सिटी न्यूज़

कोरोना टीकाकरण को लेकर इन 6 सवालों को अक्‍सर पूछते हैंं लोग, यहां पढ़ें उनके जवाब

कोरोना टीकाकरण को लेकर इन 6 सवालों को अक्‍सर पूछते हैंं लोग, यहां पढ़ें उनके जवाब
UP City News | Jun 08, 2021 02:11 PM IST

नई दिल्ली: क्या एलर्जी वाले लोगों को टीका लगाया जा सकता है? क्या गर्भवती महिलाएं कोविड 19 का टीका लगवा सकती हैं? स्तनपान कराने वाली माताएं भी लगवा सकती हैं? क्या टीका लगवाने के बाद मुझमें पर्याप्त एंटीबॉडी बन जाती हैं? क्या वैक्सीन का इंजेक्शन लगने के बाद रक्त का थक्का बनना सामान्य है? अगर मुझे कोविड संक्रमण हो गया है, तो कितने दिनों के बाद मैं टीका लगवा सकता हूं? ये सवाल हर किसी के जहन में गूंजते हैं. इस सब सवालों के जबाव डॉ. वी के पॉल, सदस्य (स्वास्थ्य), नीति आयोग, और डॉ. रणदीप गुलेरिया, निदेशक, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ने दिए हैं. आगे पढ़िए

प्रश्न: क्या एलर्जी वाले लोगों को टीका लगाया जा सकता है?
उत्तर: डॉ. पॉल बताते हैं यदि किसी को एलर्जी की गंभीर समस्या है, तो डॉक्टरी सलाह के बाद ही कोविड का टीका लगवाना चाहिए. हालांकि, अगर यह केवल मामूली एलर्जी - जैसे सामान्य सर्दी, त्वचा की एलर्जी आदि का सवाल है, तो टीका ले सकते हैं. डॉ. गुलेरिया बताते हैं कि एलर्जी की पहले से दवा लेने वालों को इन्हें रोकना नहीं चाहिए, टीका लगवाते समय नियमित रूप से दवा लेते रहना चाहिए. यह भी जानना महत्वपूर्ण है कि टीकाकरण के कारण उत्पन्न होने वाली एलर्जी के प्रबंधन के लिए सभी टीकाकरण स्थलों पर व्यवस्था की गई है. अतः हम सलाह देते हैं कि यदि आपको गंभीर एलर्जी हो, तो भी आप दवा लेते रहें और जाकर टीका लगवाएं.

प्रश्न: क्या गर्भवती महिलाएं टीका लगवा सकती हैं?
उत्तर: डॉ पॉल कहते हैं कि गर्भवती महिलाओं को टीका नहीं लगाया जाना चाहिए. इसका कारण यह है कि डॉक्टरों और वैज्ञानिक समुदाय द्वारा टीका परीक्षणों से उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर अभी गर्भवती महिलाओं के टीकाकरण की सिफारिश करने का निर्णय नहीं लिया जा सका है. यह पाया जा रहा है कि गर्भवती महिलाओं के लिए कई कोविड-19 टीके सुरक्षित पाए जा रहे हैं. हमें उम्मीद है कि हमारे दो टीकों के लिए भी रास्ता खुल जाना चाहिए.
डॉ. गुलेरिया कहते हैं कि कई देशों ने गर्भवती महिलाओं के लिए टीकाकरण शुरू कर दिया है. अमरीका के एफडीए ने फाइजर और मॉडर्ना के टीकों को इसके लिए मंजूरी दे दी है. कोवेक्सीन और कोविशील्ड से संबंधित आंकड़े भी जल्द आएंगे. कुछ डेटा पहले से ही उपलब्ध है, और हम आशा करते हैं कि कुछ दिनों में, हम पूर्ण आवश्यक आंकड़े प्राप्त करने और भारत में भी गर्भवती महिलाओं के टीकाकरण को मंजूरी देने में सफल होंगे।

प्रशन: क्या स्तनपान कराने वाली माताएं टीका लगवा सकती हैं?
उत्तर: डॉ पॉल इस बारे में बहुत स्पष्ट कहते हैं कि टीका स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए बिल्कुल सुरक्षित है. किसी प्रकार के भय की कोई आवश्यकता नहीं है.

