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क्या हिंदू लड़के और एक मुस्लिम लड़की के बीच विवाह करा सकता है 'आर्य समाज विवाह ट्रस्ट'?

क्या हिंदू लड़के और एक मुस्लिम लड़की के बीच विवाह करा सकता है 'आर्य समाज विवाह ट्रस्ट'?
UP City News | Jun 23, 2022 02:38 PM IST

गाजियाबाद: क्या 'आर्य समाज विवाह मंदिर ट्रस्ट' के रूप में पंजीकृत एक स्वयंभू ट्रस्ट एक हिंदू लड़के और एक मुस्लिम लड़की के बीच विवाह करा सकता है? इस सवाल की जाँच करने के लिए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट तैयार है. बंदी प्रत्यक्षीकरण की प्रकृति में दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस रोहित आर्य और जस्टिस एमआर फड़के ने इसी संदर्भ में कुछ प्रश्नों को उठाया है और पवित्र कुरान संबंध‌ित प्रासंगिक साहित्य और पाठ में सहायता के लिए एडवोकेट ऑफ द कोर्ट नियुक्त किए गये हैं.

जस्टिस रोहित आर्य और जस्टिस एमआर फड़के ने पूछा है कि क्या आर्य समाज विवाह मंदिर ट्रस्ट के रूप में पंजीकृत एक स्वयंभू ट्रस्ट एक हिंदू लड़के और एक मुस्लिम लड़की के बीच विवाह करा सकता है? क्या उक्त ट्रस्ट को विवाह प्रमाणपत्र जारी करने का कानूनी अधिकार है? क्या उक्त ट्रस्ट अपने उद्देश्यों में ऐसी गतिविधियों में शामिल हो सकता है? क्या कथित ट्रस्ट के उपनियमों को रजिस्ट्रार पब्लिक ट्रस्ट द्वारा या किसी पब्लिक ट्रस्ट एक्ट या अन्य अधिनियम के तहत विधिवत पुष्टि की गई है, क्योंकि दस्तावेज ऐसा नहीं दर्शाता है? क्या केवल नोटरीकृत हलफनामे पर ट्रस्ट एक मुस्लिम लड़की के धर्म को हिंदू के रूप में परिवर्तित कर सकता है? क्या कथित आर्य समाज विवाह मंदिर ट्रस्ट को अपने आप में एक आर्य समाज मंदिर माना जा सकता है, जो पूरी तरह से आर्य समाज मंदिर के राज्य/राष्ट्रीय निकाय द्वारा बिना किसी संबद्धता या अनुमति के विवाह आयोजन के लिए है? लाईव लॉ.इन (livelaw.in) नामक एक वेबसाइट पर इस मामले का उल्लेख किया गया है.

वेबसाइट के अनुसार, यह मामला राहुल उर्फ़ गोलू नमक एक हिन्दू युवक से संबंधित है. राहुल ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के साथ हाईकोर्ट का रुख किया था और आरोप लगाया कि उसकी पत्नी हिना को पुलिस अधिकारियों ने मुरैना के एक नारी सुधार गृह में अवैध रूप से बंद कर दिया है और उसको रिहा किया जाए. याचिकाकर्ता ने दावा किया कि उन दोनों (हिना और राहुल) ने अपने घर से भागने के बाद, एक-दूसरे से शादी कर ली और इसी उद्देश्य से हिना ने अपना धर्म मुस्लिम से हिंदू धर्म में परिवर्तित कर लिया. अपने दावे को साबित करने के लिए याचिकाकर्ता/पति ने 17.09.2019 को आर्य समाज सम्मेलन ट्रस्ट गाजियाबाद (यूपी) द्वारा जारी धर्मांतरण प्रमाण पत्र और विवाह प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया.

न्यायालय ने मामले के तथ्यों को गंभीरता से लिया क्योंकि अप्रैल 2022 में, उसने आर्य समाज विवाह मंदिर ट्रस्ट के महासचिव की व्यक्तिगत उपस्थिति की मांग की, ताकि वह संहिताबद्ध या प्रथागत कानून के बारे में न्यायालय को समझा सके जिसके तहत संस्था एक व्यक्ति का धर्म परिवर्तित कर सकती है.

न्यायालय ने उठाए कुछ प्रश्न

न्यायालय ने भी मामले के तथ्यों को ध्यान में रखते हुए कुछ प्रश्न उठाए. न्यायालय ने पूछा- क्या कथित आर्य समाज विवाह मंदिर ट्रस्ट बिना सत्यापन के इस तरह के हलफनामे को स्वीकार कर सकता है? क्या आर्य समाज याचिकाकर्ता और इस्तयाक खान की बेटी हिना खान के बीच, धर्मांतरण का समर्थन करते हुए, विवाह का प्रमाण पत्र जारी कर सकता है? क्या हिना खान के शपथ पत्र का कथित रूप से अध्यक्ष या सचिव आर्य समाज विवाह मंदिर ट्रस्ट गाजियाबाद के समक्ष मुस्लिम समुदाय से धर्मांतरण के संबंध में स्पष्ट मूल्य है? क्या हिना खान से मुस्लिम समुदाय से हिंदू समुदाय में धर्मांतरण की घोषणा की मांग करना और उसके बाद याचिकाकर्ता के साथ विवाह की घोषणा करना एक अवैध गतिविधि के समान है, जिसके गंभीर दंडात्मक परिणाम हो सकते हैं? क्या आर्य समाज मंदिर की इस तरह की गतिविधि का सामाजिक ताने-बाने पर गंभीर प्रभाव पड़ता है? क्या एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी द्वारा उक्त कथित आर्य समाज विवाह मंदिर ट्रस्ट गाजियाबाद के आचरण और मामलों की व्यापक जांच की आवश्यकता है?

न्यायालय के समक्ष, अतिरिक्त महाधिवक्ता ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक आदेश का भी उल्लेख किया जिसमें न्यायालय ने इसी तरह की गतिविधियों पर ध्यान दिया था और ऐसे तथाकथित आर्य समाज विवाह मंदिर ट्रस्ट द्वारा विवाह कराने के विषय में उच्च स्तरीय जांच का आदेश दिया था. कोर्ट को बताया गया कि मध्य प्रदेश में भी स्थिति चिंताजनक है क्योंकि शादी की ऐसी दुकानों द्वारा सैकड़ों लड़के-लड़कियों को अंधाधुंध विवाह प्रमाण पत्र जारी किए जा रहे हैं, जिसमें उनकी उम्र और पहचान के सत्यापन के बिना बड़ी राशि का भुगतान किया जा रहा है और उनका कोई रिकॉर्ड नहीं है. इसलिए, यह प्रार्थना की गई कि एमपी उच्च न्यायालय तत्काल आर्य समाज विवाह मंदिर ट्रस्ट प्रतिवादी संख्या 6 के मामलों में एक उच्च स्तरीय पुलिस जांच कराने पर विचार करे. हालांकि, कोर्ट ने प्रतिवादी के वकील के कहने पर मामले में सुनवाई टाल दी, जिन्होंने निर्देश लेने के लिए थोड़ा समय दिये जाने की प्रार्थना की थी. अब मामले की सुनवाई के लिए 28 जुलाई 2022 को सूचीबद्ध किया गया है.