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जानिए कितने करोड़ का है यूपी में चमड़ा उद्योग, कौन से शहर हैं प्रमुख केंद्र

जानिए कितने करोड़ का है यूपी में चमड़ा उद्योग, कौन से शहर हैं प्रमुख केंद्र
UP City News | Aug 06, 2022 02:00 PM IST

उत्तर प्रदेश का कानपुर चमड़ा उद्योग का सबसे बड़ा केंद्र हैं. देश में कुल चमड़े और चमड़े के सामान के निर्यात में लगभग 20 प्रतिशत का योगदान इस जिले का है. यहां के उत्पाद को अमेरिकी और यूरोप के देशों में निर्यात किया जाता हैं. कानपुर में जूते, बेल्ट, पर्स, चप्पल, सैंडल बनाई जाती है. उत्तर प्रदेश क मेनचेस्टर कहे जाने वाले कानपुर में अब चमड़ा उद्योग धीरे खत्म हो रहा है. कभी 30 से 40 हजार करोड़ का व्यापार होता था. अब घटकर 10 हजार करोड़ रुपये हो गया है. यूपी में बूचड़खानों के बंद होने के कारण व्यापारी यहां से बिहार और पश्चिम बंगाल की ओर रूख कर रहे हैं. इससे बहुत से लोगों के सामने रोजी-रोटी की समस्या आ गयी है.

कानपुर के जाजमऊ में लगभग चार सौ ट्रेनरी हैं लेकिन कुछ वर्षों से मात्र 143 ही चल रहीं हैं. ये ट्रेनरियां भी नोटबंदी के बाद कोरोना की मार झेल रहीं हैं. वर्ष 2018-19 में कानपुर चमड़ा कारोबार से 10 लाख लोगों को रोज़गार मिला लेकिन अब मुश्किल से दो लाख लोग काम कर रहे हैं. कानपुर के चमड़ा उद्योग का कारोबार लगातार घट रहा है. वर्ष 2018-19 में व्यापार 30 हजार करोड़ रुपये का था जो 2019-20 में घटकर 25 हजार करोड़ रुपये हो गया. 2020-21 में 10 हजार करोड़ रुपये पर आ गया.

बिहार, पश्चिम बंगाल जाने लगीं फैक्ट्रियां:
वर्ष 2017 में सरकार ने गंगा नदी के प्रदूषण का हवाला देते हुए कारखानों को बंद करने या उत्पादन सीमित करने का निर्णय किया था. कानपुर में चमड़े का कारोबार धीरे-धीरे सिमटता जा रहा है. यहां की लेदर इंडस्ट्री अब बिहार, पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश की ओर शिफ्ट हो रही हैं. स्थिति यह हो गई है कि चमड़ा फैक्ट्री में काम करने वाले लोगों को अब एक महीने में दस-पंद्रह दिन ही काम मिल पाता है. इससे आमदनी कम हो गई है.गंगा में प्रदूषण रोकने की कवायद में एनजीटी और प्रदूषण कट्रोल बोर्ड ने कानपुर के चमड़ा व्यवसाय पर नकेल कसी इसलिए जाजमऊ की ज़्यादातर ट्रेनरी बंद हो गईं. ट्रेनरी मालिकों ने दूसरी जगह शिफ्ट कर दी, लेकिन जिनके पास पैसा नहीं था उन्होंने बंद कर दी. ट्रेनरी मालिकों का यह मानना है कि सरकार गंगा प्रदूषण के लिए चमड़ा उद्योग को जिम्मेदार मानती है जबकि कानपुर शहर के कई नालों का सीवर सीधे नदी में गिराया जा रहा है. सरकार ने चमड़ा उद्योग से निकलने वाली गंदगी को रोकने के लिए कॉमन इंफ्लूएंट ट्रीटमेंट प्लांट बनाए हैं. इसके बावजूद टेनरी उद्योग पर कोई सकारात्मक परिणाम नहीं दिखा. कानपुर में चमड़ा उद्योग में हर तरह के काम करने वालों की आमदनी पर प्रभाव पड़ा है. खाल का काम करने वालों, माल ढुलाई सहित अन्य कार्यों में लगे लोगों के सामने परिवार चलाना मुश्किल हो गया है.