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सुप्रीम कोर्ट: बहू के गहनों को अपने पास रखना नहीं मानी जा सकती है क्रूरता

सुप्रीम कोर्ट: बहू के गहनों को अपने पास रखना नहीं मानी जा सकती है क्रूरता
UP City News | Jan 15, 2022 12:36 PM IST

दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने एक मामले की सुनवाई करते हुए अहम फैसला सुनाया है. कोर्ट ने कहा कि सुरक्षा के लिए बहू के गहनों को अपने पास रखन को आईपीसी की धारा 498ए के तहत क्रूरता नहीं माना जा सकता है. धारा 498ए एक महिला के पति अथवा पति के रिश्तेदार को क्रूरता के अधीन करने के लिए संदर्भित करता है. सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला एक महिला द्वारा पति और ससुरालीजनों के खिलाफ क्रूरता का मामला दर्ज कराने की सुनवाई के दौरान दिया. न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी और न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी की पीठ पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट (Punjab-Haryana High Court) के आदेश के खिलाफ अपील पर सुनवाई कर रही थी.

एक महिला का पति अमेरिका में नौकरी करता है. महिला ने पति और ससुरालीजनों के खिलाफ क्रूरता का मामला दर्ज कराया. मामले में महिला के पति ने हाईकोर्ट में नौकरी करने के लिए अमेरिका जाने की अनुममि मांगी लेकिन हाईकोर्ट ने अनुमति देने की मांग वाली याचिका खारिज कर दिया. हाईकोर्ट ने माना कि महिला का पति धारा 323 (स्वैच्छिक चोट पहुंचाना), 34 (सामान्य इरादा), 406 (आपराधिक विश्वासघात), धारा 420 (धोखाधड़ी) 498ए और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत अपने बड़े भाई और माता-पिता के साथ आरोपी था.

हाईकोर्ट (Punjab-Haryana High Court) के आदेश के खिलाफ दाखिल की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कहा कि एक वयस्क भाई को नियंत्रित करने में विफलता, स्वतंत्र रूप से रहना या शिकायतकर्ता को प्रतिशोध से बचने के लिए सामंजस्य बैठाने की सलाह देना, आईपीसी की धारा 498ए के तहत अपीलकर्ता की ओर से क्रूरता नहीं है. न्यायालय ने कहा कि शिकायतकर्ता (बहू) ने गहनों का भी कोई विवरण नहीं दिया है, जो कथित तौर पर उसकी सास और जेठ द्वारा लिए गए थे.

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न्यायालय ने (Supreme Court) कहा, केवल एक सामान्य सर्वव्यापक आरोप है कि सभी अभियुक्तों ने गलत बयानी, बातों को छिपाकर आदि के माध्यम से शिकायतकर्ता के जीवन को बर्बाद कर दिया. ऐसे में शीर्ष अदालत ने कहा, अपीलकर्ता उसके माता-पिता अथवा भाई द्वारा किए गए क्रूरता के कृत्यों, या किसी अन्य गलत या आपराधिक कृत्यों के लिए उत्तरदायी नहीं हैं. ऐसे में उसे नौकरी करने के लिए अमेरिका जाने की अनुमति दी जा सकती है.