सिटी न्यूज़

महज 9 साल में ही अजय मिश्रा बन गए केंद्रीय गृह राज्यमंत्री, पढ़ें उनका सियासी सफर

महज 9 साल में ही अजय मिश्रा बन गए केंद्रीय गृह राज्यमंत्री, पढ़ें उनका सियासी सफर
UP City News | Oct 09, 2021 09:37 AM IST

लखनऊ. लखीमपुर खीरी! जी हां यह नाम है, जिसके कारण आज पूरे प्रदेश में हाहाकार मचा हुआ है. आठ लोगों की मौत के बाद पूरे प्रदेश की राजनीति अचानक गर्मा गई है. विपक्षी कानून व्यवस्था को लेकर योगी सरकार पर निशाना साध रही है तो घटना का प्रमुख कारक केंद्रीय गृह राज्यमंत्री सारे आरोपों को बेबुनियाद करार दे रहे हैं. केंद्रीय गृह राज्यमंत्री का कहना है कि उनके बेटे का घटना से कोई वास्ता नहीं है और किसानों में छिपे अराजक तत्वों ने बवाल किया और किसानों के साथ उनके भी चार आदमियों की मौत हो गई. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि नौ साल में एक बार विधायक और​ फिर दो बार सांसद बनने के बाद अजय मिश्रा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐसा क्या देखा कि उन्हें केंद्रीय गृह राज्यमंत्री बना दिया. आइये जानते हैं उनका पूरी सियासी सफर...

खेल में रही रुचि, 2012 में जीता विधायकी का चुनाव
लखीमपुर खीरी के बनवीरपुर गांव में जन्मे 61 वर्षीय अजय मिश्रा ने कानपुर के क्राइस्ट चर्च कॉलेज से विज्ञान और डीएवी कॉलेज कानपुर से कानून में स्नातक डिग्री हासिल की. शुरुआत से ही उनका रुझान खेलकूद मसलन क्रिकेट, कुश्ती और पावर लिफ्टिंग की ओर रहा. कॉलेज और यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान उन्होंने कई प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग किया और जीत हासिल की. साल 2012 के विधानसभा चुनाव में मिश्रा निघासन सीट से जीतकर पहली बार विधायक बने. इस चुनाव में उन्होंने उन्हें 31 हजार से अधिक वोटों से जीत हासिल हुई. बताया जाता है कि जमीनी स्तर पर सक्रिय रहने के कारण विधायक मिश्रा की लोकप्रियता बढ़ती गई और लोग उन्हें प्यार करने लगे. यही कारण था कि वह 2014 के लोकसभा चुनाव भाजपा की टिकट पर खीरी से एक लाख दस हज़ार से ज़्यादा वोटों से जीतकर लोकसभा पहुंचे. 2019 के आम चुनाव में अजय मिश्रा ने अपनी जीत के अंतर को दोगुना करते हुए अपने प्रतिद्वंद्वी को दो लाख 18 हज़ार से अधिक वोटों से हराया. राजनीतिक कद बढ़ने के कारण 2019 के बाद वह कई संसदीय समितियों के सदस्य भी रहे.

चौंकाने वाला था कैबिनेट में मिश्रा का नाम
आगामी उत्तर प्रदेश के चुनाव से पूर्व मोदी कै​बिनेट में अजय मिश्रा को गृह राज्यमंत्री बनाया गया. यह खबर बाहर आते ही सभी चौंक गए. किसी को उम्मीद नहीं थी कि महज दो बार के सांसद को इतना बड़ा पद दिया जा रहा है. हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि प्रदेश में योगी सरकार पर ब्राह्मण विरोधी होने का आरोप लगता रहा है. ऐसे में ब्राह्मण समाज में सरकार के खिलाफ आक्रोश है. डैमेज कंट्रोल करने के लिए ही मोदी कैबिनेट में ब्राह्मण चेहरे के ​रूप में अ​जय मिश्रा को स्थान दिया गया. मिश्रा लखीमपुर खीरी जिले से आते हैं और इसके आसपास के जिलों हरदोई, सीतापुर और शाहजहांपुर में भी ब्राह्मणों की संख्या काफी है.

विवादित बयान के बाद किसानों के निशाने पर आए
सांसद अजय मिश्रा का लखीमपुर खीरी और आसपास के इलाके में अच्छा रसूख है और लोग उनकी इज्जत करते हैं. हालांकि विगत दिनों उनका एक बयान सामने आया, जिसमें आंदोलन कर रहे किसानों को धमकाते नजर आए. इसके बाद से ही किसानों में उनके खिलाफ आक्रोश था. हालांकि राजनीतिक विश्लेषक यह भी मानते हैं कि अजय मिश्रा की यह बयानबाजी राजनीति से प्रेरित हो. बताया जाता है कि तराई के इलाके में रहने वाले सिख लोग किसान आंदोलन के बाद भाजपा के लिए चुनौती थे और कृषि क़ानूनों का विरोध कर रहे किसानों के लिए लखीमपुर से पैसा, अनाज और अन्य सामान भेजा जा रहा था. उनके अनुसार इन्हीं बातों का मुक़ाबला करने के लिए अजय मिश्रा के कद को बढ़ाया गया, जिससे किसानों को मदद नहीं मिल सके.