सिटी न्यूज़

रेमडेसिविर कौन सी कंपनी बनाती है, क्यों बनाई गई दवा, यहां जानिए सब कुछ

रेमडेसिविर कौन सी कंपनी बनाती है, क्यों बनाई गई दवा, यहां जानिए सब कुछ
UP City News | May 03, 2021 03:31 PM IST

रेमडेसिविर एक एंटी वायरल दवा है. इस दवा को हेपटाइटिस सी के इलाज के लिए बनाया गया था. हालांकि यह दवा इबोला वायरस के इलाज में भी काफी कारगर साबित हुई. इसके बाद चिकित्सकों ने इस दवा का प्रयोग कोरोना वायरस के इलाज में भी शुरू कर दिया. माना जाता है रेमडेसिविर इंजेक्शन से इंसान की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है. कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में इस दवा की कालाबाजारी शुरू हो चुकी है. अस्पतालों में भर्ती मरीजों को यह दवा उपलब्ध नहीं हो पा रही है.

कोरोना संक्रमित पर हो चुका है शोध
विगत वर्ष कैंब्रिज विश्वविद्यालय ने कोरोना वायरस से संक्रमित और दुर्लभ इम्युन सिस्टम वाले एक मरीज को रेमडेसिविर दवा दी थी। इलाज के दौरान मरीज के स्वास्थ्य में जबरदस्त सुधार हुआ. यही नहीं, उसके शरीर से कोरोना वायरस का खात्मा भी हुआ. इस अध्ययन को नेचर कम्युनिकेशंस ने प्रकाशित किया था। इसके बाद से ही भारत सहित कई देशों ने कोरोना के इलाज में रेमडेसिविर का प्रयोग शुरू किया. वैज्ञानिकों ने कहा कि दवा संक्रमण के शुरुआती स्टेज में कारगर साबित होती है.

ये कंपनियां बनाती हैं रेमडेसिविर
भारत में रेमडेसिविर दवा को इंजेक्शन के रूप में कई कंपनियां बना रही हैं। इनमें डॉक्टर रेड्डी लैब (Dr Reddy's Lab), जायडस कैडिला (Zydus Cadila), सिप्ला (Cipla), हेटेरो लैब (Hetero Labs) शामिल हैं। वहीं जुबलिएंट लाइफ साइंस Jubilant Lifesciences और मायलन Mylan भी इसे बनाने के लिए प्रयासरत हैं।

यह है इसकी कीमत?
देश में इस इंजेक्शन के एक वायल की कीमत 2800 रुपये से 6000 रुपये के बीच है. यह दवा सबसे सस्ती दर पर कैडिला जायडस उपलब्ध कराती है. इसके एक वायल की कीमत 2800 रुपये है। सिप्ला द्वारा बनाई गई दवा की कीमत 4000 रुपये है। डॉक्टर रेड्डी लैब की दवा 5400 रुपये की है। इसकी सबसे महंगी दवा हेटेरो लैब की है। उसकी दवा की कीमत 5000 से 6000 रुपये की है। रेमडेसिविर की एक वायल 100 एमजी में आती है.

डब्ल्यूएचओ ने प्रयोग करने से की मनाही
रेमडेसिविर एक एंटी वायरल दवा है। चिकित्सकों ने इस दवा का प्रयोग खतरनाक बीमारी इबोला में किया गया. माना जाता है कि यह इंसान में रोग प्रतिरोध क्षमता में बढ़ोत्तरी कर देती है. कोरोना वायरस के इलाज में भी चिकित्सकों ने इस दवा का प्रयोग किया.हालांकि 20 नवंबर 2020 को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा कि कोरोना मरीजों के इलाज में चिकित्सकों डॉक्टरों को रेमडेसिविर के इस्तेमाल से बचना चाहिए। वहीं डब्ल्यूएचओ (WHO) के दावों के उलट दवा बनाने कंपनी ने रेमडेसिविर के पक्ष में दलील देते हुए कहा कि दवा कोरोना के इलाज में कारगर हैं।

कंपनियां सीधे सरकार को दे रहीं आपूर्ति
कोरोना वायरस मरीजों के इलाज में प्रयोग किए जाने के बाद सरकार कंपनियों से सीधे रेमडेसिविर इंजेक्शन की आपूर्ति ले रही है. सरकारी अस्पतालों में पहुंचने के बाद ही इन इंजेक्शनों को निजी अस्पतालों तक पहुंचाया जाता है. हालांकि कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर आने के बाद इस इंजेक्शन की काफी कमी हो गई है.