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दूरदर्शन की पूर्व महानिदेशक का दर्द, समय से इलाज मिल गया होता तो मां—पति को नहीं खोती

दूरदर्शन की पूर्व महानिदेशक का दर्द, समय से इलाज मिल गया होता तो मां—पति को नहीं खोती
UP City News | May 04, 2021 09:36 AM IST

नई दिल्ली. कोरोना की दूसरी लहर ने लोगों के दिलों में दहशत पैदा कर दी है. हालत ये हो गई है कि अस्पताल फुल हो चुके हैं. न आम लोगों को इलाज मिल रहा और न ही खास लोगों को. ऐसे में लोगों को इलाज के अभाव में अपनी जिंदगी से हाथ धोना पड़ रहा है. वैसे तो पूरे देश में हजारों ऐसे मामले सामने आ रहे हैं लेकिन इन दिनों सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा सुर्खियों में दूरदर्शन की पूर्व महानिदेशक अर्चना दत्ता का मामला छाया हुआ है. उन्होंने लिखा कि मेरी मां और पति को इलाज नहीं मिला . अगर समय से इलाज मिल गया होता तो मां—पति को नहीं खोती. दिल्ली में पिछले कई सप्ताह से मरीजों को इलाज नहीं मिल रहा. इस कारण मरीजों की अकाल मृत्यु हो रही है. अर्चना दत्ता ने खुलासा किया है कि उनकी मां और पति की मौत इलाज न मिलने से हुई है.
पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल के कार्यकाल में राष्ट्रपति की प्रवक्ता रह चुकीं दत्ता ने अपनी पूरी आपबीती मंगलवार को सोशल मीडिया पर लिखी. उन्होंने लिखते हुए कहा कि अगर वक्त पर अस्पताल में भर्ती करवाने के लिए उन्होंने काफी कोशिशें की लेकिन एक घंटे के अंतराल में उन्होंने अपनी मां और पति को खो दिया. 27 अप्रैल को मालवीय नगर के सरकारी अस्पताल में उनकी मृत्यु के बाद बताया कि ये दोनों ही कोरोना संक्रमित थे.
उन्होंने लिखा कि मेरे जैसे कई लोगों ने शायद ही सोचा होगा कि यह उनके साथ नहीं हो सकता है लेकिन ऐसा हुआ. मेरी मां और पति दोनों की मृत्यु बिना किसी उपचार के हुई. हम दिल्ली के उन सभी टॉप के हास्पिटलों में पहुंच पाने में असफल रहे, जहां हम जाते थे. उनकी मृत्यु के बाद अस्पताल वालों ने कोरोना संक्रमण घोषित किया.
उन्होंने बताया​ कि पति एआर दत्ता रक्षा मंत्रालय के प्रशिक्षण संस्थान के निदेशक रह चुके थे. जबकि उनकी मां बानी मुखर्जी 88 वर्ष की थीं. बेटा अभिषेक अपने पिता और दादी की मौत से सदमे में है. अभिषेक ने बताया कि वह अपने पिता और दादी को लेकर अस्पतालों में चक्कर लगाते रहे लेकिन कहीं उपचार नहीं मिला. आखिर में जब मालवीय नगर अस्पताल पहुंचे तब तक काफी देर हो चुकी थी. साल 2014 में दूरदर्शन में महानिदेशक पद से सेवानिवृत्त अर्चना दत्ता ने लिखा कि मेरी तरह दिल्ली के ऐसे कई परिवारों की आपबीती सामने आ चुकी है जिन्होंने अपने परिवार के सदस्यों को उपचार न मिलने की वजह से खो दिया. इसके लिए सरकारों का सोचना होगा.