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आज का इतिहास: आज ही के दिन क्यों मनाते हैं सेना दिवस, क्या है इसके पीछे का इतिहास जानिए इस खबर में

आज का इतिहास: आज ही के दिन क्यों मनाते हैं सेना दिवस, क्या है इसके पीछे का इतिहास जानिए इस खबर में
UP City News | Jan 15, 2022 07:49 AM IST

नई दिल्ली. इतिहास के पन्नों को पलटेंगे तो कई ऐसी रोचक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आएंगे जिन्हें पहले कभी नहीं जानते थे . 15 जनवरी को पूरी दुनिया में बेहद खास घटनाएं घटी जिन्हें जानना हर नागरिक के लिए जरूरी है. बहुत सी घटनाएं बेहद सुखुद रहीं तो बहुत से हादसों में पूरे विश्व को हिलाकर रख दिया. यूपी सिटी आपको 15 जनवरी के इतिहास को आपके सामने रखने जा रहा है. जो बेहद महत्वपूर्ण है.
सेना दिवस के अवसर पर पूरा देश थल सेना की वीरता अदम्य साहस और शौर्य की कुर्बानी की दास्तां को बयां करता है. जगह-जगह कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं. दिल्ली में सेना मुख्यालय के साथ-साथ देश के कोने कोने में शक्ति प्रदर्शन के अन्य कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाता है. सेना दिवस, भारत में हर वर्ष 15 जनवरी को लेफ्टिनेंट जनरल (बाद में फ़ील्ड मार्शल) केएम करियप्पा के भारतीय थल सेना के शीर्ष कमांडर का पदभार ग्रहण करने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है.
उन्होंने 15 जनवरी 1949 को ब्रिटिश राज के समय के भारतीय सेना के अंतिम अंग्रेज शीर्ष कमांडर जनरल रॉय फ्रांसिस बुचर से यह पदभार ग्रहण किया था. यह दिन सैन्य परेडों, सैन्य प्रदर्शनियों व अन्य आधिकारिक कार्यक्रमों के साथ नई दिल्ली व सभी सेना मुख्यालयों में मनाया जाता है. इस दिन उन सभी बहादुर सेनानियों को सलामी भी दी जाती है, जिन्होंने कभी ना कभी अपने देश और लोगों की सलामती के लिये अपना सर्वोच्च न्योछावर कर दिया.
इतिहास
15 अगस्त 1947 को जब भारत स्वतंत्र हुआ, तब देश भर में व्याप्त दंगे-फसादों तथा शरणार्थियों के आवागमन के कारण उथल-पुथल का माहौल था. इस कारण कई प्रशासनिक समस्याएं पैदा होने लगी और फिर स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सेना को आगे आना पड़ा. इसके पश्चात एक विशेष सेना कमांड का गठन किया गया, ताकि विभाजन के दौरान शांति-व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके. परन्तु भारतीय सेना के अध्यक्ष तब भी ब्रिटिश मूल के ही हुआ करते थे. 15 जनवरी 1949 को फील्ड मार्शल के एम करिअप्पा स्वतंत्र भारत के पहले भारतीय सेना प्रमुख बने थे. उस समय भारतीय सेना में लगभग 2 लाख सैनिक थे.
उनसे पहले यह पद कमांडर जनरल रॉय फ्रांसिस बुचर के पास था. उसके बाद से ही प्रत्येक वर्ष 15 जनवरी को सेना दिवस मनाया जाता है. के एम करिअप्पा पहले ऐसे अधिकारी थे जिन्हें फील्ड मार्शल की उपाधि दी गई थी. उन्होंने साल 1947 में भारत-पाक युद्ध में भारतीय सेना का नेतृत्व किया था.
15 जनवरी की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ
-1759 में लंदन के मोंटेगुवे हाउस में दुनिया के सब से महान मानवीय इतिहास और सभ्यता के संग्रहालयों में से एक माने जाने वाले ब्रिटिश संग्रहालय की स्थापना हुई.
-1784 में विलियम जोंस ने कोलकाता के फोर्ट विलियम में एशियाटिक सोसायटी ऑफ बंगाल की स्थापना.
-1934 में नेपाल और भारत में बहुत जबरदस्त भूकंप आया उसमें करीब 18 हजार लोगों की जाने गयी.
-1949 को ब्रिटिश राज के भारतीय सेना के अंतिम अंग्रेज शीर्ष कमांडर जनरल रॉय बुचर से के एम करियप्पा ने भारतीय थल सेना के पहले कमांडर-इन-चीफ का पदभार ग्रहण किया। उस दिन से 15 जनवरी को सेना दिवस के रूप में मनाया जाता है.
-भारतीय खाद्य निगम की 1965 में स्थापना हुईं.
-अंगोला की आजादी के लिए समझौते पर पुर्तग़ाल ने 1975 में हस्ताक्षर किये.
-1988 में भारत के पूर्व गेंदबाज नरेंद्र हिरवानी ने वेस्टइंडीज के खिलाफ अपने पहले टेस्ट मैच में ही 16 विकेट लिए यह उनकी ऐतिहासिक उपलब्धि हैं.
-क्वात्रोच्चि के दो बैंक खातों पर से प्रतिबंध हटाने का आदेश ब्रिटिश हाईकोर्ट ने 2006 में दिया .
15 जनवरी को जन्मे व्यक्ति
-1856 में अश्विनी कुमार दत्त का जन्म जो भारत के प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ, सामाजिक कार्यकर्ता और देश भक्त थे.
-1921 में बाबा साहेब भोंसले का जन्म जो राजनीतिज्ञ थे.
-1956 में उ.प्र.की पूर्व मुख्यमंत्री सुश्री मायावती का जन्म.
-1957 में भानुप्रिया का जन्म जो अभिनेत्री हैं.
-1982 में नील नितिन मुकेश का जन्म अभिनेता हैं.
-1888 में सैफ़ुद्दीन किचलू का जन्म जो पंजाब के स्वतंत्रता सेनानी थे.
-1938 में चुनी गोस्वामी का जन्म जो प्रसिद्ध भारतीय फ़ुटबॉलर हैं.
-1926 में खाशाबा जाधव का जन्म जो भारत के ऐसे पहले कुश्ती खिलाड़ी थे जिन्होंने हेलसिंकी ओलम्पिक में कांस्य पदक जीता था.
15 जनवरी को हुए निधन
–1761 में भारतीय इतिहास में प्रसिद्ध एक मराठा वीर सदाशिवराव भाऊ का निधन।1998 में भारत के भूतपूर्व कार्यकारी प्रधानमंत्री गुलज़ारीलाल नन्दा का निधन.
–प्रसिद्ध फ़िल्म निर्माता और दादा साहेब फाल्के पुरस्कार जीतनेवाले तपन सिन्हा का 2009 में निधन.
–2012 में भारत की प्रथम महिला फ़ोटो पत्रकार होमाई व्यारावाला का निधन.