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8 अप्रैल को 1857 की क्रांति के जनक मंगल पांडे को अंग्रेजी हुकूमत ने फांसी दे दी थी

8 अप्रैल को 1857 की क्रांति के जनक मंगल पांडे को अंग्रेजी हुकूमत ने फांसी दे दी थी
UP City News | Apr 08, 2021 01:20 AM IST

भारतीय स्वाधीनता संग्राम में 1857 का संघर्ष हमेशा लोगों को मंगल पांडे के कारण याद रहेगा. मंगल पांडे को 8 अप्रैल 1857 को स्वाधीनता संग्राम और विद्रोह की अलख जगाने के कारण अंग्रेजी हुकूमत ने फांसी के फंदे पर लटका दिया था. माना जाता है कि मंगल पांडे से अंग्रेज इतने खौफजदा हो गए थे कि फांसी के लिए उनकी तय तारीख से 10 दिन पहले ही उन्हें चुपके से फांसी के फंदे पर लटका दिया था.

बहुत कम लोगों को यह पता होगा कि फांसी की सजा मिलने से कई दिन पहले मंगल पांडे ने अंग्रेजी हुकूमत की कैद में खुद की जान लेने की भी कोशिश की थी, हालांकि इसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे.

कौन थे मंगल पांडे

बता दें कि मंगल पांडे मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के नगवा गांव के रहने वाले थे. उनका जन्म 19 जुलाई 1827 को उत्तर प्रदेश के ही फैजाबाद के सुरूरपुर गांव में हुआ था. जिसके बाद वह अपने गृह जनपद बलिया आ गए थे. 1849 में मात्र 18 साल की उम्र में उन्होंने ईस्ट इंडिया कंपनी की 34वीं बंगाल नेटिव इन्फेंट्री बटालियन बतौर सिपाही ज्वाइन की थी.

क्यूं हुआ था 1857 का विद्रोह

बताया जाता है कि 1857 के आसपास अंग्रेजी सेना में मौजूद सिपाहियों को नई एनफील्ड राइफल दी गई थी, जिसकी कारतूस को मुंह से काटकर राइफल में लोड किया जाता था. सैनिकों को यह पता चला कि इन राई फलों में कि कारतूस में सूअर और गाय की चर्बी मिली होती है. जिसके बाद हिंदुओं के साथ-साथ मुस्लिम सैनिकों की धार्मिक भावनाएं आहत होने लगी. सैनिकों ने पहले कारतूस का इस्तेमाल करने से सीधे सीधे मना कर दिया. उस दौरान मंगल पांडे बंगाल की बैरकपुर छावनी में तैनात थे. वहां उन्होंने 29 मार्च 1857 को अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ विद्रोह का बिगुल फूंक दिया. इसी दिन मंगल पांडे ने दो अंग्रेजी अधिकारियों पर हमला बोल दिया, जिसके बाद पूरे देश में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ जंग छिड़ गई. हालांकि मंगल पांडे को गिरफ्तार कर लिया गया तथा बाद में उनके खिलाफ मुकदमा चलाया गया और उन्हें फांसी की सजा सुना दी गई. बता दें कि मंगल पांडे को 18 अप्रैल की तारीख फांसी के लिए मुकर्रर की गई थी. लेकिन उन्हें चुपके से अंग्रेजी हुकूमत ने 10 दिन पहले ही 8 अप्रैल को उन्हें फांसी दे दी थी.

मंगल पांडे की फांसी के बाद पूरे भारत में सिपाहियों ने विद्रोह कर दिया था तथा इस विद्रोह में सिपाहियों का साथ आम जनता ने भी दिया था. इस दौरान 20 अप्रैल को हिमाचल प्रदेश के कसौली में सिपाहियों ने एक पुलिस चौकी में आग लगा दी थी. फिर मई में मेरठ में भारतीय घुड़सवार सैनिकों ने विद्रोह कर दिया था. जिसके बाद धीरे-धीरे यह आंदोलन सैनिकों से होते हुए आम जनता में फैल गया तथा सभी अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ लामबंद हो गए. हालांकि इस विद्रोह को अंग्रेजी हुकूमत दबाने में सफल हो गई थी.

बलिया में अंग्रेजी हुकूमत से मिल गई थी आजादी

बता दे कि अट्ठारह सौ सत्तावन की क्रांति के दौरान मंगल पांडे के गृह जनपद बलिया में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने अगस्त महीने में 3 दिन के लिए ही बलिया को अंग्रेजों की हुकूमत से मुक्त करा लिया था. इस दौरान चित्तू पांडे बलिया के जिलाधिकारी के पद पर बैठे थे तथा महावीर मिश्रा को जिले का एसपी बनाया गया था. हालांकि 3 दिनों बाद दोबारा बलिया को भी अंग्रेजों ने कैप्टन नील के नेतृत्व में अपने कब्जे में ले लिया था.