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Gorakhpur News : मनीष गुप्‍ता की मौत के दो अरोपियों से 3 घंटे तक पूछताछ, फिर भेजा गया जेल

Gorakhpur News : मनीष गुप्‍ता की मौत के दो अरोपियों से 3 घंटे तक पूछताछ, फिर भेजा गया जेल
UP City News | Oct 13, 2021 07:34 AM IST

गोरखपुर. उत्तर प्रदेश के कानपुर के व्यवसायी मनीष गुप्‍ता की पुलिस की पिटाई से हुई मौत के मामले में 16वें दिन एक लाख रुपए के दो आरोपियों उप निरीक्षक राहुल दुबे और कांस्‍टेबल प्रशांत कुमार को गोरखपुर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. तीन घंटे तक चली पूछताछ के बाद उन्‍हें न्‍यायालय में पेश किया गया. जहां से उन्‍हें 14 दिन की न्‍यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया. इसके पहले भी दो मुख्‍य आरोपियों प्रभारी निरीक्षक रहे जेएन सिंह और चौकी इंचार्ज अक्षय मिश्रा को 10 अक्‍टूबर को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है.

गोरखपुर के रामगढ़ताल थानाक्षेत्र के देवरिया बाईपास स्थित‍ होटल कृष्‍णा पैलेस में हुई कानपुर के कारोबारी मनीष गुप्‍ता की पुलिस की पिटाई से हुई मौत के मामले में दो अन्‍य आरोपियों को गिफ्तार कर लिया गया. गोरखपुर की कैण्‍ट पुलिस ने दोनों आरोपियों मिर्जापुर जिले के कोतवाली देहात थानाक्षेत्र के पचेर के रहने वाले उप निरीक्षक एक लाख रुपए के ईनामी राहुल दुबे और एक लाख रुपए के ईनामी गाजीपुर जिले के सैदपुर थानाक्षेत्र के भटौला के रहने वाले कांस्‍टेबल प्रशांत कुमार को गिरफ्तार कर लिया. अब इस मामले में दो आरोपी उप निरीक्षक विजय यादव और आरक्षी कमलेश कुमार की गिरफ्तारी होना बाकी है.

इसके पहले पुलिस ने 10 अक्‍टूबर को मनीष गुप्‍ता की पुलिस की पिटाई से हुई मौत के मामले में मुख्‍य आरोपियों थाना प्रभारी रहे एक लाख रुपए के ईनामी जगत नारायण सिंह और फल मंडी चौकी इंचार्ज एक लाख रुपए के ईनामी अक्षय मिश्रा को गिरफ्तार किया था. 10 अक्‍टूबर की ही तरह 12 अक्‍टूबर की शाम 5 बजे गिरफतार हुए उप निरीक्षक राहुल दुबे और प्रशांत कुमार को रामगढ़ताल थाने लाया गया. यहां उनके साथ सवा तीन घंटे तक पूछताछ चली. रात 8.25 बजे दोनों आरोपियों को मीडिया से बचाते हुए फिल्‍मी अंदाज में न्‍यायालय लाया गया. गोरखपुर के दीवानी न्‍यायालय के अपर मुख्‍य न्‍यायिक मजिस्‍ट्रेट राहुल सिंह की कोर्ट में दोनों आरोपियों को पेश किया गया. जहां से रात 9.30 बजे उन्‍हें 14 दिन की न्‍यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया.

पहले दिन से ही हत्‍या को हादसा साबित करने के और दोषी पुलिसकर्मियों को बचाने की नाकाम कोशिश करने वाले गोरखपुर पुलिस-प्रशासन के आलाधिकारी और पुलिसवालों ने आखिरकार 27 सितंबर को हुई घटना के 16वें दिन ये मान लिया कि मनीष गुप्‍ता की मौत दुर्घटना नहीं बल्कि हत्‍या है. 10 अ‍क्‍टूबर को जारी प्रेस नोट में जहां पुलिस ने उन्‍हें अभियुक्‍त तो माना. लेकिन, वांछित बताया था. किस मामले में वांछित हैं इसका जिक्र नहीं किया था. लेकिन, 12 अक्टूबर को उप निरीक्षक राहुल दुबे और कांस्‍टेबल प्रशांत कुमार की गिरफ्तारी के बाद जारी प्रेसनोट में गोरखपुर पुलिस ने ऊपर दी गई हेडिंग में ही ये मान लिया कि उनकी हत्‍या हुई थी.

आरोपियों के अधिवक्‍ता पीके दुबे ने बताया कि वे सब इंस्‍पेक्‍टर राहुल दुबे और प्रशांत कुमार के वकील हैं. दोनों की गिरफ्तारी के बाद एसआईटी ने छह घंटे की पूछताछ की है. इसके बाद अपर मुख्‍य न्‍यायिक मजिस्‍ट्रेट राहुल सिंह की कोर्ट में पेश किया है. यहां से अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष दोनों की बहस न्‍यायिक मजिस्‍ट्रेट ने सुनी है. इसके बाद दोनों ओरोपियों को 14 दिन की न्‍यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया. पुलिस की ओर से पुलिस कस्‍टडी रिमांड (पीसीआर) दाखिल नहीं किया गया है. इसके लिए 15 दिन का समय होता है. आईपीसी की धारा 302, 201 और 34 के उन्‍हें जेल भेजा गया है.