सिटी न्यूज़

यूपी में किसी बड़े कांग्रेसी नेता का पाला बदलना हकीकत में प्रियंका गांधी की हार है

यूपी में किसी बड़े कांग्रेसी नेता का पाला बदलना हकीकत में प्रियंका गांधी की हार है
UP City News | Jun 09, 2021 02:16 PM IST

नई दिल्ली. पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद का बीजेपी के खेमे में जाना तकरीबन उसी तरह से है जैसे किसी टीम का मैच खेलने से पहले ही हार जाना. हालांकि कांग्रेस के साथ ये जो हुआ यह पहली बार नहीं है. अमूमन बीजेपी इलेक्शन से पहले इलेक्शन के बाद कांग्रेस के युवा नेताओं को लेकर ऐसी स्ट्रेटजी अपनाकर कांग्रेस को संभलने ही नहीं दे रही है. यूपी में कांग्रेस अपने पांव पर खड़ी होने की हिम्मत जुटा रही थी कि उससे पहले भाजपा ने उसे जोरदार झटका दे दिया. इससे पहले गुजरात बीजेपी ने कांग्रेस के कई मजबूत युवा नेताओं को तोड़कर अपनी और कर लिया था.

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के साथ ऐसा होना, उसके लिए खतरे की घंटी है. इससे ये भी संकेत मिल रहा है कि जिस तैयारी के साथ प्रियंका गांधी 2022 की विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रहीं थीं. वह अब उनके लिए आसान नहीं होगी. इस आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता है कि कांग्रेसी खेमे के कई और कद्दावर नेता चुनाव की तारीख घोषित होते—होते भारतीय जनता पार्टी की अग्रिम पंक्ति की शोभा बढ़ा रहे हों.

यहां यह भी जानना महत्वपूर्ण है कि जब से प्रियंका गांधी ने उत्तर प्रदेश की कमान अपने हाथों में ली थी. तब से उन्होंने कई नेताओं को जो कांग्रेस बड़े नेता मानें जाते हैं उन्हें तकरीबन किनारे कर दिया था. इसमें राज बब्बर का नाम प्रमुख है. साथ में जितिन प्रसाद कि वह हैसियत जो प्रियंका के यूपी में आने से पहले थी. वह अब नहीं रह गई थी. यहां यह बात भी गौर करने वाली है की यूपी के ओल्ड कांग्रेस लीडरशिप प्रियंका की शैली से ज्यादा खुश नहीं थी.

प्रियंका ने उन्हें साइडलाइन कर नए चेहरों को महत्व देना शुरू कर दिया था. अजय कुमार लल्लू का प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाना प्रियंका की इस नई शैली का संकेत था. ऐसे में सवाल ये हैं कि कांग्रेस उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनावों से पहले अपना गढ़ ठीक रख पाती है या नहीं. इन सारे सवालों के जवाब कांग्रेस को समय रहते ढूंढने होंगे. अन्यथा उसके कई मजबूत नेता बीजेपी में जा सकते हैं.