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जानिए यूपी के मंत्री जितिन प्रसाद के बारे में, कभी थे कांग्रेस का युवा चेहरा

जानिए यूपी के मंत्री जितिन प्रसाद के बारे में, कभी थे कांग्रेस का युवा चेहरा
UP City News | Aug 06, 2022 12:24 PM IST

यूपी सरकार के मंत्री जितिन प्रसाद का कद योगी आदित्यनाथ-2 सरकार में और बढ़ गया है. इस बार इन्हें भारी भरकम मंत्रालय लोक निर्माण विभाग की जिम्मेदारी दी गई है. कभी कांग्रेस पार्टी का युवा चेहरा रहे जितिन प्रसाद को भाजपा ने हाथोंहाथ लिया. वे कांग्रेस पार्टी में राहुल गांधी के करीबी माने जाते थे. वर्ष 2021 में कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठाने के बाद पार्टी से दूरी बनानी शुरू कर दी थी और जून 2021 में भाजपा में शामिल हो गए.

जितिन प्रसाद के पिता जितेंद्र प्रसाद कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता थे. उनके निधन के बाद जितिन राजनीति में सक्रिय हुए. कांग्रेस के टिकट पर सांसद बनने के बाद इन्हें केंद्र में मंत्री बनाया था. जितिन प्रसाद की शुरुआती शिक्षा दून स्कूल से हुई थी. दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकाम व दिल्ली के अंतरराष्ट्रीय प्रबंधन संस्थान से एमबीए किए थे. जितिन प्रसाद कांग्रेस के कोर ग्रुप जी-23 के सदस्य भी थे. 2001 में युवा कांग्रेस का राष्ट्रीय सचिव बने थे. वर्ष 2004 में शाहजहांपुर से लोकसभा चुनाव जीते. इन्हें केंद्र की मनमोहन सरकार में मंत्री बनाया गया. वर्ष 2009 में सीट आरक्षित होने पर इन्होंने लखीमपुर कीइ धौराहरा सीट से चुनाव जीते. जितिन प्रसाद वर्ष 2008 में इस्पात राज्यमंत्री बने थे. 2009 से 2011 तक सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई थी. जनवरी 2011 में इनका मंत्रालय बदलकर पेट्रोलयम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई थी. अक्टूबर 2012 से मई 2014 तक मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री रहे.
वर्ष 2014 व 2019 की इन्हें हार का सामना करना पड़ा. इस बीच 2017 में तिलहर विधानसभा से चुनाव लड़े लेकिन जीत नहीं मिली. जितिन प्रसाद ने 9 जून 2021 को भाजपा की सदस्यता ग्रहण की थी. सितंबर 21 में इन्हें योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री बनाया गया. पहली बार इन्हें तकनीकी शिक्षा मंत्री की जिम्मेदारी दी गई थी लेकिन दूसरी बार लोक निर्माण मंत्री बनाया गया है.

मुख्यमंत्री ने जितिन प्रसाद के ओएसडी को हटाया

लोक निर्माण मंत्री जितिन प्रसाद के ओएसडी अनिल कुमार पांडेय को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हटा दिया है. इनके खिलाफ तबादलों के दौरान लेन-देन की शिकायत मिली थी. मुख्यमंत्री ने इसकी जांच कराई तो यह मामला सामने आया कि लोक निर्माण विभाग में इंजीनियरों के ट्रांसफर में गड़बड़ियां की गईं हैं. उत्तर प्रदेश में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर आने से पहले अनिल कुमार पांडेय केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय में अवर सचिव के पद पर तैनात थे. जितिन प्रसाद जब कांग्रेस सरकार में केंद्रीय मंत्री थे तब अनिल कुमार पांडेय इनके कार्यालय में पदस्थापित थे. अनिल कुमार पांडेय ने उत्तर प्रदेश में अपनी पोस्टिंग के लिए आवेदन किए थे.

जितेंद्र प्रसाद ने सोनिया गांधी को दी थी चुनौती

जितिन प्रसाद के पिता जितेंद्र प्रसाद कांग्रेस के बड़े नेता थे. वर्ष 2000 में कांग्रेस अध्‍यक्ष पद के लिए सोनिया गांधी को चुनौती दी थी, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था. जितिन प्रसाद का परिवार पारंपर‍िक तौर पर कांग्रेसी रहा है. इनके दादा ज्‍योति प्रसाद कांग्रेस सदस्‍य थे. वे कई अहम पदों पर रहे. जितेंद्र प्रसाद वर्ष 1970 में उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्‍य के रूप में राजनीति में कदम रखा. 1971 में शाहजहांपुर से लोकसभा सदस्य चुने गए. वे कांग्रेस के उपाध्‍यक्ष भी थे. वे वर्ष 2000 में अध्‍यक्ष पद के चुनाव में सोनिया गांधी के विरोध में खड़े हुए. नवंबर 2000 में हुए चुनाव में इन्हें हार का सामना करना पड़ा था. मतदान में पड़े 7542 वोटों में से जितेंद्र प्रसाद को मात्र 94 वोट मिले थे.