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Fatehpur Sikri : बुलंद दरवाजा दर्शाता है मुगल बादशाह अकबर की बुलंदी

Fatehpur Sikri : बुलंद दरवाजा दर्शाता है मुगल बादशाह अकबर की बुलंदी
UP City News | Nov 19, 2021 08:58 AM IST

आगरा. जिले के फतेहपुर सीकरी (FatehPur Sikri) कस्बे में स्थित बुलंद दरवाजा (Buland Darwaza) विश्व का सबसे बड़ा दरवाजा है. इसकी ऊंचाई तकरीबन 54 मीटर है. फतेहपुर सीकरी (FatehPur Sikri) को पहले फतहाबाद के नाम से जाना जाता था जो फारसी शब्द फतह से लिया गया है. इसका तात्पर्य होता है विजय. यही कारण है कि मुगलिया सल्तनत में सबसे प्रसिद्ध शासक अकबर ने बुलंद दरवाजे (Buland Darwaza) का निर्माण सूफी संत सलीम चिश्ती (Salim Chisti) के सम्मान में 1602 में कराया था. यह अद्भुत दरवाजा हिन्दू और फारसी स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना भी है. दरवाजे की बुलंदी आज भी मुगल बादशाह अकबर की बुलंदियों को कहता नजर आता है.

बुलंद दरवाजे (Buland Darwaza) का इतिहास
आगरा जिले के फतेहपुर सीकरी (FatehPur Sikri) में स्थित बुलंद दरवाजे (Buland Darwaza) का निर्माण सम्राट अकबर (Akbar) ने गुजरात पर विजय प्राप्त करने के बाद कराया था. दरवाजे के प्रवेश द्वार के पूर्वी तोरण पर आज भी फारसी में शिलालेख अंकित हैं. यह शिलालेख 1601 में दक्कन पर अकबर की विजय को दर्शाते हैं. 42 सीढ़ियों के ऊपर स्थित बुलंद दरवाज़ा 53.63 मीटर ऊंचा और 35 मीटर चौड़ा है. लाल बलुआ पत्थर से बने इस विशालकाय दरवाजे को सफेद संगमरमर से सजाया गया है. दरवाजे के आगे और स्तंभों पर कुरान की आयतें खुदी हैं. यह दरवाजा एक बड़े आंगन और जामा मस्जिद की ओर खुलता है. संत सलीम चिश्ती की दरगाह तक जाने के लिए भी इसी दरवाजे से होकर गुजरना पड़ता है.

अकबर के सर्वधर्म समभाव को दर्शाता है दरवाजा
बुलंद दरवाजे (Buland Darwaza) पर पारसी शिलालेख के साथ ही तोरण पर ईसा मसीह से संबंधित बाइबल की कुछ पंक्तियां भी लिखी हैं. बुलंद दरवाजे (Buland Darwaza) पर बाइबल की पंक्तियों का होना उसका सभी धर्मों के प्रति समान को दर्शाता है. माना भी जाता है कि मुगल बादशाहों में अकबर (Akbar) ही धार्मिक सुहिष्णु थे और उन्होंने अपनी बेगम के लिए अपने किले में मंदिर भी बनवाया था. दरवाज से भीतर जाने पर जामा मस्जिद और सूफी संत सलीम चिश्ती (Salim Chisti) की दरगाह का दीदार होता है. बुलंद दरवाजे (Buland Darwaza) का दीदार करने और संत सलीम चिश्ती की दरगाह पर मत्था टेकने के लिए प्रतिदिन यहां हजारों की संख्या में लोग पहुंचते हैं. यहां अकबर ने फतेहपुर सीकरी शहर भी बसाया था, जो वर्तमान में कस्बे का आकार ले चुका है.

रोचक तथ्‍य
इस धरोहर का निर्माण करने में 12 वर्षों का समय लगा था. बुलंद दरवाजे में लगभग 400 साल पुराने आबनूस से बने विशाल किवाड़ लगे हैं, जो आज भी सुरक्षित है. यह उस समय की उन्नत इंजीनियरिंग तकनीक की ओर इशारा करते हैं. इस दरवाजे की भूमि से ऊंचाई 280 फीट है. इस दरवाजे का उपयोग मुगल काल में फतेहपुर सीकरी (FatehPur Sikri) के दक्षिण-पूर्वी प्रवेश द्वार पर सैनिकों को खड़ा करने के लिए किया जाता था. ऊंचाई अधिक होने के कारण दुश्मन के आने पर सैनिकों को पहले ही पता चल जाता था. इस परिसर में स्थित लंगरखाने में खुदाई के दौरान एक सीढ़ी निकली. पुरातत्व विशेषज्ञों ने जानकारी की तो यह सुरंग काफी लंबी थी. हालांकि समय के साथ यह बंद हो चुकी है. माना जाता है कि यह सुरंग किले से बाहर निकलने के लिए खुफिया तौर पर बनाई गई होगी.

यहां तक पहुंचने का मार्ग
फतेहपुर सीकरी (FatehPur Sikri) आगरा (Agra) से 40 किमी की दूरी पर स्थित है. आगरा से यहां के लिए परिवहन निगम की बसें संचालित होती हैं. यहां से दिल्ली (Delhi) की दूरी भी महज 200 किमी है. इस इमारत के दीदार के लिए भारतीय लोगों को 50 रुपये और विदेशी पर्यटकों को 485 रुपये प्रति व्यक्ति चुकाने होते हैं. इसके खुलने का समय सुबह आठ बजे और बंद होने का समय शाम सात बजे है. यहां घूमने के लिए नवंबर से मार्च तक का समय सबसे उपयुक्त है. इसका प्रमुख कारण इस समय न तो अधिक गर्मी का होना है ​और न ही सर्दी का.