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Agra Freedom Fighters: आगरा का बहादुर अब्बास अली बेग जो कोटा में महीनों तक अंग्रेजों के सामने डटा रहा

Agra Freedom Fighters: आगरा का बहादुर अब्बास अली बेग जो कोटा में महीनों तक अंग्रेजों के सामने डटा रहा
UP City News | Oct 05, 2022 11:24 AM IST

लखनऊ: देश की आजादी के लिए अपनी जान कुर्बान करने वालों में एक नाम अब्बास अली बेग (Abbas Ali Beg) का भी है. 1857 में गदर (Indian Rebellion of 1857) के दौरान उन्होंने कोटा (Kota) में रहते हुए अंग्रेजों के खिलाफ कई युद्ध लड़े. मालूम हो कि राजस्थान के कोटा इलाके पर करीब 6 महीने तक क्रांतिकारियों का शासन बना रहा और अंग्रेजों की एक न चली. विद्रोही सैनिकों को जनता का प्रबल समर्थन हासिल था.

कौन थे अब्बास अली बेग Who was Abbas Ali Beg?
अब्बास अली बेग मूलत: आगरा के थे. सन् 1823 में आगरा में उनका जन्म हुआ था. अब्बास अली बेग ब्रिटिश इंडियन आर्मी में कोटा में दफेदार के रूप के तैनात थे. 1857 में जब आजादी का संग्राम शुरू हुआ तो उन्होंने ब्रिटिश आर्मी (British Army) की नौकरी छोड़ दी और क्रांतिकारियों की टोली में शामिल हो गए. उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ कई युद्ध लड़े. 1858 में आगे बढ़ती ब्रिटिश सेना का मुकाबला करते हुए अब्बास शहीद हो गए.

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कोटा में जब विद्रोह का बिगुल फूंका गया Kota Revolt
कोटा में सैनिक छावनी रही थी. यहां विद्रोह राजकीय सेना व आम जनता ने किया. कोटा के पॉलिटिकल एजेंट मेजर बर्टन (kota political agent major burton 1857) थे जो 12 अक्टूबर 1857 को झालावाड़ व बूंदी की राजकीय सेना सहित कोटा पहुंच गए. कोटा क्रांतिकारियों का नेतृत्व पूर्व सरकारी वकील लाला जयदयाल ( Lala Jaydayal) और मेहराब खान (Mehrab Khan) कर रहे थे. 15 अक्टूबर 1857 को दो हजार जांबाज़ क्रांतिकारियों में से दो भवानी व नारायण ने पॉलिटिकल एजेंट बर्टन, एक डॉक्टर शेडलर व अन्य शख्स शैविल की हत्या कर दी.

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बर्टन का सिर काटा गया
बर्टन का सिर काटकर संपूर्ण कोटा में घुमाया गया और कोटा के शासक महाराव राम सिंह (Maharao Ram Singh) को नजरबंद कर दिया. 6 महीने तक कोटा पर क्रांतिकारियों का अधिकार रहा. उन्हें पीछे धकेलने और कोटा पर फिर से कब्जा करने की तमाम कोशिशें की गईं लेकिन नाकाम रहीं. इस दौरान क्रांतिकारियों की कई झड़पें भी हुईं. 30 मार्च 1858 को आखिरकार मेजर जनरल रॉबर्ट (Major General Robert) के नेतृत्व में अंग्रेजी सेना (British Army) ने क्रांतिकारियों को हराने में सफलता प्राप्त की. जयदयाल और मेहराब खान को फांसी दे दी गई.

उल्लेखनीय है कि राजपुताने में अंग्रेजों के विरुद्ध कोटा जैसा सुनियोजित व नियंत्रित संघर्ष राजस्थान में और कहीं नहीं हुआ था. कोटा एकमात्र ऐसी रियासत थी जहां क्रांतिकारियों ने शासक को नजरबंद करके शासन की बागडोर अपने हाथ में ली.

रेफरेंस- म्यूटिनी रिकॉर्ड्स आगरा म्यूटिनी बस्ता, यूपीआरआरए, डब्लूडब्लूआईएम, वॉल्यूम 3 पेज 1