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महाराष्ट्र में सत्ता के संकट के बीच राज्यपाल कोरोना संक्रमित, पढ़ें अब तक क्या-क्या हुआ

महाराष्ट्र में सत्ता के संकट के बीच राज्यपाल कोरोना संक्रमित, पढ़ें अब तक क्या-क्या हुआ
UP City News | Jun 22, 2022 10:13 AM IST

मुंबई. महाराष्ट्र में इन सत्ता पक्ष पर सियासी बादल मंडराने लगे हैं. विधान परिषद के ताजा चुनावी नतीजों के बाद महाराष्ट्र में एक नए सियासी मोड़ आया है. जिसके बाद से महा विकास आघाड़ी सरकार पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं. माना जा रहा है कि सरकार पर तभी से संकट की काल बादल की छांव पड़ गई थी, जब 106 विधायकों वाली भाजपा ने 123 वोट लेकर 3 राज्यसभा सांसद बना लिए थे. जबकि भाजपा की 5 सीटों पर अप्रत्याशित जीत हुई थी. इस बीच चर्चा थी कि महाराष्ट्र कार में मंत्री और अब बगावती रुख अख्तियार कर चुके एकनाथ शिंदे भगत सिंह कोश्यारी से दोपहर बाद मिलने वाले हैं, लेकिन तभी यह खबर भी सामने आ गई कि राजपाल भगत सिंह कोश्यारी कोरोनावायरस से संक्रमित हो गए हैं और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

जानकारी के लिए बता दें कि सोमवार की विधान परिषद चुनाव में सत्ता पक्ष में सेंधमारी करते हुए भाजपा ने 134 विधायकों का समर्थन हासिल कर अपने पांच उम्मीदवार जीता लिए. यही वजह ही कहा जाने लगा कि भाजपा ने 10 दिन में 11 विधायकों का समर्थन हासिल कर लिया है. अब उसे सरकार बनाने के लिए भी इतने ही समर्थन की दरकार है. जबकि 162 विधायकों को अपने पाले में बताने वाली विकास आघाड़ी के 5 सदस्य ही चुनाव जीत पाए. सत्ताररूढ़ शिवसेना को 55 वोट में से 52 ही हासिल हुए.

विधान परिषद के हुए चुनाव में 30 में से 10 सीटों पर चुनाव में भाजपा ने 5 उम्मीदवार उतारे थे. जबकि उसके पास संख्या केवल चार विधायकों को जिताने लायक ही थी लेकिन सत्तारूढ़ गठबंधन की ओर से कोई क्रास वोटिंग निर्दलीयों के समर्थन से उसका रास्ता साफ हो गया. राज्यसभा की तरह तरजीही आधार पर हुए चुनाव के पहले राउंड में भाजपा को 4 सीट सेना को दो-दो और एक कांग्रेसी को मिली. वहीं शिवसेना से नाराज एकनाथ शिंदे की शिवसेना में अहमियत रही है. वह हर जगह उद्धव ठाकरे और उनके बेटे आदित्य ठाकरे के साथ फोटो फ्रेम में दिखाई देते रहे हैं. वो अयोध्या दौरे पर भी साथ थे. पिछले कुछ समय से उनके पार्टी से नाराज होने की चर्चा थी और भाजपा में जाने को भी लेकर कई बार चर्चा हुई लेकिन उन्होंने सिरे से इंकार कर दिया था.

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जबकि बाकी नेता एकनाथ शिंदे ने मंगलवार शाम तक अपने पत्ते नहीं खोले. वहीं पूर्व मुख्यमंत्री विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस चुप्पी साधे रहे. जबकि शिंदे के पत्ता ना खोलने से यह साफ नहीं हो सका कि वह भाजपा के साथ जाएंगे या फिर शिवसेना का अलग गुट बना कर अपना दबदबा कायम रखेंगे. क्योंकि उन्होंने अपने एक बयान में कहा है कि वह बाला साहब के बताए रास्ते पर चल रहे हैं. वही असली शिवसेना हैं. मीडिया रिपोर्ट के हवाले से कहा जा रहा है कि शिंदे से मिलने गए शिवसेना के मिलिंद नार्वेकर और रविंद्र पाठक ने उनकी सीएम ठाकरे से फोन पर बात कराई है. जिसमें शिंदे ने एनसीपी के साथ छोड़ने की शर्त रखी है.