प्रश्न: क्या टीका लगवाने के बाद पर्याप्त एंटीबॉडी बन जाती हैं?
उत्तर: डॉ. गुलेरिया कहते हैं यह समझना महत्वपूर्ण है कि हमें टीकों की प्रभावशीलता का आकलन केवल उससे उत्पन्न होने वाली एंटीबॉडी की मात्रा से नहीं करना चाहिए. टीके कई प्रकार की सुरक्षा प्रदान करते हैं - जैसे एंटीबॉडी, कोशिका-मध्यस्थ प्रतिरक्षा तथा स्मृति कोशिकाओं के माध्यम से (जो हमारे संक्रमित होने पर अधिक एंटीबॉडी उत्पन्न करते हैं)। इसके अलावा, अब तक जो प्रभावोत्पादकता परिणाम सामने आए हैं वे परीक्षण अध्ययनों पर आधारित हैं, जहां प्रत्येक परीक्षण का अध्ययन डिजाइन कुछ अलग है। डॉ. पॉल कहते हैं कुछ लोग टीकाकरण के बाद एंटीबॉडी परीक्षण करवाने की सोचते हैं. लेकिन इसकी आवश्यकता नहीं है क्योंकि अकेले एंटीबॉडी किसी व्यक्ति की प्रतिरक्षा का संकेत नहीं देते. ऐसा टी-कोशिकाओं या स्मृति कोशिकाओं के कारण होता है. जब हम टीका लगवाते हैं तो इनमें कुछ परिवर्तन होते हैं, वे मजबूत हो जाते हैं और प्रतिरोधक क्षमता प्राप्त कर लेते हैं.

प्रश्न: क्या वैक्सीन का इंजेक्शन लगने के बाद रक्त का थक्का बनना सामान्य है?
उत्तर: डॉ पॉल कहते हैं इस जटिलता के कुछ मामले सामने आए हैं, खासकर एस्ट्रा-जेनेका वैक्सीन के संबंध में. यह जटिलता यूरोप में हुई, जहां यह जोखिम उनकी जीवनशैली, शरीर और आनुवंशिक संरचना के कारण उनकी युवा आबादी में कुछ हद तक मौजूद पायी गई, लेकिन, मैं आपको आश्वस्त करना चाहता हूं कि हमने भारत में इन आंकड़ों की व्यवस्थित रूप से जांच की है और पाया है कि रक्त के थक्के जमने की ऐसी घटनाएं यहां लगभग नगण्य हैं - इतनी नगण्य कि किसी को इसके बारे में चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। डॉ. गुलेरिया कहते हैं यह पहले भी देखा गया है कि सर्जरी के बाद रक्त का थक्का बनना भारतीय आबादी में अमेरिका और यूरोपीय आबादी की तुलना में कम होता है. वैक्सीन प्रेरित थ्रोम्बोसिस या थ्रोम्बोसाइटोपेनिया नाम का यह दुष्प्रभाव भारत में बहुत दुर्लभ है. इसलिए इससे डरने की जरूरत नहीं है.

प्रश्न: अगर मुझे कोविड संक्रमण हो गया है, तो कितने दिनों के बाद मैं टीका लगवा सकता हूं?
उत्तर: डॉ. गुलेरिया कहते हैं नवीनतम दिशानिर्देशों में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि जिस व्यक्ति को कोविड-19 का संक्रमण हुआ है, वह ठीक होने के दिन से तीन महीने बाद टीका लगवा सकता है. ऐसा करने से शरीर को मजबूत रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने में मदद मिलेगी और टीके का असर बेहतर होगा.