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उस दिन को मैं आज तक भूल नहीं पाया, जब उसने मुझे प्रपोज किया था

उस दिन को मैं आज तक भूल नहीं पाया, जब उसने मुझे प्रपोज किया था
UP City News | Feb 20, 2021 11:07 AM IST

महीना कुछ नवंबर-दिसंबर का ही था आकाश साफ़ था हल्की हल्की धूप निकल रही थी. मैं मेरे दोस्तों के साथ कॉलेज परिसर में ही बैठकर धूप का लुत्फ उठा रहे थे. ये दिल्ली के श्यामलाल कॉलेज की बात है. उस समाय मैं और मेरे दोस्त कुछ यहां—वहां की बातें कर रहे थे तभी मेरा ध्यान कॉलेज के मेन गेट के पास जाकर टिक गया. हल्के नीले रंग की स्वेटर, पीली सलवार सूट और अपने रेशमी बालों को मोड़कर आगे की तरफ कर एक बला की खुबसूरत लड़की कॉलेज में अन्दर आ रही थी.

तभी अचानक से मेरे मुंह से निकला अरे! ये तो निशा है. मैं निशा को कई बार प्रपोज कर चुका था लेकिन उसका अब तक कोई भी जवाब नहीं मिला था. वह न तो कभी इनकार करती और न ही कभी हामी भरती थी. बस मेरे उसको प्रपोज करने पर वो सिर्फ मुझको स्टूपिड बोल कर वहां से चली जाती. यही कारण था कि मेरे दोस्त मुझे हमेशा कहा करते थे कि निशा भी तुम्हें प्यार करती है तभी तो वह तुम्हें इनकार नहीं करती है.

वेल पूरे कॉलेज में वो एकलौती लड़की थी जिसे मैं पसंद करता था. पहली बार मैंने उसको फ्रेशेर पार्टी में प्रपोस किया था तब से लेकर फाइनल ईयर तक हम दोस्त तो रहे लेकिन कभी बात आगे नहीं बढ़ी. लगभग उसकी और मेरी लगभग तीन क्लास साथ हुआ करती थी. पॉलीटेक्निक, हिंदी और इंगलिश की. बाकि की दो क्लास अलग—अलग होती थी. बात दरअसल फ़रवरी के महीने की है. तब हम दोनों फाइनल ईयर में थे. कॉलेज में वैलेंटाइन डे के दिन पार्टी थी और इस बार कॉलेज छोड़ने से पहले में एक आखरी बार निशा को प्रपोज करना चाहता था. मैं एक अच्छा सा परफ्यूम लगा कर फॉर्मल ड्रेस में वहां पहुंचा और पार्टी ज्वाइन की. हालांकि निशान काफी देर तक नहीं आई.

तकरीबन 11 बजे चुका था और मैंने उम्मीद छोड़ दी थी कि निशा शायद अब आयेगी. मैं वहां से निकलने ही वाला कि अचानक से देखा वो स्टेज पर थी. दरअसल, जिस अपने प्यार का इजहार करना था उसे माइक पर बोल कर करना था. सभी प्रेमी—प्रेमिका ऐसा ही कर रहे थे. जिन्हें देख कर मुझको काफी जलन हो रही थी. जैसे ही मैं वहां से जा रहा था तभी मेरे कान तक आवाज आई और मैं वहां रुक गया. मैंने पीछे मुड़कर कर देखा तो वो वहीं थी. जिसका मुझे इंतज़ार था और वो लड़की थी निशा. जिसने सब के सामने मुझको आई लव यू कहा था, हालांकि उस समय मुझको कुछ नहीं सूझा. मुझमें अकेले प्रपोज करने की हिम्मत तो थी मगर यूं सब के सामने, मेरा दिमाग काबू में नहीं था और समझ में नहीं आ रहा था कि हंसू या फिर रोउं. निशा ने सब के सामने मुझे आई लव यू कहा और कहा तुम्हे इसी की तलाशा थी न रोहन.

हाँ मैं तुमसे प्यार करती हूँ. हमेशा से ही. आज खो न दूँ इसलिए बोल दिया सब के सामने. क्या तुम हमेशा के लिए मेरे बनोगे. मैं ये तीन साला कॉलेज वाला प्यार नहीं चाहती इसलिए कभी तुम से बोला नहीं. मुझको डर था कही तुम्हे खो न दूं, लेकिन अब कुछ भी हो मैं नहीं डरती क्या तुम मेरे हमसफ़र बनोगे. इतना कहा कर वो मेरे पास आई आई तो मनो पार्टी हाल में शोर मचने लगा. ये शायद तीन साल में पहला प्यार का इज़हार था जो इस तरह से हुआ था. वो लम्हा मेरी ज़िन्दगी का सबसे ख़ास लम्हा था. वो प्यार वाला दिन और मेरा पहल और सच्चा प्यार मुझको उस दिन मिला. आज निशा और मैं साथ में हैं और हमारा एक बेटा भी है. इसलिए कहते हैं प्यार की जंग हमेशा अंत तक लड़नी चाहिये फिर चाहे कुछ भी हो जाये.