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बकरीद : क्या है ईद उल-अज़हा का इतिहास, क्यों मनाई जाती है बकरीद?

बकरीद : क्या है ईद उल-अज़हा का इतिहास, क्यों मनाई जाती है बकरीद?
UP City News | Jul 19, 2021 10:30 AM IST

नई दिल्ली. बकरीद (Bakrid) इस्लाम के शुभ त्योहारों में से एक है जो इस्लामिक या चंद्र कैलेंडर के 12वें महीने धू अल-हिज्जाह के 10वें दिन मनाया जाता है. ईद उल-अज़हा या ईद कुर्बान या कुर्बान बयारामी के रूप में भी जाना जाता है. ईद अल-फितर (मीठी ईद) के बाद मुसलमानों का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण त्योहार है. जहां ईद उल-फितर पवित्र महीने रमजान के अंत का प्रतीक है, उसी तरह बकरीद वार्षिक हज यात्रा के अंत का प्रतीक है. इस वर्ष भारत में यह शुभ पर्व 21 जुलाई को मनाया जाएगा.

बकरीद: उत्सव
इस दिन, दुनिया भर के मुसलमान सूरज के ज़ुहर समय (दोपहर की नमाज़ के समय) में प्रवेश करने से ठीक पहले एक मस्जिद में ईद उल-अज़हा नमाज़ पड़ते हैं. इसके बाद इमाम द्वारा एक उपदेश दिया जाता है. लोग इस दिन नए-नए कपड़े पहनकर, स्वादिष्ट व्यंजन बनाकर बड़ी धूमधाम से मनाते हैं. इस्लामी मान्यता के अनुसार इस दिन दान करने का बहुत महत्व है.

बकरीद : इतिहास

इस्लामी मान्यता के अनुसार, इस दिन का इतिहास तब शुरू हुआ जब पैगंबर इब्राहिम ईश्वर की इच्छा को पूरा करने के लिए अपने बेटे इस्माइल का वध करने का सपना देखते रहे. इब्राहिम ने तब अपने सपनों को अपने बेटे को समझाया, कि अल्लाह कैसे चाहता है कि वह एक बलिदान करे. अपने पिता के सपने को सुनकर, इस्माइल ने उसे इच्छाओं का पालन करने के लिए कहा, हालांकि, इब्राहिम ने अल्लाह की इच्छाओं को अनदेखा करने के लिए अपनी पूरी कोशिश की.