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पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क में 29 शावकों को जन्म देने वाली बाघिन का निधन

पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क में 29 शावकों को जन्म देने वाली बाघिन का निधन
UP City News | Jan 19, 2022 03:31 PM IST

बांदा. पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघों का कुनबा बढ़ाने वाली बाघिन की मौत हो गई. यह बाघिन बुंदेलखंड के विख्यात पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क में रह रही थी. यहां बाघों का कुनबा बढ़ाने में उन्होंने मुख्य भूमिका निभाई थी. इसलिए बाघिन का नाम सुपर मॉम पड़ गया था. इस सुपर मॉम की मौत के बाद सभी मंत्री और मुख्यमंत्री ने दुख व्यक्त किया है. टाइगर रिजर्व पेंच जंगल में इसने अंतिम सांस ली. पार्क प्रशासन ने इसे स्वाभाविक मृत्यु बताया. वन्य कर्मियों ने फूलों से सजी चिता में इसका ससम्मान अंतिम संस्कार किया है.

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री और वन मंत्री ने भी शोक जताया है. इस बाघिन ने 17 वर्ष में सात बार प्रसव के दौरान 29 शावकों को जन्म दिया था. इसका जन्म सितंबर 2005 में हुआ था. शुरुआती 10 वर्षों में इसने 10 और बाद से सात वर्षों में इसने 19  शावकों को जन्म दिया. यह कीर्तिमान है. यहां आने वाले पर्यटकों के लिए यह बाघिन खास आकर्षण का केंद्र थी. इसे पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क की धरोहर माना जाता था. बाघों की संख्या बढ़ाने और मध्य प्रदेश को टाइगर स्टेट का दर्जा दिलाने में भी इसकी मुख्य भूमिका रही.

सुपर मॉम बाघिन की चिता को मुखाग्नि स्थानीय आदिवासी महिला शांता बाई ने दी. नम आंखों के बीच उन्होंने कहा कि पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क की शान चली गई. हम सभी उसे बहुत याद करेंगे. शांता बाई यहां की ऐसी चर्चित आदिवासी महिला हैं जिन्होंने अपने गांव कर्माझिरी में शराब पर पाबंदी और शिकार पर रोक लगवाई. दाह संस्कार के दौरान रिजर्व टाइगर के क्षेत्र संचालक अशोक मिश्रा, उप संचालक अधर गुप्ता, सहायक वन संरक्षक बीपीपी तिवारी, परिक्षेत्र अधिकारी आशीष खोबरा गड़े, जिला पंचायत सदस्य रामगोपाल जायसवाल, गाइड और रिसॉर्ट प्रतिनिधि मौजूद रहे.

पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क और बाघों पर विशेष दिलचस्पी व नजर रखने वाले विक्रम सिंह परिहार बताते हैं कि इस बाघिन ने अपने तीसरे प्रसव में पांच शावकों को जन्म दिया था. आमतौर पर जन्म के बाद 50 फीसदी शावक जिंदा रहते हैं, लेकिन सुपर मॉम के बच्चों का जीवन दर 80 फीसदी रहा. उसके 29 बच्चों में 23 सही सलामत हैं. इसमें अपने शावकों और इलाके को सुरक्षित रखने की जबरदस्त क्षमता थी. पन्ना टाइगर रिजर्व के वन्य प्राणी चिकित्सक डॉ. संजीव कुमार गुप्ता ने बताया कि इसने अपना पूरा जीवन जीया. उसके निशान हर कहीं मौजूद हैं. उन्हें मिटाया नहीं जा सकता.