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मेरी कहानी -डरा देता है वो वक्त जब कोराना ने एक-एक पल मेरे लिए मुश्किल बना दिया

मेरी कहानी -डरा देता है वो वक्त जब कोराना ने एक-एक पल मेरे लिए मुश्किल बना दिया
UP City News | Nov 22, 2021 03:22 PM IST

नई दिल्ली. हेलो, मेरा नाम मेघा एम कुमार है. मैं दिल्ली एनसीआर में रहती हूं. कोरोना बाकी लोगों की तरह मुझे भी खौफजदा तो करता था लेकिन मुझे कभी लगा ही नहीं कि मैं भी इसका शिकार बन जाऊंगी. जो मेरे साथ गुजरा वो काफी तकलीफदेह था लेकिन परिवार का मजबूत साथ मुझे इस मुश्किल से पार पाने में एक अहम कड़ी साबित हुआ. इस दौरान मैंने जो देखा, महसूस किया वो मैं चाहूंगी कि आप भी उसे जानें और उससे सीख लें.

यस आई वाज कोरोना पॉजिटव

मुझे covid 20 अप्रैल 2021 में हुआ था कंजेक्टिविटिस (आँख आने ) से. जब मुझे ये हुआ तब मुझे पता नहीं था कि ये क्या है मुझे लगा कि ये आँखों का इन्फेक्शन है. 3 दिन में मेरा कंजेक्टिविटिस ठीक हो गया फिर उसके बाद मुझे फीवर हो गया और फीवर भी दो दिन के अंदर ठीक हो गया लेकिन उस समय कोरोना चल रहा था और मुझे वायरल भी था इसलिए हम Covid टेस्ट कराने के लिए गए और बाद में मुझे पता चला कि में Covid पॉजिटिव हूँ. एक हफ्ते तक तो मुझे पता ही नहीं चला कि मुझे कोरोना है लेकिन जैसे ही पता चला में होम आइसोलेशन में चली गयी. मुझे एक रूम में रखा गया और पेरेंट्स ने सारे जरूरी एहतियात (प्रीकॉशन्स) लिए. वो लोग घर पर मास्क लगा कर रखते थे और में भी मास्क लग कर रखती थी. मेरी जरूरत की सारी चीजें मुझे रूम में ही दी जा रही थी.

मुश्किल दौर

बहुत ही मुश्किल था वो एहसास क्योंकि रोजमर्रा में हम जो चीजें करते है वो नहीं कर पाते हैं. इसमें बहुत ज्यादा बॉडी पैन और सिरदर्द रहता है मतलब अगर आपको फ़ोन चलाना है या कुछ और करना है तो वो नहीं कर पाते हैं क्योंकि ऐसा करने से आँखों में और सर में बहुत ज्यादा खिंचाव पड़ता है. आप एक ही चीज़ कर सकते हो कि बस आप पूरे दिन लेटे रहो और आराम करो.

मम्मी-पापा का प्यार

जैसा कि मैंने कहा कि मुझे जरूरत की सारी चीजें रूम में ही दी जा रही थीं तो मुझे कहीं भी जाने की जरूरत नहीं थी यहां तक कि अगर कोई मेरे रूम में आ भी रहा था तो पूरे एहतियात के साथ ही आ रहा था. मैं भी अपनी तरफ से 100 परसेंट देने कि कोशिश कर रही थी. मेरे रूम को हवादार रखा गया था क्योंकि हमने सुना था कि कोरोना वाले मरीज को ऐसे रूम में रखा जाये जिसमे हवा और सूरज की रौशनी आती रहे. इससे पहले जब मुझे कंजेक्टिविटिस हुआ था तब मैंने एहतियात के तौर पर पहले ही छुट्टी ले ली थी. मैं घर पर ही थी क्योंकि मुझे लगा कि नार्मल eye इन्फेक्शन है लेकिन में चांस नहीं लेना चाहती थी किसी और के साथ ऑफिस में तो मैंने ब्रेक ले लिया और जब तक मेरा रिजल्ट नहीं आया मैं जॉब पर नहीं गयी लेकिन में तब तक वर्क फ्रॉम होम कर रही थी लेकिन बाद में मैं स्क्रीन नहीं देख पा रही थी तो जो भी ऑफिस का काम था में नहीं कर पायी इसलिए मैंने ऑफिस में बताया तो मेरा काम दूसरे लोगों को हैंडओवर कर दिया गया था उस वक़्त के लिए. दो हफ्ते तक में स्क्रीन बिलकुल नहीं देख पायी थी और सीधी भी नहीं बैठ पा रही थी क्योंकि मेरी बैक में बहुत दर्द था इसलिए में लेटी ही रहती थी.

