारियों से अपडेट रखना है.