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क्या एंटीबायोटिक्स देना बच्चों के स्वास्थ्य पर खतरे की निशानी है? जानें यहां

क्या एंटीबायोटिक्स देना बच्चों के स्वास्थ्य पर खतरे की निशानी है? जानें यहां
UP City News | Apr 14, 2021 11:21 PM IST

रटगर्स यूनिवर्सिटी द्वारा किए गए एक शोध द्वारा यह पता चला है कि जिन नवजात शिशुओं में शुरुआती 2 वर्षों में एंटीबायोटिक्स दिया जाता है, उनमें कई अन्य बीमारियों जैसे अस्थमा, सांस संबंधी एलर्जी, सीलिएक, एक्जिमा, मोटापा और एकाग्रता में कमी जैसे रोगों का खतरा बढ़ जाता है. साथ ही उनके इम्यून सिस्टम पर भी इसका बुरा असर पड़ता है. जिसकी वजह से ताउम्र उन्हें कई सारी समस्याओं का सामना करना पड़ता हैं.

आपको बता दें की इंसानी शरीर में मौजूद माइक्रोबायोम बचपन में इम्युनिटी, मेटाबोलिज्म और मानसिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. गौरतलब है कि माइक्रोबायोम हमारे शरीर में मौजूद वो खरबों सूक्ष्मजीव होते हैं जो स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से लाभदायक होते हैं. और वह हमारे सेहतमंद शरीर का राज़ भी होते हैं.

एक रिपोर्ट के अनुसार, 14,572 बच्चों का अध्ययन किया गया जिसमे मायो क्लीनिक और रटगर्स यूनिवर्सिटी द्वारा किया यह शोध जर्नल मायो क्लिनिक प्रोसीडिंग्स में छपा है. इस शोध में 2003 से 2011 के बीच जन्मे 14,572 बच्चों का अध्ययन किया है. जिनमें से करीब 70 फीसदी को जन्म के दो वर्षों के भीतर कम से कम एक एंटीबायोटिक दिया गया था. उनमें से ज्यादातर बच्चे मुख्य रूप से सांस या कान सम्बन्धी संक्रमण से ग्रस्त थे.

तमाम शोधकर्ता और रटगर्स के सेंटर फॉर एडवांटेड बायोटेक्नोलॉजी एंड मेडिसिन के निदेशक मार्टिन ब्लेसर ने बताया कि एंटीबायोटिक्स का ज्यादा उपयोग न चाहते हुए भी शरीर में  एंटीबायोटिक रेसिस्टेन्स बैक्टीरिया के विकास का कारण बन जाता है. बचपन में बीमारियों के ग्रस्त होने पर जब एंटीबायोटिक्स का प्रयोग किया जाता है तो वो बच्चों के इम्यून सिस्टम और मानसिक विकास पर असर डालता है. एंटीबायोटिक्स का प्रयोग शरीर में मौजूद माइक्रोबायोम पर असर डालता है, जो आगे चलकर कई अन्य समस्याओं का कारण बन जाता है.