सभी का मिला सहयोग

ऑफिस की तरफ से भी मुझे काम के लिए कभी फोर्स नहीं किया गया वो बहुत कोआपरेटिव थे. मेरे फ्रेंड्स भी डेली मुझे कॉल करते थे पूछते थे वो लोग कंसर्न थे तो पूछते रहते थे कि में कैसी हूँ. हमारे जो फैमिली डॉक्टर हैं वो रेगुलर टच में रहते थे उनसे हम मेडिसिन वगैरह का पूछते रहते थे. तो मैं पूरी तरह से आइसोलेशन में थी. एक हफ्ते के बाद थोड़ा अच्छा लगा नॉजियोस भी कम होने लगा लेकिन जो प्रॉब्लम कर रहा था वो था सर दर्द, बैक पैन और बहुत ज्यादा थकावट. मुझे सांस लेने में कोई दिक्कत नहीं थी लेकिम मैं कोई काम ज्यादा देर तक नहीं कर पा रही थी क्योंकि मुझे बहुत ज्यादा थकान होती थी. मैंने थोड़ा-थोड़ा अपने रूम में चलना शुरू किया. दो हफ्ते के बाद थोड़ी बाहर बालकनी में निकली. हमारे घर में तब भी पूरी एहतियात बरती जा रही थी.

जब मिली थोड़ी राहत

सब कुछ सेनेटाइज करके ले रहे थे हम, एंटीसेप्टिक लिक्विड इस्तेमाल कर रहे थे. बाहर जाते हुए मास्क और शील्ड सब लगा रहे थे. मेरे कपड़े भी अलग धुले जा रहे थे. दो हफ्ते के बाद मैंने टहलना शुरू किया क्योंकि शरीर काफी अकड़ सा गया था. दो हफ्ते के बाद मैंने ऑफिस शुरू कर दिया था. ऑफिस जाने लगी थी क्योंकि काम का बहुत बोझ था. ऑफिस में भी बहुत थकावट रहती थी. ये थकावट मुझे कम से कम एक डेढ़ महीने रही. इसे कोविड साइड इफ़ेक्ट भी बोल सकते हैं.

पीरियड के दौरान दर्द

एक बड़ा साइड इफ़ेक्ट जो मैंने फील किया जिसे लोग नहीं समझते या समझ नहीं पा रहे वो था कि इसने मेरे पीरियड साइकिल को बहुत ज्यादा इफ़ेक्ट किया था. मुझे लगा कि ये सिर्फ मेरे साथ हो रहा है लेकिन नहीं मैंने उस वक़्त बहुत पेपरों में पढ़ा, आर्टिकल्स में पढ़ा कि कोविड में वीमेन को पीरियड में बहुत ज्यादा दर्द फेस करना पढ़ रहा है. पीरियड में 10-15 दिनों का फ़र्क़ आने लग गया. बहुत ज्यादा दर्द होता था लगभग तीन चार महीने ऐसे रहा. अभी मुझे ऐसा कोई इशू नहीं है. अभी एक साइड इफ़ेक्ट है कि मेरे बाल बहुत गिर रहे हैं जिनको सेवियर हुआ उनको लंग्स रिलेटेड साइड इफ़ेक्ट भी हुए. मुझे खांसी नहीं थी लेकिन बॉडी पैन, थकान, पीरियड इशू, हेयर लॉस वगैरह हुआ. ये मेरे कोविड के लक्षण थे. हर कोई मेरे लिए हेल्पफुल था. मेरी फॅमिली ने मुझे बहुत सपोर्ट किया. वो लोग रेगुलरली मुझे चेक करते रहते थे. रात को भी आकर पूछते थे कि कैसी हो. एक तो मुझे देर से पता चला था तो हम लोग बहुत सावधानी बरत रहे थे. मेरे पेरेंट्स को पहले वैक्सीन लग चुकी थी लेकिन मेरे भाई को नहीं लगा थी तो भाई का भी टेस्ट कराया कि कोविड है या नहीं. शुक्र है वो सभी लोग सही थे.

गायब हुई भूख

कोविड के दौरान खाने के टेस्ट और स्मेल में मुझे कभी कोई इशू नहीं हुआ लेकिन मुझे भूख नहीं लगती थी. मेरा खाने का मन नहीं करता था. आप ऐसा भी बोल सकते है कि मेरी भूख ही मर गयी थी. मेरे पेरेंट्स थोड़ी-थोड़ी देर में मुझे कुछ न कुछ खाने को देते रहते थे. खाते हुए मुझे वोमिट सी फील होती थी. कोरोना के वक़्त मेरा 6-7 किलो वजन कम हो गया था.

यही है मेरी कहानी
यही मेरी कोविड स्टोरी है. अब में वक्सीनेटेड हूँ. हमने देखा था कोविड के वक़्त दिल्ली में क्या हाल था लोग ऑक्सीजन के लिए परेशान थे तो मैं भाग्यशाली हूँ कि मुझे इतना ज्यादा नहीं हुआ. मैं घर पे ही आइसोलेट थी. मुझे मेडिसिन देने के लिए, हर चीज़ के लिए मेरी फॅमिली मेरे सपोर्ट में थी और सब कुछ कंट्रोल में था. इसलिए में खुद को लकी मानती हूं.