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उत्तराखंड की सीमा पर नेपाल ने कब्जा ली भारत की 5 हेक्टेयर जमीन

उत्तराखंड की सीमा पर नेपाल ने कब्जा ली भारत की 5 हेक्टेयर जमीन
UP City News | Jun 24, 2022 12:41 PM IST

नई दिल्ली: भारत की जमीन पर नेपाल भी कब्जा कर रहा है. उत्तराखंड (Uttarakhand) के चंपावत (Champawat) में भारत-नेपाल सीमा (Indo-Nepal border) पर नेपाल (Nepal) ने वन विभाग की पांच हेक्टेयर जमीन पर अतिक्रमण किया हुआ है. इस जमीन पर पक्के मकान और अस्थायी झोपड़ियां बनी हुई हैं साथ ही कुछ दुकानें भी हैं. सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के एक अधिकारी ने यह जानकारी देते हुए कहा कि बल ने केंद्रीय गृह मंत्रालय (Union Home Ministry) को इस संबंध में रिपोर्ट भेजी है. वहीं, राज्य के वन विभाग ने भी नेपाल के अतिक्रमण को लेकर शासन को रिपोर्ट भेजी है.

वन विभाग के मुताबिक, इस वक्त भारतीय वन क्षेत्र की करीब पांच हेक्टेयर ज़मीन पर नेपाल का अतिक्रमण है और पिछले तीन दशकों में इस भूमि पर किए गए अतिक्रमण के तहत पक्के निर्माण के साथ-साथ अस्थायी झोपड़ियां और दुकानें भी बना ली गई हैं. भारत की भूमि पर नेपाल के अतिक्रमण को लेकर, सीमा सशस्त्र बल (एसएसबी) के असिस्टेंट कमांडेंट अभिनव तोमर ने कहा कि, यह हाल में नहीं किया गया है. नेपाल के अतिक्रमण की रिपोर्ट केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजी गई है. अब सर्वे ऑफ इंडिया और सर्वे ऑफ नेपाल की टीमें ही सर्वे कर इसका समाधान करेंगी.

वन विभाग के अनुसार, जिले की टनकपुर शारदा रेंज से लगी भारत-नेपाल सीमा के शारदा टापू समेत ब्रह्मदेव में कई जगहों पर नेपाल की ओर से पिछले 30 सालों से अतिक्रमण किया जाता रहा है. टनकपुर के रेंजर महेश बिष्ट ने बताया कि, सीमा से लगे भारतीय वन क्षेत्र में करीब पांच हेक्टेयर भूमि पर नेपाल का अवैध कब्ज़ा है. अतिक्रमण वाली जगहों पर नेपाल के पक्के मकानों के साथ ही अस्थाई झोपडियां और दुकानें भी बनी हुई हैं. उन्होंने कहा कि इस भूमि को लेकर कई बार सीमा पर विवाद हो चुका है. वन विभाग ने भी अपने स्तर से अतिक्रमण की रिपोर्ट उत्तराखंड शासन और भारत सरकार के गृह मंत्रालय को भेजी है.

जानकारी के अनुसार, एसएसबी और वन विभाग द्वारा 2010 से 2021 तक तीन बार इस अतिक्रमण की रिपोर्ट गृहमंत्रालय और उत्तराखंड सरकार को भेजी जा चुकी है. पिछले महीने भारत और नेपाल के अधिकारियों के बीच हुई बैठक में भी यह मुद्दा उठाया गया था. तब आपसी सहमति के बाद दोनों देशों की सीमा सर्वे टीमों के द्वारा इस पर सर्वेक्षण कराए जाने की बात कही गयी थी.