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ऑक्सीजन सिलेंडर और कंसेंट्रेटर में क्या अंतर है, यहां पढ़ें

ऑक्सीजन सिलेंडर और कंसेंट्रेटर में क्या अंतर है, यहां पढ़ें
UP City News | May 03, 2021 02:25 PM IST

नई दिल्‍ली. भारत में कोरोना वायरस की दूसरी लहर ने तबाही मचा रखी है. अस्पतालों में बेड और ऑक्सजीन की किल्लत के चलते मरीजों की मौत हो रही है. जबकि बहुत से लोगों को अस्पतालों में बेड मुहैया ही नहीं हो रहा है. ऐसे में बहुत से मरीज घर ही अपना इलाज करवा रहे हैं. कोरोना वायरस के नए स्ट्रेन में सबसे ज्यादा जो दिक्कत आ रही है वो ऑक्सजीन की है. लोगों की मौत आक्सीजन लेवल कम होने के चलते ज्यादा हो रही है. ऐसे में इन दिनों ऑक्सजीन सिलेंडर की मांग बहुत ज्यादा है लेकिन ऑक्सजीन देने के लिए सिर्फ ऑक्सजीन सिलेंडर नहीं बल्कि आक्सजीन कंसंट्रेटर भी बहुत उपयोगी है. ये एक तरह की की मेडिकल डिवाइस है. आइए दोनों में अंतर और क्या है ऑक्सजीन कंसंट्रेटर इसके बारे में आपको बताते हैं.

ऑक्सजीन कंसंट्रेटर क्या है
ऑक्सजीन कंसंट्रेटर एक मेडिकल डिवाइस है. इसका काम होता है कि आसपास की हवा से ऑक्सीजन को एक साथ इकट्ठा करना. बता दें कि पर्यावरण की हवा में 78 फीसदी नाइट्रोजन और 21 फीसदी ऑक्सीजन गैस होती है. दूसरी गैस बाकी 1 फीसदी हैं. ये डिवाइस इस हवा को अंदर लेता है और उसे फिर फिल्टर करता है. इसके बाद नाइट्रोजन को वापस हवा में छोड़ देता है और बाकी बची ऑक्सीजन मरीजों को उपलब्ध कराता है.ऑक्सीजन कंसंट्रेटर कई तरह के होते हें. जो छोटे पोर्टेबल कंसंट्रेटर होते हैं वो एक मिनट में एक या दो लीटर ऑक्सीजन मुहैया कराने की क्षमता रखते हैं.

जबकि बड़े कंसंट्रेटर 5 या 10 लीटर हर मिनट ऑक्सीजन सप्लाई कर सकते हैं. एक्सपर्ट का मानना है कि इनसे मिलने वाली ऑक्सीजन 90 से 95 फीसदी तक शुद्ध होती है. लेकिन अधिकतम रेट से सप्लाई करने पर शुद्धता में कुछ कमी आने खतरा होता है. कंसंट्रेटर्स में ऑक्सीजन सप्लाई को नियंत्रित करने के लिए वॉल्व लगाया जाता है. डब्ल्यूएचओ ने वर्ष 2015 में कंसंट्रेटर को लगातार काम करने डिजाइन की गई डिवाइस बताया था. जिससे लगातार लंबे समय तक ऑक्सीजन सप्लाई होती है.

जानें ऑक्सीजन सिलेंडर के बारे में
अस्पताल में मरीजों को जो ऑक्सीजन दी जाती है वह अस्पताल के बड़े टैंकर्स में स्टोर रहती है. इन्हीं टैंकर्स से ऑक्सीजन की सप्लाई मरीज के बेड तक पाइपलाइन के जरिए पहुंचती है. इसके अलावा ऑक्सीजन सिलेंडर में ऑक्सीजन प्लांट के जरिए ऑक्सीजन भरी जाती है और यह अस्पतालों तक सप्लाई की जाती है. कोरोना काल में इसकी बहुत ज्यादा मांग बढ़ गई है और लोगों ने सिलेंडर खरीद तक लिए हैं. जरूरत पड़ने पर लोग प्लांट तक जा रहे हैं और वहां पर ऑक्सीजन भरवा दे हैं. ऑक्सीजन प्लांट पर ऑक्सीजन बनाने के लिए सबसे पहले हवा को इकट्ठा करके उसे ठंडा किया जाता है.

फिर ऑक्सीजन प्लांट में हवास में से ऑक्सीजन को अलग करने की प्रक्रिया शुरू होती है इस प्रक्रिया को करने के लिए एयर सिपरेशन की टेक्नोलॉजी यूज़ की जाती है उसके बाद अशुद्धियों दूर करके उसे फिल्टर किया जाता है. इसके बाद हवा को डिसिटल करते हैं ताकि ऑक्सीजन को दूसरी गैसों से अलग किया जा सके. ऑक्सीजन लिक्विड के रूप में बन जाती है. ऑक्सीजन सिलेंडर में गैस भरने के लिए प्लांट लगाने की जरूरत होती है और यह काफी का कास्टली होता है.